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सिद्धार्थ शर्मा का फ्लैट अटैच, आरोपी श्यामकानु महंता का अकाउंट हुआ डी-फ्रीज, Zubeen Garg केस में नए UPDATES

Zubeen Garg की मौत से जुड़े मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. जहां सिद्धार्थ शर्मा के फ्लैट को अटैच रखने का आदेश दिया गया, वहीं आरोपी श्यामकानु महंता का बैंक अकाउंट डी-फ्रीज कर दिया गया.

सिद्धार्थ शर्मा का फ्लैट अटैच, आरोपी श्यामकानु महंता का अकाउंट हुआ डी-फ्रीज, Zubeen Garg केस में नए UPDATES
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( Image Source:  instagram-@zubeen.garg )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 2 March 2026 4:58 PM IST

असम के फेमस सिंगर जुबिन गर्ग के मौत मामले में अदालत की हालिया सुनवाई के बाद कई अहम अपडेट सामने आए हैं. कोर्ट ने एक ओर जहां आरोपी श्यामकानु महंता के बैंक खाते को डी-फ्रीज करने का आदेश दिया, वहीं दूसरी तरफ सिद्धार्थ शर्मा के फ्लैट को अटैच रखने का निर्देश बरकरार रखा. इन फैसलों ने केस की दिशा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है.

वहीं, असम सरकार ने इस केस की रोजाना सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला लिया है. इन नए आदेशों के बाद अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर टिकी है.

श्यामकानु महंता का बैंक खाता डी-फ्रीज

अदालत ने आरोपी श्यामकनु महंता का बैंक खाता फ्रीज करने का फैसला रद्द कर दिया है. कोर्ट का कहना है कि जांच एजेंसी ने खाता सीज करते समय तय कानूनी नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया. खास तौर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के तहत जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. सरकारी वकील ने दलील दी कि यह सिर्फ तकनीकी गलती थी और इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए. लेकिन जज ने साफ कहा कि कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर आगे चलकर सही कानूनी आधार पेश किया जाता है, तो दोबारा एक्शन लिया जा सकती है.

सिद्धार्थ शर्मा का फ्लैट रहेगा अटैच

एक अन्य आरोपी सिद्धार्थ शर्मा के अपार्टमेंट को दो साल या अगले आदेश तक अटैच रखने का निर्देश दिया गया. कोर्ट ने कहा कि संपत्ति के बदले कोई बैंक गारंटी नहीं दी गई है. फ्लैट खोलने से पहले शर्मा को सीआईडी थाने में 16 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा. जांच एजेंसी का आरोप है कि यह रकम सिंगर की थी, जिसे फ्लैट खरीदने में लगाया गया.

‘सिंगापुर फाइल्स’ पर रोक

अदालत ने प्रॉसिक्यूटर को आदेश दिया है कि 16 जीबी की पेन ड्राइव की एक कॉपी एक हफ्ते के अंदर बचाव पक्ष को दे दी जाए, ताकि वे उसमें मौजूद कंटेंट देख सकें. हालांकि, बचाव पक्ष की उस मांग को कोर्ट ने मंजूर नहीं किया, जिसमें उन्होंने कथित “सिंगापुर फाइल्स” तक पहुंच देने की बात कही थी. अदालत ने साफ कहा कि सिंगापुर पुलिस से जुड़े दस्तावेज सीधे तौर पर भारतीय आपराधिक प्रक्रिया के तहत नहीं आते.

फास्ट-ट्रैक कोर्ट की तैयारी

असम सरकार ने इस मामले की रोजाना सुनवाई कराने के लिए एक स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला किया है. सरकार चाहती है कि केस की सुनवाई तेजी से हो और जल्द फैसला आए. इस केस की अगली सुनवाई 13 मार्च को तय की गई है, जबकि इससे जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई 19 मार्च को होगी.

जुबिन गर्ग
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