दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद के बीच अब पाकिस्तान के कराची में मौजूद एक और ऐतिहासिक जिमखाना फिर चर्चा में आ गया है- Hindu Gymkhana... यह सिर्फ एक पुरानी इमारत नहीं, बल्कि बंटवारे से पहले के कराची की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत की कहानी भी है. साल 1925 में ब्रिटिश भारत के दौर में बना हिंदू जिमखाना उस समय कराची के प्रभावशाली हिंदू समुदाय का सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक केंद्र माना जाता था. यहां बड़े कारोबारी, समाजसेवी, वकील और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोग जुटते थे. क्लब सिर्फ मनोरंजन की जगह नहीं था, बल्कि हिंदू समुदाय की सामाजिक पहचान का प्रतीक भी था. उस दौर में कराची एक बड़ा व्यापारिक शहर बन रहा था और सिंध के हिंदू व्यापारी आर्थिक रूप से बेहद मजबूत माने जाते थे। हिंदू जिमखाना उनकी उसी हैसियत और प्रभाव का प्रतीक बन गया था... लेकिन फिर आया 1947 का बंटवारा... भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद कराची से हजारों हिंदू परिवार भारत आ गए. इसके बाद हिंदू जिमखाना को 'इवैक्यूई प्रॉपर्टी' घोषित कर दिया गया, यानी ऐसी संपत्ति जिसके मालिक देश छोड़ चुके थे... धीरे-धीरे इसकी बड़ी जमीन सरकारी नियंत्रण में चली गई और मूल परिसर का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया. हालांकि मुख्य इमारत बची रही. आज यह पाकिस्तान में एक संरक्षित हेरिटेज साइट के तौर पर मौजूद है और यहां National Academy of Performing Arts यानी NAPA संचालित होती है. यहां थिएटर, संगीत और कला से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन इस इमारत को लेकर बहस कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई.कुछ लोग इसे पाकिस्तान की साझा सांस्कृतिक विरासत मानते हैं, जबकि कई हिंदू संगठन और इतिहासकार इसे कराची के मिटते हिंदू इतिहास की आखिरी बड़ी निशानी बताते हैं.