EXCLUSIVE: इंदिरा गांधी का विश्वासपात्र बदनाम बेबस-तांत्रिक कोर्ट में बोला- जज साहब मैं आदमी बुरा नहीं हूं, मेरा वक्त खराब चल रहा है
भारत की राजनीति और सत्ता के गलियारों में गहरी पैठ रखने वाले कथित तांत्रिक चंद्रास्वामी उर्फ नेमीचंद जैन को लेकर एक बार फिर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ क्रिमिनल लॉयर डॉ. ए पी सिंह ने एक एक्सक्लूसिव पॉडकास्ट में बताया कि कैसे चंद्रास्वामी ने दिल्ली की अदालत में खुद को 'बुरा नहीं, बल्कि वक्त का मारा' बताया था. इंदिरा गांधी से लेकर अंतरराष्ट्रीय हथियार डीलर अदनान खशोगी तक, चंद्रास्वामी की पहुंच सत्ता और अपराध की दुनिया तक रही. धोखाधड़ी, फेमा उल्लंघन और कथित साजिशों के आरोपों ने उनकी छवि को आध्यात्मिक गुरु से ज्यादा एक पावर ब्रोकर के रूप में स्थापित किया. देखिए यह रिपोर्ट...
Indira Gandhi Chandraswami Story: ‘सब समय समय की बात है. वक्त इनसान को कमजोर और बहादुर बनाता है. समय कब किसको अर्श से फर्श पर और फर्श से आसमान पर पहुंचा दे, इसका पता-ठिकाना तो दुनिया के किसी भी तांत्रिक-ज्योतिषी को नहीं मालूम होता है. इन्हीं सब बातों-कहावतों का एक अदद मजबूत कहिए या फिर जीता-जागता नमूना कालांतर में रहा था, भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का करीबी-विश्वासपात्र और अंदर के आदमी के नाम से बदनाम तांत्रिक चंद्रास्वामी उर्फ नेमीचंद जैन.
चंद्रास्वामी जब तक जीवित रहा तक तक वह खुद भी नौ दो ग्यारह के फेर में फंसा रहा और इंदिरा गांधी को उसके चलते कितना नफा-नुकसान या बदनामी का दंश झेलना पड़ा, वह किसी से छिपा नहीं है. ऐसे ही नेमीचंद जैन उर्फ चंद्रस्वामी का एक किस्सा हाल ही में तब निकल कर सामने आया, जब स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर क्राइम इनवेस्टीगेशन एक पॉडकास्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के वरिष्ठ क्रिमिनल लॉयर डॉ. ए पी सिंह से एक्सक्सूलिव बात कर रहे थे. डॉ. एपी सिंह ने ही यह राजफाश किया कि चंद्रास्वामी को उन्होंने उस बेबसी-लाचारी के आलम में अपनी आंखों से दिल्ली की अदालत के कटघरे में खड़े देखा जब, वे जज के सामने नतमस्तक हुए कह रहे थे-मैं बुरा नहीं मेरा वक्त खराब है.
“जज साहब मैं आदमी तो बुरा नहीं हूं, बस मेरा वक्त जरूर बुरा-खराब है”
जनवरी 2026 के शुरूआती दिनों में नई दिल्ली में एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान डॉ. ए पी सिंह ने दावा किया कि वे चंद्रास्वामी के बेहद करीबियों में से एक हैं. उन चंद करीबियों में से जिनकी चंद्रास्वामी के हर अड्डे (चंद्रास्वामी के अंधभक्त इन अड्डों को उनके आश्रम कहते रहे हैं) पर कालांतर में बेरोक-टोक इंट्री थी. दुनिया भर में अपनी तमाम ऊल-जलूल हरकतों के लिए जमाने में बदनाम रहकर बेहद दुश्वारियों में अपना अंत होता देखने वाले चंद्रास्वामी के करीबी रहे और आज भारत में वरिष्ठ क्रिमिनल लॉयर डॉ. एपी सिंह हालांकि चंद्रास्वामी को तांत्रिक न मानकर उन्हें आध्यात्मिक गुरु बताते हैं.
हर बड़ी हस्ती के महल में इंट्री
हालांकि यह सच्चाई भी किसी से जमाने में नहीं छिपी है कि चंद्रास्वामी उर्फ नेमीचंद जैन आध्यात्मिक गुरु कम, कथित तांत्रिक और पॉलिटिकल पावर ब्रोकर (सत्ता के दलाल) के रूप में ज्यादा बदनाम होकर इंसानों की इस मायावी दुनिया से गए हैं. ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर हों, भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, चंद्रशेखर, नरसिम्हा राव या फिर दुनिया भर में तस्करी के लिए बदनाम सऊदी का अरबपति अंतरराष्ट्रीय हथियार डीलर अदनान खशोगी, जिसकी जून 2017 में 82 साल की उम्र में मौत हो चुकी है. इन सबके जनानखानों तक में इन चंद्रास्वामी की बेरोक-टोक इंट्री दुनिया को हैरत में डाले रहती थी.
रहस्यमयी बातें क्यों उजागर करते?
सोचिए साल 1935 में (कुछ जगहों पर उनके जन्म का सन् 1948 भी उल्लिखित मिलता है) यानी गुलाम भारत में जन्मे जिन नेमीचंद्र जैन उर्फ तांत्रिक चंद्रास्वामी की बेरोक-टोक इस कदर की इंट्री इतनी बड़ी हस्तियों के महलों तक में रही हो, वे भला महज एक अध्यात्मिक गुरु बनकर भला जी भी कैसे पाते? और फिर किसी आध्यात्मिक गुरु का भला सोचिए दुनिया भर के बदनाम हथियार दलाल अदनान खशोगी जैसी शख्शियत से क्यों कोई वास्ता रहा होगा? बेशक डॉ. ए पी सिंह की भी बेरोकटोक इंट्री क्यों न ऐसे चर्चित या कहूं कि बदनाम शख्शियत या तांत्रिक चंद्रास्वामी के बेडरूम तक रही हो, बेशक डॉ. ए पी सिंह उनके करीब रहे हों, मगर भला ए पी सिंह को चंद्रास्वामी यह क्यों बताएंगे कि तंत्र-विद्या की आड़ में उनके और कौन से कौन से काले-कारोबार दुनिया भर में फल-फूल रहे थे.
चंद्रास्वामी दूध के धुले कैसे थे?
वे चंद्रास्वामी भला दूध के धुले कैसे हो सकते हैं जिनके ऊपर कालांतर में धोखाधड़ी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी के कत्ल का षडयंत्र रचने का कथित आरोप तक लगा. कुछ मामलों में चंद्रास्वामी जेल में भी बंद रहे. ठंडे दिमाग से सोचिए भला किसी अध्यात्मिक गुरु या ज्योतिषी का जेल, मक्कारी, चार सौ बीसी यानी धोखाधड़ी या किसी के कत्ल का षडयंत्र रचने से क्या और क्यों कोई वास्ता होना चाहिए? इन तमाम आंखों के सामने मौजूद सच्ची कहानियों से मतलब है कि चंद्रास्वामी दूध के धुले तो नहीं थे. धुंआ वहीं उठता है जहां कभी आग लगी हो.
चंद्रास्वामी के खास रहे डॉ. ए पी सिंह
हां, इस सब बाचतीत के बीच यह भी साफ है कि जिस तरह की अंदर की तमाम बातें डॉ. एपी सिंह ने स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर क्राइम इनवेस्टीगेशन संजीव चौहान के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में जनवरी 2026 के शुरूआत में बेबाकी से बयान कीं, वे भी कम हैरान करने वाली नहीं थीं. बकौल डॉ. ए पी सिंह, “मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले चंद्रास्वामी जी के पास मेरा बेरोकटोक आना-जाना जवानी के दिनों से ही शुरू हो गया था. वे बहुत सी ऐसी अंदर की बातें भी मुझसे साझा करने लगे थे, जिन्हें आज की पीढ़ी सुनकर एक बार तो शायद विश्वास नहीं करेगी. जब मैं नया नया वकील बना तो मेरा वकील का बैंड भी चंद्रास्वामी जी ने ही लगाया था.”
ऐसा आदमी साधु-सन्यासी कैसे हो सकता है?
ईडी द्वारा फेमा कानून के उल्लंघन में 9 करोड़ रुपये की भारी भरकम पेनल्टी और लंदन के एक व्यवसायी के साथ धोखाधड़ी में गिरफ्तार होकर साल 1996 में जेल जाने वाले चंद्रास्वामी के बारे में डॉ. ए पी सिंह ने और भी तमाम हैरान करने वाली अंदर की बातें बताईं. जिनके मुताबिक एक बार जब चंद्रास्वामी को गिरफ्तार करके दिल्ली की तीस-हजारी कोर्ट में जज के कटघरे में पेश किया गया, तो उनकी जमानत अर्जी खारिज करने वाले जज प्रेम कुमार ने उनसे कहा, “नेमीचंद जैन जी मैं आपकी जमानत की अर्जी खारिज करता हूं क्योंकि जांच एजेंसी की फाइलों में आपके खिलाफ सबूत बहुत मजबूत हैं. और मैं इसमें आपकी कोई मदद नहीं कर सकता हूं. इस पर कोर्ट के कटघरे में खड़े चंद्रास्वामी ने मेरे सामने उन जज से कहा, “जज साहब इसमें आपका कोई दोष नहीं है. हालांकि आदमी तो मैं भी बुरा नहीं हूं. मगर जज साहब मेरा वक्त खराब है. इसमें आप या मैं कुछ नहीं कर सकते हैं.”





