सोना-चांदी, हीरा-मोती, रूबी-पन्ना से तैयार हुई दुनिया की सबसे महंगी 'विवाह पट्टू' साड़ी, जिसे नीता अंबानी भी नहीं पहन पाई
नीता अंबानी की 40 लाख वाली साड़ी की खबर महज अफवाह है. असली दुनिया की सबसे महंगी साड़ी 'विवाह पट्टू' है, जिसे गिनीज रिकॉर्ड मिला है.
क्या एक साड़ी की कीमत सच में एक मर्सिडीज कार से भी ज्यादा हो सकती है और यह कोई फिल्मी या रैंप वाली बात नहीं है, बल्कि असली जिंदगी की सच्चाई है. खासकर जब बात हाथ से एक-एक धागे से बुनी गई अनमोल साड़ी की हो. इंटरनेट पर 'दुनिया की सबसे महंगी साड़ी' को लेकर बहुत सी खबरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, लेकिन उनमें से कई बातें गलत हैं, कुछ बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई हैं और कुछ पुरानी सच्चाई को भुला दिया गया है.
सबसे पहले, नीता अंबानी वाली 40 करोड़ की अफवाह
आपने शायद सोशल मीडिया पर पढ़ा या सुना होगा कि नीता अंबानी ने 40 करोड़ रुपये की साड़ी पहनी थी. यह दावा पूरी तरह गलत है. असल में यह अफवाह एक पुरानी और गलत खबर से शुरू हुई थी, जहां कहा गया था कि उन्होंने 40 लाख रुपये की साड़ी पहनी थी कुछ जगहों पर 40 करोड़ लिख दिया गया, जो टाइपो या झूठ था. इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है न कोई फोटो प्रमाण है, न कोई कंपनी या डिजाइनर ने इसे कन्फर्म किया. कई ब्लॉग, इंस्टाग्राम रील्स और व्हाट्सएप फॉरवर्ड इसे सच बताकर फैला रहे हैं, लेकिन यह सिर्फ अफवाह है. नीता अंबानी ने दुनिया की सबसे महंगी साड़ी 'विवाह पट्टू' नहीं पहनी.
तो असली दुनिया की सबसे महंगी साड़ी कौन सी है?
यह सम्मान जाता है विवाह पट्टू (Vivaah Pattu) नाम की कांचीपुरम सिल्क साड़ी को, जिसे चेन्नई सिल्क्स कंपनी ने बनाया था।गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में इसे दुनिया की सबसे महंगी सिल्क साड़ी का दर्जा मिला है. इसे 5 जनवरी 2008 को 39,31,627 रुपये (लगभग 39.32 लाख रुपये) में बेचा गया था. उस समय यह कीमत करीब 1 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर थी. आज के हिसाब से भी यह रकम बहुत बड़ी है एक लग्जरी मर्सिडीज कार (जैसे Mercedes E-Class या S-Class की बेस मॉडल) की कीमत इससे कम या बराबर हो सकती है.
इस साड़ी को इतना खास और महंगा क्या बनाता है?
यह साड़ी सिर्फ सोने-हीरे की वजह से महंगी नहीं है. इसका असली जादू है कला, मेहनत और भारतीय संस्कृति का मेल. पल्लू पर बुनी गई हैं राजा रवि वर्मा की 11 मशहूर पेंटिंग्स खासकर बीच में 'गैलेक्सी ऑफ म्यूजिशियंस' (संगीतकारों का समूह) वाली पेंटिंग, जिसे 'संगीतकारों की आकाशगंगा' भी कहते हैं. इसमें भारत के अलग-अलग राज्यों की महिलाएं दिखाई गई हैं. हर एक अपने पारंपरिक कपड़ों में, अलग-अलग वाद्य यंत्र बजा रही हैं. जैसे:
- केरल की वीणा बजाने वाली महिला
- उत्तर भारत की तबला वाली
- पश्चिम भारत की सारंगी वाली
- तानपुरा, सितार, ढोलक वगैरह के साथ
ये महिलाएं कोई राजकुमारी या देवी नहीं बल्कि भारत की आम औरतें हैं, जो पूरे देश की संगीत और संस्कृति की विविधता को दिखाती हैं. मराठी, बंगाली, तमिल, पंजाबी सब एक साथ. यह साड़ी पहनने से ज्यादा एक जीता-जागता सांस्कृतिक नक्शा है, जो रेशम के धागों में बुना गया है.
बनाने में कितनी मेहनत लगी?
- 4,760 घंटे की शारीरिक मेहनत (यानी लगभग 198 दिन अगर रोज 24 घंटे काम हो)
- 36 कुशल बुनकरों की टीम
- पूरा होने में डेढ़ साल से ज्यादा समय लगा
- 66,700 डिजाइन कार्ड पंच किए गए (सीएडी सॉफ्टवेयर की मदद से)
- 7,440 जैक्वार्ड हुक का इस्तेमाल हुआ
- डबल वार्प तकनीक से बनाई गई कांचीपुरम साड़ी, जिसमें 64 रंगों के शेड और 10 यूनिक डिजाइन थे ब्रोकेड में
इसमें क्या-क्या लगा था? (सामग्री)
यह साड़ी करीब 8 किलोग्राम वजनी थी और इसमें ये कीमती चीजें थीं:
- सोना: 59.7 ग्राम
- हीरा: 3.913 कैरेट
- प्लैटिनम: 120 मिलीग्राम
- चांदी: 5 ग्राम
- रूबी: 2.985 कैरेट
- पन्ना: 55 सेंट
- पीला नीलम: 3 सेंट
- नीलम: 5 कैरेट
- कैट आई: 14 सेंट
- पुखराज: 10 सेंट
- मोती: 2 ग्राम
- मूंगा: 400 मिलीग्राम
इसे किसने खरीदा?
- पहली साड़ी को बेंगलुरु का एक बिजनेसमैन ने अपनी शादी की 10वीं सालगिरह पर खरीदा.
- दूसरा एडिशन (2009 में, करीब 40 लाख रुपये का) एक कुवैत के बिजनेसमैन ने बनवाया, जो अपनी पहचान गुप्त रखना चाहते थे.
क्या इसे सिर्फ दिखाने के लिए बनाया गया?
नहीं! वजन 8 किलो होने और नवरत्नों से सजी होने के बावजूद, इसे एक आम दुल्हन की तरह पहना जा सकता है. पल्लू पर पेंटिंग्स इतनी बारीकी से बुनी गई हैं कि कपड़ा सख्त या भारी नहीं लगता बल्कि सहज और सुंदर दिखता है. आज भी इसकी देखभाल और रिपेयर किया जाता है ताकि रंग और कला बरकरार रहे.




