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चांद पर घर, ऑटो वाले को 1 रुपया भी नहीं? ओवैसी का असम CM और केंद्र सरकार पर हमला | Video

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा के बयान को लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. ओवैसी ने कहा कि एक तरफ सरकार चांद पर घर और बड़ी अर्थव्यवस्था की बात करती है, वहीं गरीब ऑटो चालक को एक रुपया देने में भी हिचकिचाती है.

चांद पर घर, ऑटो वाले को 1 रुपया भी नहीं? ओवैसी का असम CM और केंद्र सरकार पर हमला | Video
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नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 5 Feb 2026 10:04 AM

देश की सियासत में एक बार फिर बयानबाज़ी को लेकर घमासान छिड़ गया है. इस बार निशाने पर हैं Himanta Biswa Sarma, जिनके कुछ बयानों को लेकर विपक्षी नेता लगातार सवाल उठा रहे हैं. खास तौर पर “मियां” समुदाय को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है.

इसी मुद्दे पर Asaduddin Owaisi ने तीखा हमला बोला और कहा कि देश एक तरफ चांद पर घर बनाने और बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की बात करता है, लेकिन गरीब ऑटो चालक को एक रुपया देने में भी हिचकिचाता है. उनके इस बयान के बाद बहस और तेज हो गई है.

ओवैसी ने असम के सीएम पर क्या आरोप लगाए?

ओवैसी ने कहा कि क्या कोई मुख्यमंत्री इस तरह की भाषा इस्तेमाल कर सकता है कि अगर ऑटो-रिक्शा चलाने वाला ‘मियां’ है तो किराया कम दे दो. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न सिर्फ एक समुदाय का अपमान करते हैं, बल्कि समाज में नफरत भी बढ़ाते हैं.

‘मियां’ समुदाय को लेकर ओवैसी ने क्या कहा?

ओवैसी ने समझाया कि असम में “मियां” शब्द उन मुसलमानों के लिए इस्तेमाल होता है जिन्हें अंग्रेजों के दौर में खेती और मजदूरी के लिए वहां लाया गया था. उन्होंने कहा कि ये लोग भारत के नागरिक हैं, बंगाली बोलते हैं और दशकों से वहीं रह रहे हैं, इसलिए उनके साथ इस तरह की भाषा ठीक नहीं है.

पीएम मोदी को लेकर ओवैसी ने क्या तंज कसा?

ओवैसी ने कहा कि सरकार एक तरफ देश को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने और चांद पर घर बनाने जैसे सपनों की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ गरीब आदमी को उसका पूरा किराया देने में भी हिचकिचाती है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे विरोधाभास के साथ बड़ा सपना कैसे पूरा होगा.

सीएम हिमंत विश्व सरमा का बयान क्या था?

सरमा ने हाल के दिनों में “मियां” समुदाय को लेकर कई सख्त बयान दिए थे. उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों को यहां रहने या रिक्शा चलाने का अधिकार नहीं है. यहां तक कहा कि अगर वे शांति चाहते हैं तो उन्हें यहां से चले जाना चाहिए. उनके इन बयानों के बाद विवाद बढ़ गया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया.

कोटद्वार मामले को लेकर ओवैसी ने क्या कहा?

ओवैसी ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि दीपक कुमार नाम के एक युवक ने एक बुजुर्ग दुकानदार की मदद की, लेकिन उसके खिलाफ ही केस दर्ज कर दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी गरीब या परेशान इंसान की मदद करना गुनाह है.

राजनीति में क्या संकेत मिल रहे हैं?

इस मामले ने साफ कर दिया है कि बयानबाज़ी अब सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहती, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन जाती है. एक तरफ सरकार विकास और बड़े सपनों की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष सामाजिक सौहार्द और बराबरी के मुद्दे को लेकर हमलावर है. आने वाले दिनों में यह विवाद और राजनीतिक गर्मी बढ़ा सकता है.

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