Exclusive: TMC में टूट पक्की, जिनका मुस्लिम वोट वो ही ममता के साथ, सौगत रॉय ने समझा दी बंगाल की पूरी राजनीति
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद TMC के भीतर बढ़ती नाराजगी अब सार्वजनिक होने लगी है. वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने अभिषेक बनर्जी की रणनीतियों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस में विलय की संभावना तक से इनकार नहीं किया.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची हलचल अब खुलकर सामने आने लगी है. चुनाव परिणामों के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है और बड़े स्तर पर टूट की स्थिति पैदा हो सकती है. अब वरिष्ठ टीएमसी सांसद सौगत रॉय के हालिया बयान ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है.
इसी के साथ स्टेट मिरर को दिए एक इंटरव्यू में सौगत रॉय ने पार्टी की मौजूदा स्थिति, नेतृत्व की भूमिका और भविष्य की संभावनाओं पर खुलकर अपनी राय रखी. इसी के साथ जानते हैं कि उन्होंने क्या कुछ कहा और चुनावी हार का जिम्मेदारी किसे बताया
ममता और अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर क्या बोले सौगत रॉय?
स्टेट मिरर से सौगत रॉय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आज की तारीख में पार्टी नेतृत्व को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है. उन्होंने दावा किया कि कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं. रॉय के अनुसार, चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर यह चर्चा और तेज हो गई है कि रणनीतिक फैसलों और संगठन के संचालन में हुई गलतियों का असर चुनाव परिणामों पर पड़ा.
बीजेपी के 'ऑपरेशन लोटस' पर जताई आशंका
सौगत रॉय ने पार्टी में संभावित टूट के पीछे भाजपा की रणनीति को भी जिम्मेदार बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी भाजपा राजनीतिक दलों को कमजोर करने की कोशिश कर सकती है. उन्होंने महाराष्ट्र में हुए राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह वहां दलों में टूट देखने को मिली, उसी तरह की स्थिति बंगाल में भी बन सकती है. सौगात रॉय का कहना है कि भाजपा CBI, ED, इनकम टैक्स, स्थानीय पुलिस का गलत इस्तेमाल करके और डरा धमका कर विधायकों और सांसदों की खरीद फरोख्त करती है.
बागी नेताओं को 'गद्दार' कहने पर क्या बोले?
पार्टी छोड़ने या बगावती रुख अपनाने वाले नेताओं को लेकर चल रही बहस पर भी सौगत रॉय ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं को सीधे तौर पर "गद्दार" कहना ठीक नहीं. उनका मानना है कि राजनीति में लोग अपने भविष्य और परिस्थितियों को देखते हुए फैसले लेते हैं. इसलिए किसी भी नेता को लेकर कठोर शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.
ममता के साथ लंबा सफर, लेकिन खुद को नहीं बताया करीबी
सौगत रॉय लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं. हालांकि इंटरव्यू के दौरान उन्होंने साफ कहा कि वह खुद को कभी ममता बनर्जी का करीबी नहीं मानते थे. उनका कहना था कि उनकी निष्ठा किसी व्यक्ति विशेष से अधिक पार्टी और उसके चुनाव चिन्ह के प्रति रही है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल संस्थाओं के आधार पर चलते हैं, केवल व्यक्तियों के आधार पर नहीं.
क्या कांग्रेस में विलय की संभावना है?
इंटरव्यू का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा, जिसमें सौगत रॉय ने भविष्य के राजनीतिक विकल्पों पर बात की. उन्होंने कहा कि राजनीति में किसी संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता. रॉय के मुताबिक, यदि पार्टी के भीतर टूट की स्थिति और गंभीर होती है तो भविष्य में विभिन्न राजनीतिक विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के साथ संभावित विलय को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता.
बंगाल की राजनीति में दो धड़ों की चर्चा क्यों?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि पार्टी के भीतर मतभेद और बढ़ते हैं तो भविष्य में अलग-अलग गुट बन सकते हैं. एक धड़ा अलग राजनीतिक रास्ता चुन सकता है, जबकि दूसरा गुट किसी अन्य विपक्षी दल के साथ जाने का फैसला कर सकता है. हालांकि इन संभावनाओं को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
चुनाव नतीजों के बाद क्यों बढ़ा असंतोष?
सौगत रॉय ने दावा किया कि चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा. उनके अनुसार, कई नेताओं ने नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए और हार के कारणों पर खुली चर्चा की मांग की. उन्होंने कहा कि चुनावी हार के बाद संगठन के भीतर आत्ममंथन होना स्वाभाविक है, लेकिन मौजूदा हालात में यह असंतोष ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है.
सांसदों और विधायकों की नाराजगी ने बढ़ाई चिंता
रॉय के अनुसार, पार्टी के कुछ सांसदों और विधायकों ने नेतृत्व को लेकर अपनी असहमति सार्वजनिक रूप से जाहिर की है. इससे पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों की चर्चा और तेज हो गई है. उनका मानना है कि यदि संगठनात्मक स्तर पर इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में पार्टी को और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
बंगाल की राजनीति के नए मोड़ पर TMC
एक समय पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगभग अजेय मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस आज गंभीर राजनीतिक चुनौतियों से जूझती दिखाई दे रही है. चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल, नेताओं की नाराजगी और भविष्य को लेकर चल रही चर्चाएं यह संकेत दे रही हैं कि बंगाल की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इन चुनौतियों का सामना किस तरह करता है और आने वाले महीनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है




