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1998 में फ्रांस को जिताया वर्ल्ड कप, फिर कोच के रूप में रचा इतिहास; कहानी जिनेदिन जिदान के गरीबी से फुटबॉल लीजेंड बनने की

जिनेदिन जिदान ने मार्सिले की गरीब बस्ती से निकलकर फीफा विश्व कप, बैलन डी'ओर और चैंपियंस लीग जैसे बड़े खिताब जीते. वहीं, कोच के रूप में भी उन्होंने इतिहास रचते हुए रियल मैड्रिड को लगातार तीन चैंपियंस लीग ट्रॉफियां दिलाईं. उन्हें एक भी फाइनल में हार का सामना नहीं करना पड़ा.

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Zinedine Zidane 

Zinedine Zidane Success Story: जिनेदिन जिदान... फुटबॉल की दुनिया का वो नाम है, जिसे सिर्फ एक खिलाड़ी या कोच कह देना शायद उनके कद को छोटा कर देना होगा. यह कहानी एक ऐसे लड़के की है, जिसने फ्रांस की गरीब बस्तियों में प्लास्टिक की गेंद से खेलना शुरू किया और फिर दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर अपनी बादशाहत कायम की. मैदान पर उनके पैरों में जादू था, दिमाग में असाधारण समझ और दिल में जीत की भूख... लेकिन उनकी कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, विवाद और विरासत की भी है.

जब भी फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों की बात होती है, जिदान का नाम सबसे ऊपर दिखाई देता है. 1998 विश्व कप में फ्रांस को चैंपियन बनाने से लेकर 2006 विश्व कप फाइनल के उस चर्चित हेडबट तक, और फिर रियल मैड्रिड के कोच के रूप में इतिहास रचने तक, जिदान का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगता.

सड़कों पर खेलते-खेलते दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंचे 'जिजू'

23 जून 1972 को फ्रांस के मार्सिले शहर के ला कास्टेलेन इलाके में जन्मे जिदान का बचपन आर्थिक तंगी में बीता. उनके माता-पिता अल्जीरिया से फ्रांस आए थे. पिता इस्माइल जिदान रात में चौकीदारी करते थे, जबकि परिवार सीमित संसाधनों में अपना जीवन चलाता था. फुटबॉल जिदान के लिए सिर्फ खेल नहीं था, बल्कि बेहतर जिंदगी का रास्ता था. महज पांच साल की उम्र में उन्होंने मोहल्ले की सड़कों और खाली मैदानों में खेलना शुरू कर दिया. प्लास्टिक की गेंद से खेलते हुए किसी ने नहीं सोचा था कि यही बच्चा एक दिन दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल आइकॉन बनेगा. जिदान को जिजू (Zizou) भी कहा जाता है.

14 साल की उम्र में बदली किस्मत

जिदान की प्रतिभा बचपन से ही अलग नजर आती थी. सिर्फ 14 साल की उम्र में एक स्काउट ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें कान क्लब की युवा अकादमी में जगह मिली. यहीं से उनका प्रोफेशनल सफर शुरू हुआ. कान के बाद जिदान ने बोर्डो क्लब में अपनी पहचान बनाई और फिर इटली के दिग्गज क्लब जुवेंटस पहुंचे. जुवेंटस में उन्होंने खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डरों में स्थापित कर दिया. उनकी पासिंग, बॉल कंट्रोल और खेल को पढ़ने की क्षमता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती थी.

रियल मैड्रिड ने रिकॉर्ड रकम देकर खरीदा

साल 2001 में रियल मैड्रिड ने जिदान को 77.5 मिलियन यूरो में खरीदा. उस समय यह दुनिया का सबसे महंगा ट्रांसफर था... लेकिन ज़िदान ने साबित कर दिया कि क्लब ने उन पर जो भरोसा जताया था, वह सही था. 2002 चैंपियंस लीग फाइनल में बायर लेवरकुसेन के खिलाफ जिदान का बाएं पैर से लगाया गया वॉली गोल आज भी फुटबॉल इतिहास के सबसे खूबसूरत गोलों में गिना जाता है. कई विशेषज्ञ इसे अब तक का सबसे महान चैंपियंस लीग फाइनल गोल मानते हैं.

1998 विश्व कप ने बना दिया फ्रांस का राष्ट्रीय नायक

फ्रांस की धरती पर खेले गए 1998 फीफा विश्व कप ने जिदान को अमर बना दिया. फाइनल में ब्राजील जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उन्होंने दो शानदार हेडर गोल किए और फ्रांस को पहला विश्व कप दिलाया. उस रात सिर्फ फ्रांस नहीं जीता था, बल्कि एक गरीब प्रवासी परिवार का बेटा पूरे देश का हीरो बन गया था. इसके बाद यूरो 2000 में भी उन्होंने फ्रांस को चैंपियन बनाया और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने.

जिदान का करियर उपलब्धियों से भरा रहा. उन्होंने 1998 में बैलन डी'ओर जीता. वहीं, तीन बार (1998, 2000, 2003) वह फीफा वर्ल्ड प्लेयर ऑफ द ईयर बने. जिदान विश्व कप और यूरो कप दोनों जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे. यही नहीं, क्लब और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग हर बड़ा खिताब अपने नाम किया. उनका नाम फुटबॉल इतिहास के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हो गया.

2006 का वो हेडबट, जिसने दुनिया को चौंकाया

अगर जिदान की कहानी में सबसे बड़ा नाटकीय मोड़ खोजा जाए, तो वह 2006 विश्व कप फाइनल होगा. यह उनके करियर का आखिरी मैच था. फ्रांस और इटली आमने-सामने थे. मैच एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच चुका था. तभी इटली के डिफेंडर मार्को मातेरात्ज़ी ने कथित तौर पर जिदान के परिवार को लेकर अपमानजनक टिप्पणी कर दी. कुछ ही सेकंड बाद दुनिया ने ऐसा दृश्य देखा, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी.

जिदान मुड़े और उन्होंने अपने सिर से मातेरात्ज़ी की छाती पर जोरदार प्रहार कर दिया. रेफरी ने उन्हें रेड कार्ड दिखाया और उनका करियर उसी पल खत्म हो गया. फ्रांस फाइनल हार गया. विश्व कप ट्रॉफी के पास से सिर झुकाकर गुजरते हुए जिदान की तस्वीर आज भी खेल इतिहास की सबसे भावुक तस्वीरों में गिनी जाती है.

खिलाड़ी से कोच बने और फिर रच दिया इतिहास

कई महान खिलाड़ी कोचिंग में सफल नहीं हो पाते, लेकिन जिदान ने यहां भी इतिहास बदल दिया. 2016 में रियल मैड्रिड के मुख्य कोच बने और ऐसा कारनामा कर दिखाया जो आज तक कोई दूसरा कोच नहीं कर सका. उन्होंने लगातार तीन बार 2016, 2017 और 2018 में यूईएफए चैंपियंस लीग का खिताब जीता. यह उपलब्धि फुटबॉल इतिहास में आज भी अनोखी है. इसके अलावा उन्होंने दो बार ला लीगा ट्रॉफी भी जीती और खुद को महान कोचों की सूची में शामिल कर लिया.

जिदान की शादी किससे हुई?

जिदान की 1989 में उनकी मुलाकात वेरोनिक लेंतिस्को-फर्नांडीज से हुई थी. तब जिदान सिर्फ 17 साल के थे. दोनों का रिश्ता समय के साथ मजबूत होता गया और 1994 में उन्होंने शादी कर ली. जिदान अक्सर कहते हैं कि उनकी जिंदगी में अगर कोई सबसे बड़ा सहारा रहा है, तो वह उनकी पत्नी वेरोनिक हैं.

चार बेटे, चारों फुटबॉलर

जिदान के चार बेटे हैं और खास बात यह है कि चारों ने फुटबॉल को ही अपना करियर बनाया. एंजो जिदान और थियो जिदान मिडफील्डर, लुका ज़िदान गोलकीपर, जबकि एल्याज जिदान डिफेंडर हैं. चारों किसी न किसी समय रियल मैड्रिड की युवा अकादमी का हिस्सा रहे हैं.

आज क्या कर रहे हैं जिदान?

2021 में रियल मैड्रिड छोड़ने के बाद जिदान ने कोई नया कोचिंग प्रोजेक्ट नहीं संभाला है. वह परिवार के साथ समय बिता रहे हैं, चैरिटी कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं और कई बड़े ब्रांड्स के एंबेसडर हैं. हालांकि फुटबॉल जगत अब भी इंतजार कर रहा है कि जिदान दोबारा किस टीम की कमान संभालेंगे. कई बार उनका नाम फ्रांस की राष्ट्रीय टीम और यूरोप के बड़े क्लबों से जुड़ता रहा है.

एक विरासत जो हमेशा जिंदा रहेगी

जिदान की कहानी सिर्फ फुटबॉल की कहानी नहीं है. यह उस लड़के की कहानी है जिसने गरीबी को हराया, दुनिया जीती, गलतियां कीं, उनसे सीखा और फिर नई पहचान बनाई. बहुत कम खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो खिलाड़ी के रूप में भी महान हों और कोच के रूप में भी इतिहास रच दें. ज़िनेदिन जिदान उन चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जिनकी विरासत सिर्फ रिकॉर्ड्स में नहीं, बल्कि करोड़ों फुटबॉल प्रेमियों के दिलों में दर्ज है.

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