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बहरीन से आई मिसाइल ने ली 175 बच्चियों की जान, Iran के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि का बड़ा बयान; होर्मुज और भारत पर क्या बोले?

ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था, लेकिन अमेरिका ने संघर्ष थोप दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय जहाजों को Strait of Hormuz से सुरक्षित रास्ता मिल सकता है और ईरान भारत के साथ रिश्ते मजबूत रखना चाहता है.

Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi  photo
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Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi 

( Image Source:  ANI )

ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi ने भारत और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान शुरू से ही Strait of Hormuz में तनाव नहीं चाहता था, लेकिन अमेरिका की कार्रवाई के कारण यह संघर्ष पैदा हुआ. उनका कहना है कि ईरान चाहता है कि भारत समेत दूसरे देशों के जहाजों को इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ता मिलता रहे, क्योंकि ईरान उन देशों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता जो उसके खिलाफ युद्ध में शामिल नहीं हैं.

ANI को दिए इंटरव्यू में इलाही ने कहा कि ईरान की व्यवस्था ऐसी है कि किसी एक नेता या कमांडर की मौत से सिस्टम नहीं रुकता. उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने कई ईरानी अधिकारियों और सैन्य कमांडरों को मार दिया है, लेकिन इससे ईरान की व्यवस्था पर कोई खास असर नहीं पड़ा. उनके मुताबिक हर पद पर कई लोग तैयार रहते हैं जो जरूरत पड़ने पर जिम्मेदारी संभाल सकते हैं.


Dr Abdul Majid Hakeem Ilahi ने क्या-क्या कहा?

  • ईरान के नेताओं को मारने से कुछ नहीं बदलेगा: इलाही ने कहा कि अगर कोई नेता शहीद हो जाता है तो तुरंत दूसरा व्यक्ति उसकी जगह ले लेता है. उन्होंने दावा किया कि ईरान की पूरी आबादी देश की रक्षा के लिए तैयार है और किसी एक व्यक्ति के हटने से शासन या सेना कमजोर नहीं होगी. उनका कहना है कि ईरान की व्यवस्था मजबूत है और नेतृत्व की कमी कभी नहीं होगी.
  • ऊर्जा ठिकानों पर हमला ‘खतरनाक': हकीम इलाही ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी ईरान के तेल या गैस के ठिकानों पर हमला करते हैं तो यह बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है. उनके मुताबिक ऊर्जा ढांचे पर हमला होने की स्थिति में ईरान जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होगा.
  • युद्ध हमने नहीं शुरू किया: इलाही ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था और जब बातचीत चल रही थी तभी हमला किया गया. उनका आरोप है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ही इस युद्ध की शुरुआत की है. इसलिए ईरान अब अपनी सुरक्षा के लिए लड़ रहा है और जरूरत पड़ने पर लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सकता है.
  • खाड़ी में जवाबी हमलों पर भी दिया जवाब: खाड़ी क्षेत्र में हुए जवाबी हमलों और आम नागरिकों की मौत पर सवाल पूछे जाने पर इलाही ने कहा कि युद्ध अपने आप में अन्यायपूर्ण होता है. उन्होंने कहा कि अगर दुनिया के नेता सच में शांति चाहते हैं तो उन्हें पहले युद्ध शुरू करने वालों पर दबाव डालना चाहिए.
  • अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी उठाया सवाल: इलाही ने कहा कि अमेरिका ईरान से 6000 मील दूर है, फिर भी उसने ईरान के आसपास 45 सैन्य ठिकाने बना रखे हैं. उनके मुताबिक यही ठिकाने ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि ईरान ने पहले ही अपने पड़ोसी देशों से कहा था कि वे अपने इलाकों का इस्तेमाल अमेरिका को न करने दें. जिन मिसाइलों से 175 मासूम बच्चियों की मौत हुई, वह बहरीन से आईं थीं. हमें अपना बचाव करने के लिए अमेरिकी बेस को नुकसान पहुंचाना होगा.
  • भारत से रिश्तों पर क्या बोले? इलाही ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei भारत को बहुत पसंद करते थे और भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर देते थे. उन्होंने कहा कि आज भी ईरान भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है और भारतीय लोगों के प्रति सकारात्मक भावनाएं रखता है. हमने ईरान में अपने लोगों को भारत में हमारे भाइयों और बहनों की एकजुटता के बारे में बताया. हमने उन्हें यह भी बताया कि अब वे गैस और पेट्रोल की कमी से जूझ रहे हैं. इसलिए उनकी मदद व समर्थन करें. हमारे दूतावास ने भी इस मुद्दे पर मदद करने और इस समस्या को हल करने की कई बार कोशिश की.
  • भारत के जहाजों को मिल सकता है रास्ता: जब इलाही से पूछा गया कि क्या भारतीय जहाजों को Strait of Hormuz से सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा, तो उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसा संभव है. उन्होंने कहा कि ईरान का दूतावास पहले भी भारतीय जहाजों की मदद करने की कोशिश कर चुका है.
  • युद्ध कितने समय चलेगा? इलाही ने कहा कि इस युद्ध की कोई तय समय सीमा नहीं है. उनके मुताबिक अगर जरूरत पड़ी तो ईरान कई साल तक भी इस संघर्ष को जारी रख सकता है, क्योंकि वह अपनी स्वतंत्रता और सम्मान से समझौता नहीं करेगा.
  • मोजतबा खामेनेई पर क्या बोले? सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि ने कहा कि मुझे कई सालों तक उनसे बहुत करीबी दोस्ती रखने का मौका मिला है. अपनी पर्सनल लाइफ में, वे बहुत नेक हैं. वे कभी भी सरकार की किसी चीज़ का इस्तेमाल नहीं करते. मैनेजमेंट के मामलों में वे बहुत स्मार्ट हैं. उन्हें मैनेजमेंट का अच्छा एक्सपीरियंस है, क्योंकि वे अपने पिता और ईरान में कुछ दूसरे जिम्मेदार अधिकारियों की देखरेख में थे. मैं उनका क्लासमेट था.


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