ड्रोन की बौछार से थक रही रक्षा ढाल, क्या लंबी जंग के लिए तैयार हैं अमेरिका और उसके सहयोगी?
मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब हथियारों की असली जंग में बदलता दिख रहा है. ईरान के सस्ते ड्रोन लगातार हमले कर रहे हैं, जबकि उन्हें रोकने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को बेहद महंगी मिसाइलें दागनी पड़ रही हैं.
Israel Iran War News: ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष महज तीन दिन में ही थकाऊ और संसाधन खपाने वाली जंग में बदल गया है. इस्लामिक रिपब्लिक की ओर से लगातार ड्रोन हमलों की लहरें अमेरिका और उसके साझेदार देशों, जैसे बहरीन से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक, की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बना रही हैं. इससे हथियारों का भंडार तेजी से घट रहा है.
इस लड़ाई का नतीजा इस बात पर निर्भर कर सकता है कि किस पक्ष के हथियार पहले खत्म होते हैं. सोमवार को भी शाहेद-136 एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन और छोटे, साधारण क्रूज मिसाइलों ने मिडिल ईस्ट के कई ठिकानों को निशाना बनाया. शनिवार से शुरू हुए अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने यह हमला तेज किया है. इन ड्रोन हमलों में हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य अड्डे, तेल ढांचा और नागरिक इमारतें भी निशाना बनी हैं
ईरान के सस्ते हथियार अमेरिका के लिए कैसे बन रहे मुसीबत?
यूएई के अनुसार, अमेरिका में बने पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम ने ईरान के शाहेद ड्रोन और अन्य बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में 90 प्रतिशत से अधिक सफलता हासिल की है. लेकिन लगभग 20,000 डॉलर के ड्रोन को मार गिराने के लिए करीब 40 लाख डॉलर की मिसाइल का इस्तेमाल करना एक बड़ी समस्या दिखाता है, यह वही चुनौती है जिसका सामना पश्चिमी देशों ने यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से किया था. सस्ते हथियार महंगे रक्षा संसाधनों को तेजी से खत्म कर सकते हैं.
इसका नतीजा यह हो सकता है कि ईरान और अमेरिका दोनों ही कुछ दिनों या हफ्तों में हथियारों की कमी का सामना करें. जो पक्ष ज्यादा समय तक टिकेगा, उसे बड़ा फायदा मिलेगा. गाजा युद्ध में ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी पहले ही कमजोर हो चुके हैं और जून में 12 दिन चली पिछली जंग में उसकी मिसाइल क्षमता को भी नुकसान पहुंचा था. इसके बाद से ईरान ने अमेरिकी हमले के संभावित नतीजों और लागत को लेकर चेतावनियां तेज कर दी थीं.
कतर के मिसाइलों के क्या हैं हालात?
ब्लूमबर्ग न्यूज द्वारा देखे गए एक आंतरिक विश्लेषण के अनुसार, मौजूदा इस्तेमाल की दर से कतर के पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार चार दिन में खत्म हो सकता है. हालांकि कतर के इंटरनेशनल मीडिया ऑफिस ने बयान जारी कर कहा कि उसकी पैट्रियट मिसाइलों का भंडार खत्म नहीं हुआ है और वह पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.
ईरान के ड्रोन और मिसाइल की क्या है कंडीशन?
पिछले साल इजराइल के साथ संघर्ष के बाद ईरान के पास लगभग 2,000 बैलिस्टिक मिसाइल होने का अनुमान था. इसके अलावा शाहेद ड्रोन की तादाद इससे कहीं ज्यादा हो सकती है. ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रक्षा विशेषज्ञ बेका वासर के मुताबिक रूस, जो इन ड्रोन का दूसरा बड़ा निर्माता है, रोजाना सैकड़ों की दर से उत्पादन करने में सक्षम रहा है. रूस हमेशा से ही ईरान का साथ देता आया है.
ज्यादातर हमले ड्रोन से, क्यों ईरान ने बचाकर रखी हैं मिसाइल?
इस साल के संघर्ष की शुरुआत से अब तक तेहरान 1,200 से ज्यादा प्रोजेक्टाइल दाग चुका है, जिनमें बड़ी संख्या शाहेद ड्रोन की रही है. इससे यह संकेत मिलता है कि वह ज्यादा विनाशकारी बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबे हमलों के लिए बचाकर रख सकता है.
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट के सदस्य एली कोहेन ने कहा कि अमेरिका-इजराइल अभियान ने ईरान को सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागने से रोका है. इजराइल का कहना है कि सोमवार तक उसने लगभग 150 मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं.
रक्षात्मक मोर्चे पर ईरान के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं. युद्ध के शुरुआती घंटों में हुए हवाई हमलों ने उसकी सतह से हवा में मार करने वाली बैटरियों को निशाना बनाया था, जिनमें सबसे आधुनिक रूसी निर्मित एस-300 सिस्टम शामिल थे. तब से अमेरिकी और इजराइली लड़ाकू विमान ईरानी हवाई क्षेत्र में बिना किसी बड़ी बाधा के उड़ान भर रहे हैं.
अमेरिका किस डिफेंस सिस्टम का करता है इस्तेमाल?
अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार मुख्य रूप से पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं, जो लॉकहीड मार्टिन के पीएसी-3 मिसाइल दागते हैं. उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों के बावजूद 2025 में लगभग 600 पीएसी-3 मिसाइलें ही बनाई गईं. रिपोर्ट के अनुसार शनिवार से मध्य पूर्व में हजारों इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी जा चुकी हैं.
सऊदी के पास क्या है तकनीक?
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात थाड सिस्टम का भी उपयोग करते हैं, जो अधिक उन्नत और तेज गति वाली मिसाइलों को वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर मार गिराने के लिए डिजाइन किया गया है. इनकी कीमत लगभग 1.2 करोड़ डॉलर प्रति मिसाइल है और इन्हें छोटे ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल करना व्यावहारिक नहीं है.
अमेरिका ने लड़ाकू विमानों के जरिए एडवांस्ड प्रिसीजन किल वेपन सिस्टम मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया है, जिनकी कीमत 20,000 से 30,000 डॉलर के बीच है, इसके अलावा विमानों के संचालन का खर्च अलग है. क्षेत्र में विशेष रूप से ड्रोन रोधी प्रणालियां कम हैं.
आयरन बीम लेजर का क्यों नहीं हो रहा इस्तेमाल?
इजराइली रक्षा कंपनी राफेल द्वारा विकसित आयरन बीम लेजर सिस्टम इसी समस्या का समाधान करने के लिए बनाया गया है, लेकिन इजराइली सेना ने सोमवार को कहा कि अभी इसका उपयोग इस संघर्ष में नहीं किया गया है. अगर ईरान के हमलों की मौजूदा तीव्रता जारी रहती है, तो क्षेत्र में पीएसी-3 मिसाइलों का भंडार कुछ ही दिनों में खतरनाक रूप से कम हो सकता है. यदि हमलावर हथियार भी खत्म होने लगें, तो स्थिति गतिरोध में बदल सकती है.




