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क्या Angkrish Raghuvanshi को आउट होने से बचा सकते थे पंत? अंपायर के फैसले और IPL नियम पर छिड़ी बहस

LSG vs KKR मैच में अंपायर के एक फैसले पर विवाद खड़ा हो गया. जब केकेआर के बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी को रन लेने के दौरान उनके शरीर पर गेंद लगने के चलते आउट दे दिया गया था.

Angkrish Raghuvanshi out controversy
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Angkrish Raghuvansh

( Image Source:  X/ @Mamtasulaniya, @ESPNcricinfo )

IPL 2026: आईपीएल 2026 का 38वां मुकाबला इकाना स्टेडियम में लखनऊ सुपर जायंट्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेला गया. इस मैच में अंपायर के एक फैसले पर विवाद खड़ा हो गया. जब केकेआर के बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी को रन लेने के दौरान उनके शरीर पर गेंद लगने के चलते आउट दे दिया गया था.

इस फैसले के बाद केकेआर टीम और कोचिंग स्टाफ में साफतौर पर नाराजगी देखने को मिली. वहीं क्रिकेट एक्सपर्ट की भी इसको लेकर अलग-अलग राय है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या नियम के मुताबिक रघुवंशी को आउट दिया जाना सही फैसला था?

कैसे हुआ विवादित आउट?

यह घटना उस समय हुई जब अंगकृष रघुवंशी रन लेने के प्रयास में दौड़ते हुए वापस क्रीज की ओर लौट रहे थे. इनफील्ड से थ्रो आया और रघुवंशी ने क्रीज में पहुंचने के लिए डाइव लगाई. इसी दौरान गेंद उनके शरीर से टकरा गई. इसके बाद मोहम्मद शमी ने अपील की, जिसे तीसरे अंपायर के पास भेजा गया. रीप्ले देखने के बाद तीसरे अंपायर ने यह मानते हुए रघुवंशी को आउट करार दिया कि उन्होंने रनिंग लाइन में बदलाव किया, जिससे फील्डर के प्रयास में बाधा उत्पन्न हुई.

क्या कहते हैं नियम?

आईपीएल के नियम (धारा 37.1.4) के अनुसार, यदि कोई बल्लेबाज बिना उचित कारण अपनी दिशा में बदलाव करता है और इससे फील्डर के रन आउट प्रयास में बाधा आती है, तो उसे आउट दिया जा सकता है चाहे रन आउट की संभावना हो या नहीं.

रोहन गावस्कर ने क्यों उठाए सवाल?

मैच के बाद क्रिकबज से बातचीत में पूर्व भारतीय क्रिकेटर रोहन गावस्कर ने इस फैसले पर असहमति जताई. उन्होंने कहा "मुझे लगता है कि यह आउट नहीं है क्योंकि जब गेंद आई और बल्लेबाज ने डाइव लगाई, तो वह गेंद को नहीं देख रहा था. वह डाइव लगाने की सोच रहा था. अगर वह गेंद को देख रहा होता, तो वह डाइव नहीं लगाता, क्योंकि उसे पता था कि डाइव लगाने पर गेंद उसके शरीर से टकराएगी. जब उसने डाइव लगाई, तो इसका मतलब है कि यह अनजाने में हुई थी.”

क्या पंत को अपील वापस लेनी चाहिए थी?

इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि क्या कप्तान ऋषभ पंत खेल भावना दिखाते हुए अपनी अपील वापस ले सकते थे. इस पर पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने अपनी राय दी. उन्होंने कहा “जब आप जीत रहे होते हैं, तो कप्तान के तौर पर आप सोचते हैं कि हम इसे जाने दे सकते हैं, लेकिन चूंकि लखनऊ जीत नहीं रहा था, तो उन्होंने सोचा कि हम यह विकेट ले सकते हैं और इससे हमें फायदा होगा. इसलिए उन्होंने अपील की और कानून के अनुसार, यह एक सही अपील है.”

आगे सहवाग ने कहा “लेकिन हम कह सकते हैं कि खेल भावना के लिहाज से उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था. लेकिन जब आपने कानून बना ही दिया, तो फिर खेल भावना कहां रह गई?”

थर्ड अंपायर के फैसले पर सवाल

वीरेंद्र सहवाग ने यह भी माना कि फैसला तकनीकी रूप से सही हो सकता है, लेकिन यह काफी कठोर था. उन्होंने कहा "लेकिन मैं यह जरूर कहूंगा कि यह तीसरे अंपायर का फैसला था और वह इसे टीवी पर देख रहे थे. जब उन्होंने डाइव लगाई, तो ऐसा नहीं था कि वह गेंद को देख रहे थे. इसलिए यह वाकई एक कठोर फैसला था.”

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