Sukanya Samriddhi Yojana 2026: बेटी के सपनों की फिक्स्ड जमा कैसे बन सकती है ये योजना?
सुकन्या समृद्धि योजना बेटी के नाम पर सुरक्षित बचत का जरिया है, जिसमें टैक्स फ्री ब्याज मिलता है. सही समय पर खाता खोलने से 21 साल में बड़ी रकम तैयार हो सकती है.
भारत के ज़्यादातर घरों में जब बेटी पैदा होती है, तो खुशी के साथ एक चिंता भी जन्म लेती है - “पढ़ाई कैसे कराएंगे?”, “आगे चलकर खर्च कैसे उठेगा?”
हर मां-बाप चाहता है कि बेटी को किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े, लेकिन सैलरी और रोज़मर्रा के खर्चों के बीच भविष्य के लिए बचत कर पाना आसान नहीं होता.
इसी परेशानी को ध्यान में रखकर सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की थी. यह कोई शेयर बाज़ार या जोखिम वाला निवेश नहीं, बल्कि बेटी के नाम पर धीरे-धीरे पैसा जोड़ने का तरीका है - बिल्कुल गुल्लक की तरह, लेकिन ब्याज के साथ.
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यह योजना असल में है क्या?
सुकन्या समृद्धि योजना का मतलब है - बेटी के नाम से खाता खोलो, हर साल थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करो और जब वह बड़ी हो जाए, तो वही पैसा उसकी पढ़ाई या ज़िंदगी की शुरुआत में काम आए. यह खाता उस बच्ची के नाम खुलता है जिसकी उम्र 10 साल से कम हो. मां या पिता इस खाते को चलाते हैं, लेकिन असली मालिक बेटी होती है.
इस योजना की खास बात यह है कि:
- पैसा सरकार के पास सुरक्षित रहता है
- ब्याज अच्छा मिलता है
- टैक्स का बोझ नहीं पड़ता
यानी जोखिम कम, भरोसा ज़्यादा.
आम आदमी के लिए यह योजना क्यों बनाई गई है?
मान लीजिए कोई पिता रोज़ 200–300 रुपये चाय-सिगरेट या बाहर खाने में उड़ा देता है. अगर वही पैसा बेटी के खाते में जाने लगे तो:
- महीने में: ₹1,000
- साल में: ₹12,000
- 15 साल में: ₹1,80,000
- ब्याज जोड़कर यह रकम कई गुना हो जाती है
यही इस योजना की सोच है - छोटी बचत, बड़ा सहारा. यह योजना अमीरों के लिए नहीं, उन परिवारों के लिए बनी है जो धीरे-धीरे जोड़ना चाहते हैं.
खाता कौन खोल सकता है?
- बेटी की उम्र 10 साल से कम हो
- मां या पिता भारतीय नागरिक हों
- एक बेटी पर एक खाता
- आमतौर पर दो बेटियों तक खाता खुल सकता है
- अगर जुड़वां या तीन बच्चियां हों तो छूट मिलती है
खाता पोस्ट ऑफिस या बैंक में खुल जाता है.
कितनी रकम जमा करनी होती है?
यह योजना ज़ोर नहीं डालती कि हर साल बहुत पैसा डालो. आप चाहें तो साल में सिर्फ ₹250 भी डाल सकते हैं और चाहें तो ₹1.5 लाख तक जमा कर सकते हैं. मतलब गरीब भी चला सकता है, मध्यम वर्ग भी और जिनके पास ज़्यादा पैसे हैं, वे भी. लेकिन ध्यान रखना होता है कि 15 साल तक पैसा डालना जरूरी है और 21 साल में खाता पूरा होता है. यानी बेटी 21 साल की हुई और पैसा उसके हाथ.
बीच में पैसे निकाले जा सकते हैं या नहीं?
यह सबसे बड़ा सवाल होता है. इस योजना में बेटी 18 साल की होने पर या 10वीं पास करने के बाद जमा रकम का लगभग आधा हिस्सा निकाला जा सकता है. शर्त यह है कि वह पैसा उसकी पढ़ाई के लिए हो. मतलब कॉलेज फीस, कोचिंग या किसी कोर्स के लिए. शादी के लिए भी खाता बंद किया जा सकता है लेकिन 18 साल के बाद.
अगर परिवार की हालत बिगड़ जाए तो?
ज़िंदगी में सब कुछ प्लान के हिसाब से नहीं चलता. अगर गंभीर बीमारी हो जाए, घर में कोई बड़ी परेशानी आ जाए, बच्ची के पालन-पोषण में दिक्कत आए तो सरकार कुछ खास मामलों में खाता समय से पहले बंद करने की इजाज़त देती है. यानी यह योजना पत्थर की लकीर नहीं है बल्कि इंसानी हालात समझती है.
टैक्स को लेकर इसमें क्या फायदा है?
यह योजना टैक्स के मामले में बेहद फायदेमंद है. इसमें तीन फायदे एक साथ मिलते हैं:
- पैसा जमा करने पर टैक्स में छूट
- जो ब्याज मिलेगा उस पर टैक्स नहीं
- जो रकम बेटी को मिलेगी उस पर टैक्स नहीं
इसे लोग “तीन-तीन फायदा” वाली योजना कहते हैं.
इससे कितना पैसा बन सकता है?
यह सवाल हर कोई पूछता है. मान लो हर साल ₹1.5 लाख डाले 15 साल तक और ब्याज जुड़ता रहे तो 21 साल में रकम 50–60 लाख या उससे ज्यादा हो सकती है (ब्याज दर पर निर्भर करता है). मतलब बेटी की पढ़ाई, शादी या कोई बड़ा सपना सब उसी से पूरा हो सकता है. और यह पैसा कर्ज़ नहीं, उसका अपना होगा.
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
इस योजना की असली ताकत है अनुशासन. यह आपको मजबूर करती है:
- हर साल बेटी के नाम पैसा रखने के लिए
- भविष्य के बारे में सोचने के लिए
- खर्च से पहले बचत करने के लिए
यह योजना पैसे से ज्यादा सोच बदलती है.
क्या यह योजना हर किसी के लिए सही है?
अगर आप रिस्क नहीं लेना चाहते, शेयर बाज़ार नहीं समझते, बेटी के नाम सुरक्षित बचत चाहते हैं तो यह योजना आपके लिए है. अगर आप जल्दी पैसा डबल करना चाहते हैं, जोखिम उठा सकते हैं तो यह योजना आपके लिए नहीं है. यह योजना तेज़ नहीं पर भरोसेमंद है.
सुकन्या समृद्धि योजना असल में क्या सिखाती है?
यह सिर्फ बैंक खाता नहीं है. यह सिखाती है कि बेटी बोझ नहीं है और उसकी पढ़ाई ज़रूरी है. उसकी ज़िंदगी की शुरुआत मजबूत होनी चाहिए और भविष्य की तैयारी आज से होनी चाहिए. यह योजना पैसे से ज़्यादा सोच बदलने की कोशिश है.
सुकन्या समृद्धि योजना कोई जादू नहीं है. यह मेहनत मांगती है, धैर्य मांगती है, समय मांगती है. लेकिन बदले में यह बेटी को सम्मान के साथ खड़ा होने की ताकत देती है. अगर सही समय पर खाता खुल गया और हर साल थोड़ा-थोड़ा जमा होता रहा तो 20 साल बाद आपकी बेटी के हाथ में सिर्फ पैसा नहीं होगा, उसके पास आत्मविश्वास होगा. और यही इस योजना का असली मकसद है.





