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परिवार की विरासत या सैन्य रणनीति? खामेनेई की मौत के बाद IRGC ने बेटे मोजतबा को ही Iran का सुप्रीम लीडर क्यों चुना?

खामेनेई के बाद ईरान की सत्ता में उनके बेटे मोजतबा को उत्तराधिकारी बनाने के पीछे कोई बड़ा रणनीतिक खेल छिपा है, या फिर यह केवल वक्त की मांग है? जंग और संकट के माहौल में आईआरजीसी की भूमिका ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर क्यों मोजतबा खामेनेई को ही सुप्रीम लीडर चुना गया? आइये जानते हैं पूरी डिटेल

परिवार की विरासत या सैन्य रणनीति? खामेनेई की मौत के बाद IRGC ने बेटे मोजतबा को ही Iran का सुप्रीम लीडर क्यों चुना?
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( Image Source:  AI GENERATED IMAGE- SORA )

US-Iran-Israel War: 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को अमेरिका और इजराइल ने एक ज्वाइंट ऑपरेश में मार दिया. वह 36 सालों तक इस पद पर रहे थे. कुछ दिनों बाद खबर आई कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया है. खास बात यह है कि भले ही ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा को चुना, लेकिन असली फैसला इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने लिया.

मोजतबा खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक का नया सुप्रीम लीडर चुने जाने की खबर सबसे पहले ईरान इंटरनेशनल ने दी. अभी इस फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. माना जा रहा है कि अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद इसका ऐलान होगा.

मोजतबा का सत्ता संभालने के क्या हैं मतलब?

मोजतबा का सत्ता संभालना सामान्य उत्तराधिकार नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे 'युद्धकालीन उत्तराधिकार' कहा जा रहा है अमेरिका और इज़राइल के हमलों और नेतृत्व खाली होने की स्थिति में ईरान ने तेजी से नया नेता चुना, ताकि कंट्रोल और स्थिरता बनी रहे.

आईआरजीसी ने मोजतबा को क्यों चुना?

आईआरजीसी ने मोजतबा को चुनने के पीछे दो अहम वजह बताई जा रही हैं. इस फैसले को लेकर आईआरजीसी टॉप पॉजीशन पर किसी तरह की खींचतान रोकना चाहता है. इसके साथ ही सुरक्षा बलों को एकजुट रखना और सत्ता को लेकर अराजकता को रोकना था. दूसरी तरफ आईआरजीसी चाहता था कि कट्टरपंथी नेता, सुरक्षा एजेंसियां और शासन के वफादार समूह इस फैसले को स्वीकार करें और उन्हें न लगे कि व्यवस्था टूट रही है.

मोजतबा के पास एक खास बात है, वह है उनके अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई से सीधा रिश्ता. इससे शासन के समर्थकों के बीच उन्हें आसानी से स्वीकार किया जा सकता है और व्यवस्था में कंटीन्यूटी का मैसेज जाता है. इन दोनों कारणों से आईआरजीसी ने मोजतबा खामेनेई को चुना.

मोजतबा के आईआरजीसी के साथ रिश्त

इसके अलावा, मोजतबा के आईआरजीसी से दशकों पुराने संबंध रहे हैं और कमांड नेटवर्क में उनकी गहरी पकड़ बताई जाती है. वह अपने पिता और आईआरजीसी नेतृत्व के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते थे.

मोजतबा गार्ड कॉर्प्स के सुरक्षा तंत्र के करीब माने जाते हैं और साथ ही नागरिक और धार्मिक नेतृत्व से भी जुड़े रहे हैं. उन्हें अयातुल्ला खामेनेई का सबसे करीबी विश्वासपात्र माना जाता है. पिछले करीब 20 साल से वह सुप्रीम लीडर के दफ्तर 'बैत रहबरी' को संभाल रहे थे.

क्या है बैत रहबरी?

बैत को राज्य की असली शक्ति का केंद्र माना जाता है. यहीं से सुरक्षा, राजनीति और वित्त से जुड़े अहम विभागों को कंट्रोल किया जाता है. यही वजह है कि किसी बाहरी व्यक्ति को इस पद पर लाना इस्लामिक रिपब्लिक के लिए आसान ऑप्शन नहीं था.

मौजूदा हालात में ईरान के सामने दो रास्ते हैं या तो वह डटकर लड़ाई जारी रखे, या फिर पीछे हटकर समझौते करे और युद्ध रोकने की कोशिश करे. मोजतबा दोनों रास्तों को संभालने की स्थिति में बताए जाते हैं.

अगर ईरान लड़ाई जारी रखता है, तो इसका मतलब होगा मजबूत इनटरनल कंट्रोल, सेना की तैनाती और असमान दबाव की रणनीति. अगर दूसरा रास्ता चुना जाता है, तो हमले रुकवाने के लिए ईरान को अपनी क्षेत्रीय और सैन्य नीति के कुछ अहम हिस्सों में रियायत देनी पड़ सकती है.

मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था. वह मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के सबसे बड़े बेटे हैं. उनका बचपन उस समय बीता जब उनके पिता शाह के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय थे. हालांकि पिछले दो दशकों से वह बैत रहबरी संभाल रहे थे, लेकिन 56 साल के मोजतबा ने कभी कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला। माना जाता है कि वह पर्दे के पीछे से काफी प्रभाव रखते थे.

ईरान इजरायल युद्धवर्ल्‍ड न्‍यूज
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