Middle East में मंडराया नया खतरा! Iran vs Israel US War के बीच क्यों सुर्खियों में है Abu Musa Island? दुनिया की बढ़ी टेंशन

Abu Musa Island, Iran और UAE के बीच लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है, लेकिन मार्च 2026 में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण यह वैश्विक सुर्खियों में आ गया है. यह द्वीप Strait of Hormuz के पास स्थित है, जहां से कई देशों का तेल टैंकर गुजरता है.

अबू मूसा द्वीप

(Image Source:  Sora_ AI )
By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 14 March 2026 11:24 PM IST

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच Abu Musa Island एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है. यह छोटा सा द्वीप Iran और United Arab Emirates के बीच लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है, लेकिन मार्च 2026 में क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के कारण यह द्वीप अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और सैन्य रणनीति का अहम केंद्र बन गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 14 मार्च 2026 को ईरान ने दावा किया कि अमेरिकी मिसाइलों ने Abu Musa Island और Kharg Island पर हमला किया है. इसके बाद ईरान ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यूएई के शहरों, बंदरगाहों या सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया गया, तो वह यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाएगा.

अबू मूसा द्वीप कहां स्थित है

  • अबू मूसा फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद रणनीतिक द्वीप है.
  • यह Persian Gulf के पूर्वी हिस्से में Strait of Hormuz के प्रवेश द्वार के पास स्थित है.
  • ईरान के तट से इसकी दूरी करीब 75 किमी है.
  • यूएई के Sharjah से यह लगभग 60 किमी दूर है.
  • इसका कुल क्षेत्रफल करीब 12.8 वर्ग किलोमीटर है.

अबू मूसा द्वीप इतना अहम क्यों है?

अबू मूसा द्वीप का महत्व मुख्य रूप से इसकी रणनीतिक स्थिति के कारण है. 

1. वैश्विक शिपिंग रूट पर नियंत्रण

फारस की खाड़ी से गुजरने वाले बड़े तेल टैंकर और मालवाहक जहाज इसी इलाके से होकर गुजरते हैं. इस द्वीप पर नियंत्रण का मतलब है दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों पर नजर रखना.

2. वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा

हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल Strait of Hormuz से गुजरता है. अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है तो पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

3. सैन्य महत्व

ईरान ने इस द्वीप पर अपनी नौसेना और वायुसेना की मजबूत मौजूदगी बना रखी है. इससे उसे पूरे खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त मिलती है.

दशकों पुराना है विवाद

इस द्वीप को लेकर विवाद नया नहीं है. 1971 में ब्रिटेन के खाड़ी क्षेत्र से हटने से ठीक पहले ईरान और शारजाह के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें संयुक्त प्रशासन की बात कही गई थी... लेकिन उसी साल नवंबर में ईरान ने द्वीप पर कब्जा कर लिया. 1992 के बाद से इस पर ईरान का पूरा नियंत्रण है, जबकि यूएई इसे अवैध कब्जा मानता है.

अबू मूसा के अलावा और कौन-कौन से द्वीप बने फ्लैशपॉइंट?

अबू मूसा के अलावा खाड़ी क्षेत्र में कई अन्य द्वीप भी इस समय तनाव का केंद्र बने हुए हैं. इसमें Greater Tunb और Lesser Tunb द्वीप शामिल हैं, जिन पर ईरान ने 1971 में कब्जा किया था. इसके अलावा, Qeshm Island भी फ्लैश पॉइंट बना हुआ है. यह फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप है. यहां ईरान ने मिसाइल ठिकाने बनाए हैं. Hormuz Island और Larak Island, जो जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित हैं और जहां ईरान की नौसैनिक गतिविधियां तेज रहती हैं.

मार्च 2026 में क्यों बढ़ा तनाव?

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव की स्थिति बन गई है. ईरान का आरोप है कि अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों से उसके द्वीपों पर हमला किया गया. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर खाड़ी के देशों के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया गया, तो वह इन देशों के तेल ठिकानों और बंदरगाहों को निशाना बना सकता है.

भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?

  • यह स्थिति भारत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत का 60% से ज्यादा कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है. 
  • खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं.
  • अगर Strait of Hormuz बंद होता है तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और भारत में महंगाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.
  • विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यह संकट गहराता है तो वैश्विक तेल कीमतें 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.

Similar News