क्या है Oxytocin इंजेक्शन, जिसके इस्तेमाल से कोठे में छोटी बच्चियों को उम्र से बड़ा दिखाया जाता है

ऑक्सीटोसिन एक हार्मोन है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर डिलीवरी के दौरान डॉक्टरों की निगरानी में किया जाता है. लेकिन हाल के खुलासों में सामने आया है कि कुछ अवैध गतिविधियों में इसी इंजेक्शन का गलत उपयोग कर नाबालिग बच्चियों को उम्र से बड़ा दिखाने की कोशिश की जाती है.;

By :  हेमा पंत
Updated On : 18 Feb 2026 6:17 PM IST

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने संसद में दिल्ली के जीबी रोड से जुड़ा एक ऐसा मामला उठाया जिसने पूरे देश को झकझोर दिया. उन्होंने बताया कि किस तरह एक नाबालिग बच्ची को बेसमेंट में छिपाकर रखा गया था. देखने में वह करीब 30 साल की लग रही थी, लेकिन मेडिकल जांच बोन एज टेस्ट से उसकी असली उम्र सिर्फ 14 साल निकली.

बच्ची ने खुलासा किया कि उसे नौ साल की उम्र में बेच दिया गया था और उसके शरीर को “बड़ा” दिखाने के लिए रोज़ ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन लगाए जाते थे. यह मामला केवल एक बच्ची की कहानी नहीं है, बल्कि उस संगठित अपराध की ओर इशारा करता है जिसमें हार्मोन का गलत इस्तेमाल कर नाबालिग लड़कियों का शोषण किया जाता है. इस पूरे मुद्दे को समझने के लिए जरूरी है कि हम पहले जान लें कि ऑक्सीटोसिन क्या है, इसका असली उपयोग क्या है और इसका दुरुपयोग कितना खतरनाक हो सकता है.

ऑक्सीटोसिन क्या है?

इस विषय पर हमने गायनोकोलॉजिस्ट डॉक्टर कविता ने बात की. उन्होंने हमें बताया कि ऑक्सीटोसिन एक हार्मोन है जो हमारे दिमाग के हाइपोथैलेमस में बनता है और पिट्यूटरी ग्लैंड से सीक्रीट होता है. इसे आम बोलचाल में “लव हार्मोन” भी कहा जाता है, क्योंकि यह इमोशनल कनेक्शन, भरोसा, मदरहुड और सामाजिक संबंधों से जुड़ा होता है. दरअसल जब कोई मां अपने नवजात बच्चे को गोद में लेती है, ब्रेस्टफीड कराती है या कोई शख्स अपने करीबियों के साथ इमोशनल जुड़ा हुआ महसूस करता है, तो शरीर में ऑक्सीटोसिन का लेवल बढ़ता है. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यही हार्मोन मेडिकल फॉर्म में इंजेक्शन के रूप में भी उपलब्ध होता है, जिसका इस्तेमाल केवल स्पेशल मेडिकल कंडीशन में किया जाता है.

मेडिकल तौर पर ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल कहां होता है?

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  • डॉक्टरों के अनुसार ऑक्सीटोसिन का उपयोग मुख्य रूप से डिलीवरी (Obstetrics) से जुड़ी स्थितियों में किया जाता है. अगर गर्भवती महिला में लेबर पेन शुरू नहीं हो रहा हो या बहुत धीमा हो, तो डॉक्टर कंट्रोल मात्रा में ऑक्सीटोसिन देकर यूटेराइन कॉन्ट्रैक्शन बढ़ाते हैं.
  • डिलीवरी के बाद ज्यादा खून बहना (Postpartum Hemorrhage) जानलेवा हो सकता है. ऑक्सीटोसिन गर्भाशय को सिकुड़ने में मदद करता है, जिससे ब्लीडिंग कम होती है. 
  • यह इंजेक्शन दूध के फ्लो को बढ़ाने में मददगार होता है. जरूरी बात यह है कि ऑक्सीटोसिन की डोज बहुत सावधानी से तय की जाती है. थोड़ी-सी भी अधिक मात्रा गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है. इसलिए इसे केवल ट्रेन्ड डॉक्टर या अस्पताल सेटअप में ही दिया जाता है.

सेक्सुअल अराउजल से क्या है कनेक्शन?

गायनोकोलॉजिस्ट डॉक्टर कविता ने बताया कि सेक्सुअल अराउजल के लिए भी ऑक्सीटोसिन दिया जाता है. सेक्सुअल अराउज़ल एक फिज़ियोलॉजिकल और साइकोलॉजिकल कंडीशन है, जिसमें बहुत ज़्यादा एक्साइटमेंट होता है. यह हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर और जेनिटल ब्लड फ़्लो (वैसोकंजेशन) बढ़ाकर शरीर को सेक्सुअल एक्टिविटी के लिए तैयार करता है. यानी प्रॉस्टिट्यूशन में छोटी बच्चियां जिन्हें पीरियड्स तक नहीं होते हैं, उन्हें  सेक्सुअली अराउज करने के लिए यह इंजेक्शन दिया जा सकता है.

क्या ऑक्सीटोसिन से फिजिकल डेवलेपमेंट तेज हो सकता है?

वैज्ञानिक रूप से ऑक्सीटोसिन वह हार्मोन नहीं है जो सीधे लंबाई, हड्डियों की उम्र या सेक्सुअल मैच्योरिटी को कंट्रोल करता हो. ये काम मुख्य रूप से ग्रोथ हार्मोन, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन करते हैं. हालांकि, जब किसी बच्ची को बार-बार बाहरी हार्मोन दिए जाते हैं, तो शरीर का नैचुरल हार्मोन बैलेंस बिगड़ सकता है. हार्मोनल सिस्टम बेहद सेंसेटिव होता है. अगर इसे आर्टिफिशियली से छेड़ा जाए, तो शरीर अबनॉर्मल तरीके से रिएक्शन दे सकता है- जैसे सूजन, जलन, अस्थायी शारीरिक बदलाव या मेंस्ट्रुअल साइकिल में गड़बड़ी.

नाबालिग बच्चियों पर कैसे होता है ऑक्सीटोसिन का गलत इस्तेमाल?

 मानव तस्करी और देह व्यापार से जुड़े मामलों में यह आरोप सामने आते रहे हैं कि नाबालिग बच्चियों को ग्राहकों से छिपाने या उन्हें अडल्ट दिखाने के लिए ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन इंजेक्शन दिए जाते हैं. दरअसल इसके पीछे की आपराधिक मानसिकता छिपी है. 

  • कम उम्र की बच्ची को बड़ी दिखाना
  • ग्राहक को धोखे में रखना
  • पुलिस जांच से बचना
  • अधिक आर्थिक लाभ कमाना

यह एक संगठित अपराध का हिस्सा है, जिसमें बच्चियों को इंसान नहीं बल्कि “सामान” समझा जाता है. उनका शरीर, स्वास्थ्य और भविष्य सब कुछ पैसों के लिए दांव पर लगा दिया जाता है.

ऑक्सीटोसिन से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

कम उम्र में ऑक्सीटोसिन या किसी भी हार्मोन का गलत इस्तेमाल कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है. इनमें  हार्मोनल असंतुलन, इर्रेगुलर पीरियड, यूट्रस को परमानेंट नुकसान, कंसीव करने में परेशानी, हाई ब्लड प्रेशर,  दिल और किडनी पर दबाव, इंफेक्शन का खतरा रहता है. इसके अलावा, बार-बार इंजेक्शन लगाने से नसों में सूजन, फोड़े या गंभीर इंफेक्शन भी हो सकते हैं. बचपन और किशोरावस्था शरीर के विकास का जरूरी समय होता है. इस दौरान किसी भी प्रकार की हार्मोनल छेड़छाड़ शरीर के नैचुरल ग्रोथ प्रोसेस को बिगाड़ सकता है.

इस इंजेक्शन से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

इस इंजेक्शन से शारीरिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक आघात भी गहरा होता है.

  • लगातार डर और असुरक्षा
  • डिप्रेशन
  • कॉन्फिडेंस की कमी
  • सुसाइड के विचार
  • PTSD (पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर)

जब एक बच्ची को छोटी उम्र में शोषण, हिंसा और जबरन इंजेक्शन झेलना पड़ता है, तो उसका मानसिक विकास बाधित हो जाता है. वह समाज पर भरोसा खो सकती है और लंबे समय तक काउंसलिंग की जरूरत पड़ सकती है.

क्या बिना डॉक्टर की सलाह के ऑक्सीटोसिन देना अपराध है?

हां भारत में ऑक्सीटोसिन एक नियंत्रित दवा है. इसे बिना मेडिकल जरूरत और डॉक्टर की देखरेख के देना गैरकानूनी है. ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत इसकी बिक्री और उपयोग पर सख्त नियम हैं. अगर कोई व्यक्ति इसे अवैध तरीके से खरीदता, बेचता या लगाता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. यदि यह कार्य मानव तस्करी या यौन शोषण से जुड़ा हो, तो पॉक्सो (POCSO) एक्ट और अन्य आपराधिक धाराएं भी लागू हो सकती हैं.

ऑक्सिटॉक्सिन इंजेक्शन का फल और सब्जियों में इस्तेमाल?

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 ऑक्सिटॉक्सिन एक हार्मोन है जो स्वाभाविक रूप से इंसानों और जानवरों के शरीर में बनता है. मेडिकल लाइन में इसका उपयोग डिलीवरी के दौरान या कुछ विशेष इलाज में किया जाता है. लेकिन पिछले कुछ सालों में खबरें सामने आई हैं कि कुछ लोग इसका गलत तरीके से इस्तेमाल खेती और पशुपालन में भी कर रहे हैं. खासकर फल-सब्जियों की तेज़ ग्रोथ और जानवरों से अधिक दूध या मांस उत्पादन के लिए. यह ट्रेंड न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि सेहत के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है.

ऐसी फल-सब्जियां खाने के नुकसान

अगर ऑक्सिटॉक्सिन या अन्य हार्मोन के प्रभाव से तैयार फसल बाजार में आती है, तो उसे खाने वालों के लिए भी जोखिम हो सकता है.

  • लंबे समय तक ऐसे फल-सब्जी खाने से शरीर के नैचुरल हार्मोन पर असर पड़ता है. इससे महिलाओं और पुरुषों दोनों में हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है.
  • बढ़ते बच्चों के शरीर में हार्मोनल बदलाव ज्यादा सेंसेटिव होते हैं. ऐसे चीजें अर्ली प्यूबर्टी या ग्रोथ से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं.
  • कुछ लोगों में पेट दर्द, उल्टी, गैस, या एलर्जी जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं, खासकर यदि सब्जियां केमिकल से प्रभावित हों.
  • इंजेक्शन से छेड़छाड़ की गई चीजों को खाने से इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है और मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है.

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