कौन है वो पक्षी जो नाश्ते में सिर्फ खाता हड्डियां? जानिए अनोखी डाइट का राज
Bearded Vulture दुनिया का इकलौता गिद्ध है जिसकी 70-90% डाइट हड्डियां होती हैं. जानिए यह हड्डियां कैसे तोड़ता और पचा लेता है.
Lammergeier Bone Eating Bird
Bearded Vulture Bird: पहाड़ों की ऊंचाइयों पर आसमान में मंडराता एक विशाल पक्षी… और उसकी थाली में मांस नहीं, बल्कि हड्डियां. आमतौर पर जब हम जानवरों के खान-पान की बात करते हैं, तो 'हड्डियां' पहली पसंद के रूप में दिमाग में नहीं आतीं. कुत्ते जरूर अपवाद हैं, लेकिन ज्यादातर जीव कठोर और पचने में मुश्किल हड्डियों से दूर ही रहते हैं.
लेकिन प्रकृति ने एक ऐसा अनोखा पक्षी भी बनाया है जिसने हड्डियों को ही अपना मुख्य भोजन बना लिया है. यह है Bearded Vulture, जिसे Lammergeier भी कहा जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अद्भुत गिद्ध अपनी डाइट का 70 से 90 प्रतिशत हिस्सा केवल हड्डियों से पूरा करता है. एक ऐसा कारनामा जो कोई दूसरा जीव नहीं कर पाता.
क्या है इस पक्षी की सबसे बड़ी खासियत?
यूरोप, एशिया और अफ्रीका के पहाड़ी इलाकों में चट्टानों के ऊपर उड़ान भरता यह गिद्ध मांस के लिए अन्य शवभक्षी पक्षियों से प्रतिस्पर्धा नहीं करता. इसकी नजर उन हिस्सों पर होती है जिन्हें बाकी शिकारी छोड़ देते हैं- हड्डियां. यह पसंद कोई अजीब आदत नहीं, बल्कि एक सोची-समझी जीवित रहने की रणनीति है. हड्डियों के भीतर मौजूद बोन मैरो (मज्जा) वसा और प्रोटीन से भरपूर होता है. जब अन्य पक्षी मांस के लिए लड़ रहे होते हैं, तब यह गिद्ध शांतिपूर्वक हड्डियों पर अपना हक जमाता है.
बड़ी हड्डियों को कैसे खाता है?
हड्डियाँ कठोर होती हैं और हर बार उन्हें पूरा निगलना संभव नहीं होता. ऐसे में यह गिद्ध प्रकृति की सबसे अनोखी तकनीकों में से एक का इस्तेमाल करता है. जब कोई हड्डी ज्यादा बड़ी होती है, तो यह पक्षी उसे अपनी चोंच में दबाकर सैकड़ों मीटर ऊँचाई तक उड़ जाता है. फिर सटीक निशाने के साथ उसे नीचे चट्टानों पर गिरा देता है. टकराते ही हड्डी टूट जाती है. कई बार सही आकार के टुकड़े पाने के लिए इसे यह प्रक्रिया बार-बार दोहरानी पड़ती है. यह नजारा न सिर्फ रोमांचक होता है, बल्कि पक्षी की अद्भुत बुद्धिमत्ता और धैर्य का प्रमाण भी है.
क्या इसका पेट सच में हड्डियाँ पचा लेता है?
हाँ, और यही इसकी सबसे बड़ी जैविक ताकत है. इस गिद्ध के पेट में बेहद शक्तिशाली अम्ल (स्टमक एसिड) होता है, जो कठोर हड्डियों को भी घोल देता है. जहाँ दूसरे जानवरों के लिए हड्डियाँ अपशिष्ट हैं, वहीं यह पक्षी उन्हें ऊर्जा में बदल देता है. यह पाचन क्षमता इसे लगभग पूरी तरह हड्डियों पर निर्भर रहने की अनुमति देती है. एक ऐसी अनुकूलन क्षमता जिसने इसे प्रकृति में अलग पहचान दी है.
क्या यह सिर्फ एक शवभक्षी है?
नहीं. इसे “साधारण गिद्ध” समझना भूल होगी. हड्डियों को ढूंढना, उन्हें सही ऊँचाई से गिराना और फिर सुरक्षित तरीके से खाना—ये सब कौशल, बुद्धिमत्ता और धैर्य मांगते हैं. यह पक्षी अपने पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अन्य जानवरों द्वारा छोड़े गए अवशेषों को खत्म कर यह पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करता है और वातावरण को स्वच्छ रखने में मदद करता है. पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी शव का अंतिम हिस्सा भी बेकार न जाए.
क्यों है यह विकास (Evolution) का अनोखा उदाहरण?
प्रकृति में जीवित रहने की सबसे बड़ी कुंजी है. अनुकूलन. Bearded Vulture इस सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है. जिस भोजन को अधिकांश जीव अनदेखा कर देते हैं, उसी को इस पक्षी ने अपनी ताकत बना लिया. अगली बार जब आप किसी गिद्ध को आसमान में चक्कर लगाते देखें, तो केवल सड़ते शव की कल्पना न करें. उस पक्षी के बारे में सोचें जो हड्डियों को जीवनदायी भोज में बदल देता है. यह कहानी बताती है कि विकास की प्रक्रिया कितनी अद्भुत और अप्रत्याशित हो सकती है.





