पुरानी कार, छोटा फार्महाउस और बड़ा दिल: क्यों कहा गया दुनिया का ‘सबसे गरीब राष्ट्रपति’? क्या है अनोखी कहानी

पुरानी Volkswagen Beetle, छोटा फार्महाउस और सैलरी का 90% दान, जानिए उरुग्वे के पूर्व राष्ट्रपति José Mujica की प्रेरक कहानी, जिन्हें दुनिया का ‘सबसे गरीब राष्ट्रपति’ कहा गया.

Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 14 March 2026 2:46 PM IST

उरुग्वे की राजधानी Montevideo के बाहरी इलाके में एक छोटा-सा फार्महाउस था. न ऊंची दीवारें, न सुरक्षा का भारी काफिला. सुबह एक बुजुर्ग आदमी अपने बगीचे में पौधों को पानी देता, पास में उसका तीन टांगों वाला कुत्ता खेलता और थोड़ी देर बाद वही आदमी अपनी पुरानी Volkswagen Beetle में बैठकर दफ्तर निकल जाता. फर्क, बस इतना था कि वह कोई आम किसान नहीं, बल्कि उरुग्वे का राष्ट्रपति था जोस मुजिका (José Mujica). उन्होंने दुनिया को सिखाया कि असली नेतृत्व महलों में नहीं, बल्कि सादगी और ईमानदारी से भरे जीवन में बसता है.

जबकि, दुनिया की राजनीति में आमतौर पर सत्ता का मतलब महलों, सुरक्षा घेरे और ऐशो-आराम से जुड़ा होता है, लेकिन जोस मुजिका (José Mujica) ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया. उरुग्वे की राजधानी Montevideo के बाहरी इलाके में एक साधारण फार्महाउस में रहने वाला यह शख्स एक दौर में देश का राष्ट्रपति था. वह रोज अपने बगीचे में पौधों को पानी देता था, अपने तीन टांगों वाले कुत्ते के साथ रहता था और ऑफिस जाने के लिए पुरानी नीली Volkswagen Beetle चलाता था. इसी सादगी की वजह से दुनिया ने उन्हें “दुनिया का सबसे गरीब राष्ट्रपति” कहना शुरू कर दिया. हालांकिख् मुजिका खुद इस पहचान से सहमत नहीं थे.

मुजिका गरीबी को कैसे परिभाषित करते थे?

जोसे मुजिका का मानना था कि गरीबी का मतलब चीजों की कमी नहीं, बल्कि लगातार और अधिक पाने की चाह है. उनके अनुसार जो व्यक्ति कम में संतुष्ट रहना सीख जाता है, वही असल में आजाद होता है. यही सोच उनके पूरे जीवन और राजनीति में दिखाई देती है. उनके लिए सादगी सिर्फ एक आदर्श नहीं बल्कि जीने का तरीका थी.

किसान परिवार से राष्ट्रपति तक का सफर कैसे शुरू हुआ?

José Mujica का जन्म 20 मई 1935 को उरूग्वे के Montevideo में हुआ था. उनके पिता एक छोटे किसान थे जिनकी मृत्यु तब हो गई जब मुजिका बहुत छोटे थे. इसके बाद उनकी मां, जो गरीब इतालवी प्रवासियों की बेटी थीं, ने उन्हें बेहद साधारण परिस्थितियों में पाला. बचपन खेती-किसानी और आर्थिक संघर्ष के बीच बीता. मुजिका बाद में कहते थे कि उनका बचपन दयनीय नहीं बल्कि गरिमापूर्ण गरीबी वाला था, जहां मेहनत थी, लेकिन आत्मसम्मान भी उतना ही मजबूत था.

कैसे एक युवा किसान क्रांतिकारी आंदोलन का हिस्सा बना?

1960 के दशक में उरुग्वे सामाजिक और आर्थिक असमानताओं से जूझ रहा था. इसी दौर में मुजिका वामपंथी शहरी गुरिल्ला संगठन Tupamaros से जुड़ गए. यह समूह सरकार के खिलाफ सशस्त्र विरोध करता था और डकैती, अपहरण तथा हमलों के जरिए व्यवस्था को चुनौती देता था. एक मुठभेड़ में मुजिका को छह गोलियां लगीं और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. कई बार गिरफ्तारी के बाद अंततः सैन्य तानाशाही के दौरान उन्होंने लगभग 13 साल जेल में बिताए.

जेल के कठिन सालों ने उनकी सोच को कैसे बदला?

जेल में मुजिका को उरुग्वे की सेना द्वारा बनाए गए तथाकथित “नौ बंधकों” में शामिल किया गया था. इन कैदियों को लेकर धमकी दी गई थी कि अगर गुरिल्ला गतिविधियां फिर शुरू हुईं तो इन्हें मार दिया जाएगा. लंबे समय तक उन्हें एकांत कारावास में रखा गया. कभी कुओं में तो कभी जमीन के नीचे बने कमरों में. इन कठिन वर्षों ने उन्हें भीतर से बदल दिया. 1985 में जब देश में लोकतंत्र लौटा तो मुजिका जेल से बाहर निकले, लेकिन अब वह हथियारों की नहीं बल्कि लोकतांत्रिक राजनीति की राह पर चलना चाहते थे.

पूर्व कैदी राष्ट्रपति कैसे बना?

कई दशकों की राजनीतिक यात्रा के बाद 2009 में José Mujica ने उरुग्वे का राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया. 2010 में उन्होंने राष्ट्रपति पद संभाला और 2015 तक इस पद पर रहे. लेकिन सत्ता मिलने के बाद भी उनके जीवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया. उन्होंने सरकारी राष्ट्रपति भवन में रहने से इनकार कर दिया और अपनी पत्नी Lucía Topolansky के साथ अपने छोटे से फूलों के फार्महाउस में ही रहते रहे.

क्यों कहा गया उन्हें ‘दुनिया का सबसे गरीब राष्ट्रपति’?

मुजिका की सादगी ने दुनिया को चौंका दिया. वह अक्सर अपनी पुरानी Volkswagen Beetle से ही राष्ट्रपति कार्यालय जाते थे. उनकी सुरक्षा भी बेहद सीमित थी और उनके घर आने वाले मेहमानों का स्वागत कभी-कभी उनके तीन टांगों वाले कुत्ते “मैनुएला” द्वारा किया जाता था. उनकी इस जीवनशैली ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को उन्हें “दुनिया का सबसे गरीब राष्ट्रपति” कहने पर मजबूर कर दिया.

अपनी तनख्वाह का 90% दान करने का फैसला क्यों किया?

मुजिका ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अपनी मासिक तनख्वाह का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चैरिटी संस्थाओं और गरीबों की मदद करने वाले कार्यक्रमों को दान कर दिया. करीब 12 हजार डॉलर की तनख्वाह में से वह सिर्फ उतना ही पैसा रखते थे जितना एक औसत उरुग्वेवासी कमाता है. उनका मानना था कि राजनीति का उद्देश्य नेताओं को अमीर बनाना नहीं बल्कि समाज की सेवा करना होना चाहिए.

उनके शासनकाल में उरुग्वे ने कौन-कौन से बड़े बदलाव देखे?

सादगी के साथ-साथ मुजिका के कार्यकाल को प्रगतिशील नीतियों के लिए भी जाना जाता है. उनके शासन में उरुग्वे ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दी, गर्भपात को अपराध की श्रेणी से बाहर किया और मनोरंजन के लिए मारिजुआना को वैध बनाने वाला दुनिया का पहला देश बना. साथ ही मजदूरों के अधिकार मजबूत किए गए और न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ाई गई. उनके आलोचक भी उनकी ईमानदारी और स्पष्टवादिता को स्वीकार करते थे.

जीवन के आखिरी वर्षों में उनकी विरासत क्या रही?

जीवन के अंतिम वर्षों में भी मुजिका लैटिन अमेरिकी राजनीति में एक सम्मानित आवाज बने रहे. 2024 में उन्होंने बताया कि उन्हें Esophageal Cancer हो गया है. 13 मई 2025 को, अपने 89वें जन्मदिन से एक सप्ताह पहले, उन्होंने Montevideo के पास अपने उसी साधारण फार्महाउस में अंतिम सांस ली.

क्या उनकी कहानी राजनीति को नया संदेश देती है?

José Mujica का जीवन यह याद दिलाता है कि नेतृत्व हमेशा महलों और आलीशान कारों में नहीं मिलता. कभी-कभी वह धूल भरी सड़कों के अंत में बने छोटे घरों में भी पनपता है. जहां एक बगीचा होता है, एक पुरानी कार खड़ी रहती है और एक नेता सादगी से जीते हुए दुनिया को ईमानदारी का सबक देता है.

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