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Exclusive: India की विदेश नीति ‘फिट’, फिर मोदी जिगरी दोस्त इजराइल-अमेरिका के हमलों से ईरान को क्यों नहीं बचा पा रहे: सिन्हा

ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग के बीच भारत की विदेश नीति को लेकर पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है. सिन्हा ने कहा कि मौजूदा सरकार की कूटनीति कमजोर पड़ गई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका और इजराइल से करीबी संबंध होने के बावजूद भारत इस जंग को रोकने में प्रभावी भूमिका क्यों नहीं निभा पा रहा है.

Exclusive: India की विदेश नीति ‘फिट’, फिर मोदी जिगरी दोस्त इजराइल-अमेरिका के हमलों से ईरान को क्यों नहीं बचा पा रहे: सिन्हा
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( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )
संजीव चौहान
By: संजीव चौहान8 Mins Read

Updated on: 23 March 2026 12:01 PM IST

Israel-US-Iran War: “दरअसल जब इंसान की कोई कमजोरी होती है या उसमें खुद के अंदर खोट मौजूद होती है. तो वह बार-बार अपना मुंह साफ रखने के लिए अपने ही चेहरे को बार-बार अकेले में टटोल-टटोल कर देखता है. कमोबेश यही हाल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी विदेश, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, सैन्य-रक्षा-सामरिक और जियोपॉलिटिक्स का हुआ पड़ा है. मैं जो कह रहा हूं. जमीन से जुड़ी सच्चाई तो यही है.

तस्वीर का दूसरा पहली कहूं या फिर खास बात यह भी है कि मेरे द्वारा भारत का पूर्व विदेश मंत्री होने की हैसियत से कहा जा रहा यह सच हिंदुस्तान की मौजूदा हुकूमत, प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को आसानी से गले नहीं उतरेगा. जब संसद में यही मेरे जैसे तमाम सवाल मोदी और उनकी सरकार से विपक्ष करता है तो वे, सामने वाले यानी हमारे जैसे सवाल करने वालों पर ही सवालिया निशान लगाने लगते हैं. ताकि सत्ता और उसके नेता-मंत्रियों के चेहरों और मोटी चमड़ी पर कोई असर न पड़े.”

कौन हैं मोदी को घेरने वाले यशवंत सिन्हा?

यह तमाम बेबाक बातें बयान की हैं यशवंत सिन्हा ने. नई दिल्ली में स्टेट मिरर हिंदी के एडिटर इनवेस्टीगेशन से ‘लंबी विशेष-बातचीत’ करने वाले यशवंत सिन्हा 24 साल तक (1960 से 1984 तक) भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में बिहार कैडर के 1960 बैच के अधिकारी रहते हुए यशवंत सिन्हा सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट से डीएम, भारत के वाणिज्य मंत्रालय में उप-सचिव, भू-तल परिवहन मंत्रालय में संयुक्त सचिव जैसे अहम पदों पर रहे. 1984 में आईएएस सेवा से इस्तीफा देकर वे सक्रिय राजनीति में आ गए. राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक का सफर उन्होंने तय किया. भाजपा का हिस्सा रहते हुए वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भारत के विदेश और वित्त मंत्री भी रहे. साल 2022 में उन्हें विपक्ष ने उन्हें राष्ट्रपति पद का भी अपना उम्मीदवार बनाया था, जिसमें उन्हें कामयाबी हासिल नहीं हुई.

इतनी पैनी नजर क्यों और कैसे?

किसी जमाने में हिंदुस्तान की राजनीति के ‘चाणक्य’ और अटल बिहारी वाजपेई के ‘विश्वासपात्र’ रह चुके यशवंत सिन्हा केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सत्ता आने के बाद से, बीजेपी और बाकी तमाम सक्रिय राजनीति से एकदम अलग है. हां, इसके बाद भी वे सत्ता, सिंहासन और किसी भी राजनीतिक दल के अंदर मची उठा-पटक, जियोपॉलिटिक्स, अंतरराष्ट्रीय विदेश नीति, कूटनीति, सामरिक संबंधों और सैन्य-सुरक्षा पर आज भी कितनी पैनी नजर रखते हैं? इसका अंदाजा पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा के साथ बैठकर उनसे किए गए सवालों के जवाब ही साबित करने के लिए काफी हैं.

मोदी को अडानी-अंबानी खास क्यों?

स्टेट मिरर हिंदी के साथ खास बातचीत में पूर्व विदेश मंत्री कहते हैं, “केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा हुकूमत और उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता संभालने के पहले दिन से स्वत: शांति सुखाए की नीति पर घिसट रहे हैं. उन्हें देश की मजबूती और कमजोरी से कोई सरोकार नहीं है. उन्हें विदेश नीति, कूटनीतिक या जियोपॉलिटिक्स अथवा सैन्य-सुरक्षा की नजर से बर्बाद होते भारत की उतनी चिंता नहीं है. जितना वे अपने दोस्त अडानी और अंबानी को बुलंद करने के लिए दिन-रात परेशान रहते हैं. सोचिए जो प्रधानमंत्री सिर्फ दो चार बिजनेसमैन के बीच अपनी तमाम सोच को समेट लेगा, वह देश को कैसे मजबूत करेगा और कैसे कोई देश मजबूत हो सकता है. एक अदद किसी देश के दो-चार व्यापारियों-उद्योगपतियों के सहारे.”

दुनिया को हंसने का मौका क्यों दे रहे?

“मैं भी विदेश और देश का वित्त मंत्री रहा हूं. अगर मोदी जी और उनके मंत्रिमंडल की तरह मैं भी चला होता तो अब से दो दशक पूर्व ही देश का बेड़ा गर्क हो चुका होता. मैं चूंकि खरी-खरी और देशहित की बात करता हूं. इसलिए मैं बीजेपी और मोदी को फूटी आंख नहीं सुहाता हूं. आज की बीजेपी और मोदी को अपने चारो-तरफ लार-टपकाते लोगों की तलाश रहती है. इस लार-टपकाऊ नीति से देश नहीं चला करता है. इससे तो देश डूबता है. मोदी को समय रहते सोचना होगा कि जब देश की कमजोर हो जाएगा तो फिर उन्हें ट्रंप, नेतन्याहू या चीन भी आने वाले दिनों में कब तक पूछेगा? आज के यह सब मतलबपरस्त मक्कार दोस्त, भारत और उसके प्रधानमंत्री को अपने सामने कमजोर हुआ देख न केवल हमारा बेजा इस्तेमाल करेंगे. अपितु जो देश कभी भारत के सामने खड़े होने की हैसियत नहीं रखते थे. वे भी आने वाले वक्त में कमजोर भारत पर हंसने से भला क्यों शरमाएंगे या क्यों चूकेंगे?”

मोदी जानकर सत्यानाश क्यों कर रहे?

ईरान-इजराइल अमेरिका के बीच छिड़ी जंग को लेकर स्टेट मिरर हिंदी के पूछे गए सवाल का जवाब देने के बजाए भारत के पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा सवाल करते हैं, “भारत का पूर्व विदेश मंत्री होने के अनुभव से मैं इस मसलहे पर इतना ही कहना चाहता हूं कि, केंद्र में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जंग में भारत की दुनिया में थू-थू करवा दी है. जहां तक इन दिनों हमारी अंततराष्ट्रीय विदेश-कूटनीति और देश की जियोपॉलिटिक्स की बात है. तो उसका भी मोदी जी ने सत्यानाश कर डाला है.

दोस्तों से ‘दोस्त’ क्यों पिटवा रहे मोदी?

कह सकता हूं कि देश दांव पर लगाकर मोदी जी ‘प्रधानमंत्री’ की कुर्सी का दोहन कर रहे हैं. बाकी उनके लिए देश जाए भाड़ में. जहां तक भारत की मौजूदा वक्त में विदेश नीति की बात है तो मोदी जी सिर्फ इस सवाल का जवाब दे दें कि जब, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मोदी जी के खास और विश्वासपात्र मित्र हैं, तब फिर इन्हीं दोनो मक्कार देशों के द्वारा ईरान के आसमान से वहां की जमीन पर दिन-रात बरसाई जा रही अकाल मौत को मोदी जी विराम क्यों नहीं दिलवा पा रहे हैं? अपने जिगरी दोस्तों (नेतन्याहू और ट्रंप) से कहकर.

मोदी को ट्रंप-नेतन्याहू क्यों नचा रहे?

यहां मुझे दो ही तर्क नजर आते हैं. पहला तर्क कि मोदी जी की विदेश नीति, कूटनीति और जियोपॉलिटिक्स जमीन पर औंधे मुंह पड़ी है. जिसके चलते उनकी बात नेतन्याहू और ट्रंप दोनो में से कोई नहीं सुन रहा है. दूसरा तर्क, मोदी के बारे में ट्रंप और नेतन्याहू को पता चल चुका है कि मोदी को वे जैसे चाहेंगे अपनी मर्जी के मुताबिक नचाएंगे. नचा भी रहे हैं. इसका मजबूत सबूत भी मैं दे रहा हूं ईरान पर हमले से 40 घंटे पहले मोदी की इजराइल यात्रा.

मोदी लड़ाई क्यों नहीं रुकवा देते…?

उनकी उस यात्रा के ठीक बाद ईरान जोकि भारत का भी मित्र देश है, उसके ऊपर इजराइल ने हमला कर दिया. जो अब तक जारी है. मोदी की ही बात मान लें कि ट्रंप और नेतन्याहू जब उनके दोस्त हैं, तो फिर सवाल है कि मोदी जी के दो दोस्त इजराइल-अमेरिका मिलकर मोदी के तीसरे दोस्त ईरान के साथ 3 सप्ताह से खूनी जंग क्यों लड़ रहे हैं. मोदी अपने दोनो दोस्तों (ट्रंप-नेत्नयाहू) को बोलकर ईरान पर हमले रुकवा क्यों नहीं देते हैं?”

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