बांग्लादेश में 24 घंटे में दो हिंदुओं की हत्या! गाजीपुर में हिंदू व्यापारी की पीट-पीटकर हत्या, राजबाड़ी में युवक को गाड़ी से कुचला
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरी हो गई है. 24 घंटे के भीतर दो हिंदुओं की अलग-अलग घटनाओं में हत्या कर दी गई. गाजीपुर जिले में 60 वर्षीय हिंदू व्यापारी लिटन चंद्र घोष को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, जबकि राजबाड़ी जिले में पेट्रोल पंप कर्मचारी रिपन साहा को एसयूवी से कुचलकर हत्या कर दी गई.
Bangaldesh Violence, Ghazipur Hindu trader killed, Rajbari petrol pump murder: बांग्लादेश में 24 घंटे के अंदर 2 और हिंदुओं की हत्या कर दी गई. अब गाजीपुर जिले में एक व्यापारी को पीट-पीटकर मार डाला गया. इससे पहले, राजबाड़ी जिले में एक युवक की गाड़ी से कुचलकर हत्या कर दी गई. इन घटनाओं से बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
17 जनवरी की सुबह 11 बजे गाजीपुर के कालिगंज थाना क्षेत्र में 60 वर्षीय हिंदू व्यापारी लिटन चंद्र घोष उर्फ काली को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. घोष बोयीशाखी स्वीट एंड होटल के मालिक हैं. बताया जाता है कि उनके होटल के एक कर्मचारी की किसी शख्स से किसी बात पर कहासुनी हो गई, जो मारपीट में बदल गई.
हमलावरों ने लिटन चंद्र घोष पर लात-घूंसों से किया हमला
कर्मचारी को बचाने के लिए जब लिटन चंद्र घोष पहुंचे तो हमलावरों ने उन पर लात-घूसों से हमला कर दिया. इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए. लोग उन्हें अस्पताल ले जाते, इससे पहले ही उनकी मौत हो गई. पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लिया है.
राजबाड़ी जिले में गाड़ी से कुचलकर युवक को उतारा मौत के घाट
इससे पहले, राजबाड़ी जिले में पेट्रोल पंप पर काम करने वाले 30 वर्षीय बांग्लादेशी हिंदू युवक की कथित तौर पर कुचलकर हत्या कर दी गई. पुलिस के अनुसार, युवक को एक ग्राहक ने उस वक्त गाड़ी से रौंद दिया, जब वह बिना पेट्रोल का भुगतान किए फरार होने की कोशिश कर रहा था. मृतक की पहचान रिपन साहा के रूप में हुई है, जो राजबाड़ी जिले के गोलंदा मोड़ स्थित करीम फिलिंग स्टेशन में काम करता था. यह घटना शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे की बताई जा रही है.
युवक को एसयूवी से कुचलकर फरार हुआ ड्राइवर
पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक काली एसयूवी पेट्रोल पंप पर आई और करीब 5,000 टका (लगभग 3,700 रुपये भारतीय मुद्रा) का ईंधन भरवाया गया. इसके बाद ड्राइवर ने बिना पैसे दिए गाड़ी आगे बढ़ाने की कोशिश की. जब रिपन साहा ने इसका विरोध किया और वाहन को रोकने के लिए उसके सामने खड़ा हो गया, तो एसयूवी ने उसे कुचल दिया और मौके से फरार हो गई. घटनास्थल पर ही रिपन साहा की मौत हो गई.
पुलिस ने जब्त किया वाहन
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया और एसयूवी के मालिक अबुल हाशेम (55) और उसके ड्राइवर कमाल हुसैन (43) को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के अनुसार, अबुल हाशेम पेशे से ठेकेदार है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का सदस्य है. वह पार्टी की युवा इकाई जुबो दल का पूर्व जिला अध्यक्ष भी रह चुका है.
आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करेगी पुलिस
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जियाउर रहमान ने समाचार पोर्टल bdnews24.com से बातचीत में कहा, “हम इस मामले में हत्या का केस दर्ज करेंगे. जब आरोपी पेट्रोल का भुगतान करने से इनकार कर रहे थे, तो कर्मचारी गाड़ी के सामने खड़ा हो गया. इसके बाद उन्होंने उसे कुचल दिया और फरार हो गए.”
हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी
हालांकि यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन पुलिस ने फिलहाल रिपन साहा की हत्या को सांप्रदायिक घटना मानने से इनकार किया है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में कोई सांप्रदायिक एंगल है या नहीं.
बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी को लेकर चिंता
बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है. 2022 की जनगणना के अनुसार, देश में हिंदुओं की संख्या करीब 1.31 करोड़ है, जो कुल आबादी का लगभग 8 प्रतिशत है. इसी महीने की शुरुआत में बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई यूनिटी काउंसिल (BHBCUC) ने दावा किया था कि जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा तेज हो रही है. संगठन के मुताबिक, दिसंबर 2025 में ही सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनका मकसद अल्पसंख्यक मतदाताओं को अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वोट देने से रोकना है. बांग्लादेश में संसदीय चुनाव 12 फरवरी को होने हैं.
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते भी तनावपूर्ण
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते भी बीते कुछ समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं. अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद से हालात और बिगड़े हैं. शेख हसीना तब से नई दिल्ली में रह रही हैं. हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमलों ने दोनों देशों के संबंधों पर और दबाव डाला है. हालांकि, ढाका का दावा है कि सभी घटनाएं सांप्रदायिक नहीं थीं.





