17 साल की उम्र में दुनिया को चौंकाया, फिर तीन वर्ल्ड कप जीतने वाले बने पहले खिलाड़ी; कहानी 'फुटबॉल के बेताज बादशाह' Pele की
फीफा वर्ल्ड कप 2026 का 11 जून से आगाज होने जा रहा है. ऐसे में दुनिया एक बार फिर उन महान खिलाड़ियों को याद कर रही है, जिन्होंने फुटबॉल को खेल से बढ़कर एक जुनून बनाया. इनमें सबसे ऊपर नाम आता है पेले का, जिन्हें आज भी फुटबॉल का बेताज बादशाह माना जाता है.
Brazil Football Legend Pele
Brazil Football Legend Pele Story: फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच 11 जून से शुरू होने जा रहा है. दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल प्रशंसक नए सितारों को चमकते देखने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन जब भी विश्व कप की बात होती है, एक नाम ऐसा है जो हर पीढ़ी, हर देश और हर दौर को जोड़ देता है- पेले.
फुटबॉल के इतिहास में कई महान खिलाड़ी आए, कई रिकॉर्ड बने और टूटे, लेकिन पेले सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे. वे एक भावना थे, एक युग थे और एक ऐसी कहानी थे, जिसने साबित किया कि गरीबी, संघर्ष और मुश्किलें किसी इंसान की मंजिल तय नहीं करतीं.
मोजों से बनी गेंद से शुरू हुआ दुनिया जीतने का सपना
23 अक्टूबर 1940 को ब्राजील के छोटे से शहर ट्रेस कोराकोएस में जन्मे एडसन अरांतेस डो नैसिमेंटो (Edson Arantes do Nascimento) के पास बचपन में फुटबॉल खरीदने तक के पैसे नहीं थे. उनके पिता डोडिन्हो (Dondinho) खुद फुटबॉलर थे, लेकिन परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था.
पेले बचपन में चाय की दुकानों पर काम करते थे. उनके पास फुटबॉल खरीदने के पैसे नहीं होते थे, इसलिए वे पुराने मोजों में अखबार भरकर गेंद बनाते और घंटों खेलते रहते थे. उन्हें तब शायद खुद नहीं पता था कि वे एक दिन दुनिया के सबसे बड़ा फुटबॉल आइकन बनने वाला है. गरीबी ने उनके सपनों को छोटा नहीं किया, बल्कि वही संघर्ष उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया.
15 साल के लड़के ने फुटबॉल की दुनिया में मचाया भूचाल
सिर्फ 15 साल की उम्र में पेले ने सांतोस एफसी (Santosh FC) के लिए पदार्पण किया. उनकी गति, ड्रिब्लिंग, गोल करने की क्षमता और खेल को पढ़ने की अद्भुत समझ ने सभी को हैरान कर दिया. कुछ ही सालों में वह ब्राजील के सबसे बड़े सितारे बन चुके थे... लेकिन असली कहानी अभी शुरू हुई थी.
जब 17 साल के लड़के ने जीता दुनिया
स्वीडन में आयोजित 1958 फीफा वर्ल्ड कप पेले के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. ब्राजील टीम के मनोवैज्ञानिक तक ने कह दिया था कि यह लड़का मानसिक रूप से इतना परिपक्व नहीं है कि विश्व कप खेले, लेकिन कोच ने उनकी बात नहीं मानी. घुटने की चोट के कारण शुरुआती मैच मिस करने वाले पेले जब मैदान पर उतरे तो फुटबॉल का इतिहास बदल गया.
पेले ने क्वार्टर फाइनल में वेल्स के खिलाफ निर्णायक गोल किया. इसके बाद सेमीफाइनल में उन्होंने फ्रांस के खिलाफ हैट्रिक लगाई, जिससे ब्राजील ने उस मुकाबले को 5-2 से जीता.... और फिर फाइनल में मेजबान स्वीडन के खिलाफ दो जादुई गोल (जिसमें डिफेंडर के सिर के ऊपर से गेंद निकालकर किया गया शानदार वॉली गोल भी शामिल है) ने पेले को स्टार बना दिया. इसके साथ ही ब्राजील ने पहली बार फीफी वर्ल्ड कप अपने नाम किया. वहीं, सिर्फ 17 साल की उम्र में पेले विश्व कप जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए. इसके साथ ही दुनिया को नया 'फुटबॉल किंग' भी मिल गया.
तीन विश्व कप जीतने का रिकॉर्ड
1958, 1962 और 1970... ये सिर्फ तीन साल नहीं, बल्कि पेले की महानता के तीन अध्याय हैं. आज तक फुटबॉल इतिहास में कोई भी खिलाड़ी तीन बार फीफा विश्व कप नहीं जीत पाया है. पेले अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने यह कारनामा किया. जब 1970 में उन्होंने तीसरा विश्व कप उठाया, तब दुनिया ने स्वीकार कर लिया कि फुटबॉल का सबसे बड़ा नाम पेले ही है.
सांतोस को क्लब नहीं, साम्राज्य बना दिया
पेले ने अपने करियर का अधिकांश हिस्सा सांतोस एफसी के साथ बिताया. उनके मैच देखने के लिए लोग हजारों किलोमीटर का सफर तय करते थे. कई देशों में तो युद्ध विराम तक घोषित किए गए, ताकि लोग पेले को खेलते हुए देख सकें... जहां पेले जाते, वहां स्टेडियम भर जाते... और जहां पेले खेलते, वहां इतिहास लिखा जाता...
1,279 गोल... और गोल मशीन का जन्म
फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ी पेले के नाम 1,363 मैचों में 1,279 गोल दर्ज हैं. यह आंकड़ा सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उस दौर की कहानी है जब फुटबॉल में आधुनिक सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन एक खिलाड़ी अपने हुनर से पूरी दुनिया पर राज कर रहा था... ब्राजील के लिए उन्होंने 92 मैचों में 77 गोल किए और दशकों तक राष्ट्रीय टीम के सर्वश्रेष्ठ गोल स्कोरर बने रहे.
फीफा और अन्य संस्थाओं के अनुसार, पेले के नाम करियर में रिकॉर्ड 92 हैट्रिक दर्ज हैं. वह दुनिया के इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने दो अलग-अलग सालों में 100 से अधिक गोल किए (1959 में 127 गोल और 1961 में 110 गोल). यही नहीं, साल 1999 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने उन्हें 'एथलीट ऑफ द सेंचुरी' (सदी का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी) घोषित किया था. वहीं,साल 2000 में फीफा (FIFA) ने उन्हें डिएगो माराडोना के साथ संयुक्त रूप से "शताब्दी का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी" (Player of the Century) घोषित किया था।
माराडोना के साथ कैसे थे पेले के रिश्ते?
फुटबॉल में 'सबसे महान कौन?' का सवाल नया नहीं है. मेसी और रोनाल्डो से पहले यह बहस पेले और डिएगो माराडोना के बीच होती थी... दोनों अलग दौर के खिलाड़ी थे. पेले 1950-70 के दशक में खेलते थे, जबकि माराडोना 1980 के दशक में... इसलिए दोनों कभी मैदान पर नहीं भिड़े, लेकिन प्रशंसकों की बहस कभी खत्म नहीं हुई. कभी दोनों के बीच तीखी बयानबाजी हुई.. कभी आलोचना हुई... लेकिन समय के साथ सम्मान और दोस्ती ने जगह बना ली....
पेले हमेशा नियमों के दायरे में रहने वाले 'कंपनी मैन' और सौम्य व्यक्ति माने जाते थे, जबकि माराडोना अपनी विद्रोही छवि, ड्रग्स विवादों और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते थे. माराडोना ने पेले को फीफा अधिकारियों का चमचा तक कह दिया था, जबकि पेले ने माराडोना की लत और उनके बड़बोलेपन को लेकर सहानुभूति जताई थी.
समय के साथ दोनों के बीच कड़वाहट खत्म हो गई. साल 2005 में माराडोना के टॉक शो में पेले गेस्ट बनकर पहुंचे, जहां दोनों ने गले मिलकर साथ में हेडर (Header) खेला. साल 2020 में जब माराडोना का निधन हुआ, तो पेले ने कहा था, "आज मैंने एक सच्चा दोस्त खो दिया. उम्मीद है कि एक दिन हम दोनों स्वर्ग में साथ फुटबॉल खेलेंगे." यह बयान बताता है कि महान खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं, दुश्मन नहीं.
कोच नहीं, लेकिन हमेशा प्रेरणा बने रहे
संन्यास के बाद भी पेले खेल से जुड़े रहे. वे फुटबॉल के वैश्विक राजदूत बने, सामाजिक अभियानों का हिस्सा बने और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित करते रहे. उनका नाम सिर्फ ब्राजील का नहीं बल्कि पूरे खेल जगत का प्रतीक बन गया. पेले ने कुल तीन शादियां की थीं, जिससे उनके सात बच्चे हुए.
जब दुनिया रो पड़ी
29 दिसंबर 2022... 82 वर्ष की आयु में कोलन कैंसर से लड़ते हुए पेले ने दुनिया को अलविदा कह दिया. खबर आते ही ब्राजील से लेकर यूरोप तक शोक की लहर दौड़ गई. ब्राजील सरकार ने तीन दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की... स्टेडियमों में श्रद्धांजलि दी गई... खिलाड़ियों ने मौन रखा... करोड़ों प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें याद किया... लेकिन सच यह है कि वह कहीं गए नहीं.
पेले हर विश्व कप में हैं... हर बच्चे के सपने में हैं... हर फुटबॉल प्रेमी की यादों में हैं.. और जब भी कोई बच्चा पहली बार गेंद को पैर से छूता है, कहीं न कहीं पेले की कहानी फिर से जन्म लेती है... क्योंकि कुछ खिलाड़ी रिकॉर्ड बनाते हैं...और कुछ खिलाड़ी इतिहास. पेले इतिहास नहीं, फुटबॉल की सबसे महान विरासत हैं.




