ट्रंप की सुनें या आतंकियों की मानें, कैसे अब्राहम समझौते को लेकर फंस गए मुनीर और शरीफ?
अमेरिका मिडिल ईस्ट में अब्राहम समझौते को और आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इसके तहत इजरायल और अरब देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित किए जाते हैं. इसको लेकर आतंकी सैफुल्लाह कासूरी ने पाकिस्तान समेत बाकी समर्थन करने वाले देशों को चेतावनी दी है.
Abraham Accords Donald Trump
अमेरिका द्वारा अब्राहम समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिशों के बीच पाकिस्तान और मिडिल ईस्ट की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख और भारत में कई आतंकी गतिविधियों से जुड़े बताए जा रहे सैफुल्लाह कासूरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह इजरायल को मान्यता देने वालों को खुलेआम धमकी देता दिखाई दे रहा है.
वायरल वीडियो में कासूरी कथित तौर पर पाकिस्तान और मुस्लिम देशों को चेतावनी देते हुए कहता है कि यदि किसी ने इजरायल को मान्यता देने की कोशिश की, तो उसका नाश कर दिया जाएगा. यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्षेत्रीय देशों के बीच अब्राहम समझौते को विस्तार देने के प्रयासों में जुटे हुए हैं.
वायरल वीडियो में क्या बोला कासूरी?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सैफुल्लाह कासूरी कहता दिखाई दे रहा है कि "अगर वे यह सोचकर हस्ताक्षर करते हैं कि हमें भी इजरायल के यहूदियों को स्वीकार कर लेना चाहिए, भले ही ऐसा संभव न हो, तो जो भी ऐसा करेगा, चाहे वह शासक हो, राजा हो या कोई और, जो भी इज़राइल को स्वीकार करेगा, वह नष्ट हो जाएगा, तबाह हो जाएगा और बर्बाद हो जाएगा. यह हमारा मुस्लिम उम्माह के रूप में विश्वास है कि हम किसी भी परिस्थिति में इजरायल को मान्यता नहीं देंगे."
क्या पहलगाम आतंकी हमले में शामिल था कासूरी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैफुल्लाह कासूरी का नाम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कथित मास्टरमाइंड के रूप में भी सामने आया था. सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही उसे भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों से जुड़ा मानती रही हैं. कासूरी के इस बयान ने एक बार फिर पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों और उनकी विचारधारा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
अब्राहम समझौते को लेकर क्यों छिड़ी बहस?
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका मिडिल ईस्ट में अब्राहम समझौते को और आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इसके तहत इजरायल और अरब देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित किए जाते हैं. बताया जा रहा है कि ट्रंप ने खाड़ी देशों के कई नेताओं से फोन पर बातचीत की है. वहीं पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से जुड़ी रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका द्वारा ईरान के साथ किसी बड़े समझौते से पहले अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर की शर्त रखी गई थी.
इजरायल के साथ संभावित संबंधों को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी सख्त रुख दिखाया है. उन्होंने कहा कि इजरायल पर भरोसा नहीं किया जा सकता और ऐसे में किसी भी तरह के आधिकारिक संबंध स्थापित करने का कोई मतलब नहीं है.
क्या हैं अब्राहम समझौते?
अब्राहम समझौते अमेरिका की मध्यस्थता में हुए वे समझौते हैं, जिनके तहत इजरायल और कई अरब देशों के बीच राजनयिक रिश्तों को सामान्य किया गया. इस प्रक्रिया की शुरुआत 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान हुई थी. बहरीन उन शुरुआती देशों में शामिल था जिसने इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का फैसला लिया था. इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात समेत कई अन्य देशों ने भी इजरायल के साथ रिश्ते मजबूत किए.




