PM मोदी ने लोकसभा में क्यों नहीं दिया भाषण? स्पीकर ओम बिरला ने बताई चौंकाने वाली वजह, विपक्ष को पढ़ाया 'लोकतंत्र का पाठ'
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने खुलासा किया कि विपक्ष के संभावित प्रदर्शन और अप्रिय घटना की आशंका के कारण उन्होंने खुद प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया था.
हंगामे और अप्रिय घटना की आशंका के चलते टला पीएम मोदी का लोकसभा संबोधन
लोकसभा में 4 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुप्रतीक्षित संबोधन आखिरकार नहीं हो सका. पीएम मोदी को शाम 5 बजे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन सदन में लगातार हंगामे और तनावपूर्ण हालात के बीच यह कार्यक्रम टाल दिया गया. नतीजा यह रहा कि प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.
धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को संबोधित करते हुए इस फैसले के पीछे की पूरी वजह सामने रखी. स्पीकर ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह उन्होंने खुद किया था.
ओम बिरला ने पीएम मोदी पर क्या कहा?
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के व्यवहार पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि एक दिन पहले लोकसभा के चैंबर और अध्यक्ष के कार्यालय में जो घटनाएं हुईं, वैसा दृश्य संसद के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया. स्पीकर ने कहा कि संविधान ने सभापति को एक गरिमामय और निष्पक्ष स्थान दिया है और परंपरा रही है कि राजनीतिक मतभेदों को कभी अध्यक्ष के कार्यालय तक नहीं ले जाया गया. ओम बिरला ने कहा कि प्रतिपक्ष के कुछ सदस्यों ने अध्यक्ष के कार्यालय में जिस तरह का व्यवहार किया, वह संसदीय परंपराओं के खिलाफ था और इसे 'संसद की गरिमा पर काले धब्बे' की तरह बताया. उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है कि सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करें.
क्या पीएम मोदी के खिलाफ रची जा रही थी साजिश?
स्पीकर ने आगे खुलासा किया कि जब प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, तब उनके पास पुख्ता सूचना थी कि कांग्रेस के कुछ सांसद प्रधानमंत्री के आसन तक पहुंचकर कोई अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे दृश्य उन्होंने खुद सदन में देखे भी.
पीएम मोदी को क्यों सदन में आने से किया था मना?
ओम बिरला ने साफ कहा कि अगर ऐसी घटना होती, तो यह देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को गहरी चोट पहुंचाती. इसी आशंका को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे उस दिन सदन में न आएं. स्पीकर के अनुसार, सदन की गरिमा और परंपराओं की रक्षा करना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी थी. उन्होंने यह भी माना कि सदन के नेता का न बोल पाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री ने उनके आग्रह को स्वीकार कर एक अप्रिय और शर्मनाक स्थिति से संसद को बचा लिया. इसके लिए स्पीकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी जताया.
विपक्ष पर क्या बोले ओम बिरला?
विपक्ष को सख्त संदेश देते हुए ओम बिरला ने कहा कि पोस्टर, पम्फलेट और नारेबाजी के साथ सदन नहीं चल सकता- न आज और न ही भविष्य में. उन्होंने विशेष तौर पर महिला सांसदों द्वारा प्रधानमंत्री के आसन तक पहुंचने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह न तो संसदीय मर्यादा के अनुरूप था और न ही सदन की गरिमा के अनुकूल. स्पीकर ने दो टूक कहा कि विरोध अपनी सीट से, भाषण और शब्दों के जरिए किया जा सकता है, लेकिन वेल में आकर या आसन के पास जाकर हंगामा करना पूरी तरह अस्वीकार्य है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के आचरण से संसद की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है. अंत में, हालात को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 6 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि संसद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है.





