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सरकार के इशारे पर आपने बोलने से रोका, राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को क्यों लिखा पत्र?

लोकसभा में बोलने से रोके जाने पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है. राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर उन्हें सदन में बोलने से रोका गया, जो संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है.

Rahul gandhi
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( Image Source:  sora ai )
नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार

Published on: 3 Feb 2026 9:39 PM

लोकसभा में हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने एक कड़ा कदम उठाया है. मंगलवार, 3 फरवरी को उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि उन्हें सरकार के इशारे पर सदन में बोलने से रोका गया, जो लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है.

राहुल गांधी का कहना है कि यह सिर्फ एक भाषण का मामला नहीं, बल्कि विपक्ष के संवैधानिक अधिकारों का सवाल है. उन्होंने पत्र में संसदीय परंपराओं, अध्यक्ष की भूमिका और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा रोकने को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है.

राहुल गांधी ने पत्र लिखने की जरूरत क्यों बताई?

राहुल गांधी के मुताबिक, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान उन्हें बोलने से रोका गया. उनका आरोप है कि यह फैसला नियमों या परंपरा के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार के दबाव में लिया गया, इसलिए उन्होंने इसे लिखित रूप में दर्ज कराना जरूरी समझा.

राहुल ने पत्र में किस दस्तावेज़ का जिक्र किया?

राहुल गांधी ने लिखा कि सोमवार को जब उन्होंने एक पत्रिका के लेख का उल्लेख करना चाहा, तो स्पीकर ने उसे सत्यापित करने को कहा. मंगलवार को भाषण शुरू करते समय उन्होंने वह सत्यापन पूरा कर दिया था और दस्तावेज़ की जिम्मेदारी भी ली, इसके बावजूद उन्हें बोलने नहीं दिया गया.

संसदीय परंपरा को लेकर राहुल का तर्क क्या है?

जवाब: राहुल का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा और पूर्व लोकसभा अध्यक्षों के फैसलों के अनुसार, अगर कोई सांसद किसी दस्तावेज़ का सत्यापन कर देता है, तो अध्यक्ष उसे उद्धृत करने से नहीं रोकते. इसके बाद उस पर जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी होती है, न कि अध्यक्ष की.

बोलने से रोके जाने को राहुल ने कितना गंभीर बताया?

राहुल गांधी ने इसे सिर्फ परंपरा का उल्लंघन नहीं, बल्कि खतरनाक संकेत बताया. उनका कहना है कि नेता प्रतिपक्ष को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से रोकना यह शक पैदा करता है कि जानबूझकर बहस दबाई जा रही है.

राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उन्होंने क्यों उठाया?

राहुल ने लिखा कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का अहम हिस्सा थी और उस पर संसद में चर्चा होना अनिवार्य है. ऐसे विषय पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोकना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है.

स्पीकर की भूमिका पर राहुल की क्या टिप्पणी है?

जवाब: राहुल गांधी ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का संवैधानिक कर्तव्य है कि वे निष्पक्ष रहकर हर सदस्य, खासकर विपक्ष के अधिकारों की रक्षा करें. उनके मुताबिक, इस मामले में अध्यक्ष से वही अपेक्षा थी, जो संविधान और संसदीय मर्यादा तय करती है.

राहुल ने इसे ‘लोकतंत्र पर काला धब्बा’ क्यों कहा?

राहुल गांधी का आरोप है कि संसदीय इतिहास में पहली बार सरकार के इशारे पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया. इसी वजह से उन्होंने इसे लोकतंत्र पर काला धब्बा बताते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया.

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