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अब बिना SIM के नहीं चला सकेंगे WhatsApp, Telegram और SnapChat, क्या है DoT का SIM-बाइंडिंग नियम?

यह नया नियम डिजिटल सुरक्षा के खेल के नियम बदलने वाला है. दूरसंचार विभाग (DoT) अब मैसेजिंग ऐप्स को SIM-बाइंडिंग सिस्टम से जोड़ने की तैयारी में है, यानी भविष्य में WhatsApp, Telegram और Snapchat जैसे लोकप्रिय ऐप्स बिना एक्टिव SIM के नहीं चल सकेंगे. यह कदम ऑनलाइन धोखाधड़ी, फेक अकाउंट और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए उठाया जा रहा है.

अब बिना SIM के नहीं चला सकेंगे WhatsApp, Telegram और SnapChat, क्या है DoT का SIM-बाइंडिंग नियम?
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( Image Source:  Sora - AI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 30 Nov 2025 9:50 AM IST

क्या आपने कभी सोचा है कि आपका व्हाट्सएप कैसे चल रहा है, भले ही आपके फोन में वह सिम न हो जिससे आपने अकाउंट बनाया था? या विदेश में नई सिम डालने पर भी आपके चैट्स उसी तरह काम करते रहते हैं? यही सुविधा अब खतरे में दिख रही है.

दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक ऐसा बड़ा कदम उठाया है, जिससे भारत में करोड़ों मैसेजिंग ऐप यूजर्स का एक्सपीरियंस बदलने वाला है. और ये सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि साइबर अपराधों पर लगाम कसने की बड़ी कोशिश है. चलिए जानते हैं क्या है ये नया नियम.

क्यों लगा SIM-बाइंडिंग का नया नियम?

सरकार के अनुसार कई मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, मोबाइल नंबर से अकाउंट बनवाने के बावजूद ऐप को बिना SIM के भी चलने देते हैं. यानी अगर सिम फोन से निकली हो, बंद हो गई हो, या देश के बाहर इस्तेमाल हो रही हो, तब भी ऐप पहले की तरह काम करता रहता है. यही गलती साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन गई. सरकार ने पाया कि कुछ लोग भारत के बाहर बैठकर भारतीय मोबाइल नंबरों पर बने व्हाट्सएप और टेलीग्रामअकाउंट का इस्तेमाल कर रहे हैं और बड़ी आसानी से साइबर ठगी कर रहे हैं. इसलिए सरकार ने कहा कि अब ऐप तभी चलेगा, जब वही SIM फोन में मौजूद हो जिससे अकाउंट बनाया गया था.

90 दिन की डेडलाइन, कंपनियों को बड़ी चुनौती

DoT ने इन सभी ऐप कंपनियों व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट आदि को 90 दिन के अंदर सिम-बाइंडिंग लागू करने का आदेश दिया है. इसका मतलब है कि

  • जिस सिम से अकाउंट बना है, वह फोन में लगी होगी तभी ऐप चलेगा.
  • अगर सिम हट गई, फोन बंद है या देश से बाहर इस्तेमाल हो रही है, ऐप बंद हो जाएगा
  • व्हाट्सएप बेव जैसे वेब वर्जन हर 6 घंटे में खुद-ब-खुद लॉगआउट हो जाएंगे

कंपनियों को 4 महीने के भीतर सरकार को पूरा रिपोर्ट देना होगा कि नियम लागू हो चुका है.

विदेश यात्रा और ऑफिस वर्क पर सबसे बड़ा असर

इंडस्ट्री के जानकारों की मानें तो यह बदलाव यूज़र्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

  • विदेश यात्रा: अभी विदेश में नई सिम डालने पर भी व्हाट्सएप, उसी तरह चलता है. लेकिन अब पुरानी भारतीय SIM फोन में नहीं होगी, तो व्हाट्सएप, बंद हो सकता है.
  • व्हाट्सएप वेब: ऑफिस में लैपटॉप पर घंटों इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स के लिए 6 घंटे में लॉगआउट होना परेशानी पैदा करेगा. कई एक्सपर्ट का कहना है कि अपराधी तो वैसे भी नकली या फर्जी सिम का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए नियम की प्रभावशीलता पर सवाल भी उठेंगे.

टेलीकॉम कंपनियां खुश क्यों हैं?

टेलीकॉम इंडस्ट्री लंबे समय से इस नियम की मांग कर रही थी. उनका मानना है कि सिम और ऐप में दोबारा मजबूत कनेक्शन बनाना साइबर सुरक्षा के लिए ज़रूरी है. पहले एक बार अकाउंट बन जाने पर ऐप सिम हटने के बाद भी चलता था और यही सबसे बड़ा जोखिम था. सरकार का ये कदम सुरक्षा की दिशा में मजबूत माना जा रहा है, लेकिन यह भी सच है कि इससे आम लोगों के डिजिटल इस्तेमाल का तरीका काफी बदलने वाला है. आने वाले हफ्तों में ये फैसला हमारे रोज़मर्रा के ऑनलाइन मैसेजिंग के अनुभव को पूरी तरह नया स्वरूप दे सकता है.

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