LPG And Oil Crisis : ईंधन के पड़े लाले, जंग के चलते 10 देशों पर सबसे ज्यादा असर?

LPG And Oil Crisis : मिडिल ईस्ट जंग और Strait of Hormuz में तनाव से वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है. जानिए किन 10 देशों पर ईंधन संकट और महंगाई का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है.

LPG Oil Crisis :  मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और तेल आपूर्ति पर मंडराते खतरे ने दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. अगर क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है या Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग से तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो इसका असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा. दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, खासकर वे देश जो तेल आयात पर निर्भर हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर लगभग 70 से अधिक देशों की ऊर्जा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है, लेकिन 10 बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह संकट कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है.

1. भारत

India दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र की हिस्सेदारी काफी बड़ी है. अगर Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति बाधित होती है या कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिससे महंगाई और परिवहन लागत दोनों बढ़ सकती हैं.

2. चीन

China दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है. चीन की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आता है. इसलिए इस क्षेत्र में युद्ध या तेल टर्मिनलों पर हमले से चीन की औद्योगिक गतिविधियों और विनिर्माण क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है.

3. जापान

Japan अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयातित तेल और गैस पर निर्भर है. जापान के आयातित तेल का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता है, इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह की अस्थिरता से जापान की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.

4. दक्षिण कोरिया

South Korea भी एशिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है. देश की रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री खाड़ी से आने वाले कच्चे तेल पर काफी निर्भर है. अगर आपूर्ति बाधित होती है तो दक्षिण कोरिया की औद्योगिक उत्पादन लागत बढ़ सकती है.

5. जर्मनी

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था Germany पहले ही ऊर्जा संकट के दौर से गुजर चुकी है. अगर तेल और गैस की कीमतें फिर से तेजी से बढ़ती हैं तो जर्मनी की औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर नया दबाव बन सकता है.

6. इटली

Italy भी अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति में कमी आने पर इटली की ऊर्जा लागत बढ़ सकती है, जिससे घरेलू बाजार और उद्योग दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

7. फ्रांस

France बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा का बड़ा उपयोग करता है, लेकिन परिवहन और उद्योग के लिए तेल पर निर्भरता अभी भी महत्वपूर्ण है. इसलिए वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी फ्रांस की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है.

8. तुर्किये

Turkey भौगोलिक रूप से मिडिल ईस्ट के करीब है और उसकी ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है. क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से तुर्किये में ऊर्जा कीमतों और व्यापार मार्गों पर असर पड़ सकता है.

9. पाकिस्तान

Pakistan पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसका बड़ा विदेशी मुद्रा खर्च तेल आयात पर होता है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है.

10. बांग्लादेश

Bangladesh भी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और उसकी ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं. तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से बांग्लादेश के बिजली उत्पादन और औद्योगिक लागत पर असर पड़ सकता है.

क्या दुनिया के कितने देशों पर असर पड़ सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध गहराता है या Strait of Hormuz जैसे प्रमुख समुद्री मार्ग से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे-सीधे 60 से 70 देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है. इसका कारण यह है कि दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है.

क्यों इतना बड़ा असर होगा?

मिडिल ईस्ट दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है. अगर युद्ध के कारण तेल टर्मिनल, पाइपलाइन या समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता कम हो सकती है. इससे कीमतें बढ़ेंगी, जिससे परिवहन, बिजली उत्पादन और औद्योगिक उत्पादन की लागत भी बढ़ जाएगी. नतीजतन, दुनिया के कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक वृद्धि पर दबाव पड़ सकता है.

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