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UP की राजनीति में फिर उठा सवाल- ब्राह्मण किसके साथ? मायावती ने चला बड़ा दांव, बीजेपी-कांग्रेस और सपा की बढ़ी टेंशन

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BSP Brahmin Politics: UP के ब्राह्मण किसके साथ? | Mayawati | Politics | Akhilesh | UP Election 2027

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वही निर्णायक सवाल सतह पर आ गया है—ब्राह्मण किसके साथ? बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने खुले तौर पर ऐलान किया है कि BSP में ब्राह्मणों को पूरा सम्मान, भागीदारी और सत्ता में आने पर संरक्षण मिलेगा. यह बयान सिर्फ एक आश्वासन नहीं, बल्कि यूपी की सियासत में जातीय संतुलन को दोबारा साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है... लेकिन असली सवाल मायावती के शब्दों का नहीं है, बल्कि ब्राह्मण मतदाता के भरोसे का है. क्या वह एक बार फिर BSP की ओर लौटेगा? या फिर यह बयान सिर्फ चुनावी माहौल में दिया गया एक रणनीतिक संदेश बनकर रह जाएगा? राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मायावती एक बार फिर दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग को ज़िंदा करने की कोशिश कर रही हैं. यह वही फॉर्मूला है, जिसने 2007 में उन्हें पूर्ण बहुमत दिलाया था. उस दौर में BSP ने यह संदेश देने में सफलता पाई थी कि सत्ता में ब्राह्मण सुरक्षित हैं और निर्णायक भूमिका में हैं. आज की यूपी राजनीति 2007 जैसी नहीं रही. ब्राह्मण वोट बैंक फिलहाल बीजेपी, कुछ हद तक समाजवादी पार्टी, और सीमित क्षेत्रों में कांग्रेस में बंटा हुआ है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या BSP के पास आज वही सांगठनिक ताकत, वही ज़मीनी नेटवर्क और वही भरोसे का माहौल है? देखिए यह खास रिपोर्ट...


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