बिहार हार के बाद रीसेट मोड में RJD: लालू की जगह तेजस्वी के हाथ होगी पार्टी की कमान, रोहिणी के आरोपों पर चुप्पी
बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अब संगठनात्मक और राजनीतिक रीसेट की तैयारी में है. 16–17 जनवरी को हुई समीक्षा बैठक में तेजस्वी यादव को जल्द राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के संकेत मिले, जिसे लालू प्रसाद यादव की सेहत और नेतृत्व में स्थिरता की जरूरत से जोड़ा जा रहा है. इसी बीच लालू की बेटी रोहिणी आचार्य के ‘पार्टी में गिद्धों की पहचान’ वाले बयान ने अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया.
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अब रीसेट मोड में जाता दिख रहा है. 2020 में 80 सीटें जीतने वाली पार्टी का आंकड़ा पिछले चुनाव में 35 सीटों पर सिमट गया, जिसने न सिर्फ संगठन बल्कि लालू परिवार के भीतर भी अंदरूनी तनाव को सतह पर ला दिया है. इसी पृष्ठभूमि में 16 और 17 जनवरी को हुई RJD की अहम बैठक में जहां भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ, वहीं लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के तीखे बयान ने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक चुनावी हार के बाद RJD की पहली औपचारिक समीक्षा बैठक थी. लेकिन समीक्षा से पहले ही रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ऐसा पोस्ट डाल दिया, जिसने पार्टी नेतृत्व को असहज कर दिया. उन्होंने अपने ही भाई और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को चुनौती देते हुए लिखा कि पार्टी में “गिद्धों की पहचान कर उन्हें सजा देने का साहस” दिखाया जाए. उनके इस बयान को सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व और संगठन के भीतर बैठे कुछ प्रभावशाली चेहरों पर हमला माना गया.
तेजस्वी को बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी
रोहिणी के हमलावर तेवरों के बावजूद RJD नेतृत्व ने संकेत दिया है कि पार्टी तेजस्वी यादव को जल्द ही राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (National Working President) बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी. इसकी बड़ी वजह लालू प्रसाद यादव की बिगड़ती सेहत बताई जा रही है. फिलहाल तेजस्वी, लालू के साथ पार्टी की जिम्मेदारियां साझा कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें और मजबूत भूमिका देने पर सहमति बनती दिख रही है.
बैठक के बाद RJD के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “तेजस्वी जी ने बैठक में बताया कि पिछले साल के विधानसभा चुनाव में RJD को 2024 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 30 लाख से ज्यादा वोट मिले. सभी नेताओं ने तेजस्वी जी पर पूरा भरोसा जताया. अगर उन्हें जल्द राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाता है, तो इसमें कोई हैरानी नहीं होगी.”
यह बयान साफ संकेत देता है कि चुनावी हार के बावजूद पार्टी तेजस्वी को ही भविष्य का चेहरा मानकर आगे बढ़ना चाहती है.
रोहिणी बनाम तेजस्वी: पारिवारिक दरार, राजनीतिक असर
रोहिणी आचार्य का यह हमला अचानक नहीं है. पिछले साल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही उनका तेजस्वी से टकराव खुलकर सामने आ गया था. खास तौर पर वह RJD के राज्यसभा सांसद और तेजस्वी के राजनीतिक सलाहकार संजय यादव को लगातार निशाने पर लेती रही हैं. उनका X पोस्ट भी उसी नाराजगी की कड़ी माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने लिखा, “सिर्फ समीक्षा बैठक का दिखावा करने से कुछ नहीं होगा. आत्ममंथन और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है. समीक्षा तभी सार्थक होगी, जब पार्टी में काबिज गिद्धों की पहचान कर कार्रवाई की जाए. जनता सब जानती है.”
हालांकि पार्टी नेतृत्व ने सार्वजनिक तौर पर रोहिणी के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन अंदरखाने इसे अनुशासनहीनता और गलत समय पर दिया गया बयान माना जा रहा है.
रणनीति में बदलाव के संकेत
बैठक में RJD ने यह भी स्वीकार किया कि सिर्फ नीतीश कुमार सरकार की आलोचना या NDA नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया देने की राजनीति अब कारगर नहीं रही. सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने तय किया है कि वह अब जमीन पर लोगों से सीधा संवाद बढ़ाएगी और मुद्दों को लेकर सक्रिय राजनीति करेगी. यह रणनीतिक बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि लगातार चुनावी झटकों ने RJD को रक्षात्मक मोड में धकेल दिया है. अब पार्टी नेतृत्व मान रहा है कि बिना आक्रामक जनसंपर्क और ठोस मुद्दों के सत्ता में वापसी मुश्किल है.
संसद सत्र से पहले तेजस्वी की सक्रियता
रणनीति में बदलाव के संकेत संसद तक भी दिखे. समीक्षा बैठक से ठीक एक दिन पहले तेजस्वी यादव ने RJD के चार लोकसभा सांसदों और पांच राज्यसभा सांसदों के साथ बैठक की. इस बैठक में आगामी बजट सत्र के लिए संसद के भीतर और बाहर अपनाई जाने वाली रणनीति पर चर्चा हुई. 17 जनवरी की बैठक का दायरा भी इसी कारण बढ़ाया गया, जिसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए.
RJD किन मुद्दों पर सरकार को घेरेगी?
RJD के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने बताया, “बजट सत्र में दोनों सदनों के लिए रणनीति पर चर्चा हुई. हम बिहार के लिए विशेष पैकेज, गेहूं और मक्का के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग को लगातार उठाते रहेंगे. इसके अलावा BPL (गरीबी रेखा से नीचे) की स्पष्ट परिभाषा तय करने की मांग भी करेंगे.”
BPL आंकड़ों पर सरकार को घेरने की तैयारी
इस मुद्दे को RJD के औरंगाबाद सांसद अभय कुशवाहा पहले ही उठा चुके हैं. उन्होंने सवाल किया था कि बिहार की 13 करोड़ आबादी में से 8.5 करोड़ लोग कैसे ₹5 प्रति किलो चावल योजना के लाभार्थी हो सकते हैं. कुशवाहा ने यह भी पूछा कि क्या यही 8.5 करोड़ लोग अन्य BPL योजनाओं का भी लाभ ले रहे हैं, या फिर सरकार के आंकड़ों में ही गड़बड़ी है.
आगे की राह: एकजुटता या टकराव?
RJD के लिए यह वक्त आत्ममंथन और संगठनात्मक मजबूती का है. तेजस्वी यादव को आगे बढ़ाने की तैयारी जहां नेतृत्व में स्थिरता का संकेत देती है, वहीं रोहिणी आचार्य के बयान यह सवाल भी खड़े करते हैं कि क्या पार्टी अंदरूनी कलह से उबर पाएगी. बिहार की राजनीति में वापसी के लिए RJD को न सिर्फ रणनीति बदलनी होगी, बल्कि परिवार और संगठन के भीतर उठ रही आवाज़ों को भी संभालना होगा. सवाल यही है - क्या यह रीसेट RJD को फिर से खड़ा करेगा, या अंदरूनी घमासान पार्टी की मुश्किलें और बढ़ाएगा?





