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पाकिस्तान पर भरोसा कैसे करें? अमेरिकी नेता ने मध्यस्थता कर रहे पाक पर उठाए बड़े सवाल, शेयर किया पाक मंत्री का पुराना बयान

अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत के दौरान अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सीधे तौर पर कहा है कि हम पाक का कैसे भरसा करें?

पाकिस्तान पर भरोसा कैसे करें? अमेरिकी नेता ने मध्यस्थता कर रहे पाक पर उठाए बड़े सवाल, शेयर किया पाक मंत्री का पुराना बयान
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( Image Source:  X-@ANI )

अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नया विवाद सामने आया है. अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर Lindsey Graham ने पाकिस्तान को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि अगर वह मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, तो यह स्थिति सिर्फ समस्या ही नहीं, उससे भी ज्यादा गंभीर है.

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पाकिस्तान की फज़ीहत की है. इसके साथ ही Lindsey ने पाकिस्तान की इजराइल को लेकर सोच पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि साफ दिख रहा है कि पाकिस्तान का मीडिएटर बनना काफी मुश्किलें पैदा कर रहा है.

पाकिस्तान के बारे में क्या बोलीं ट्रंप की नेता?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए पोस्ट में ग्राहम ने कहा कि इजरायल को लेकर पाकिस्तान की सोच लंबे समय से नकारात्मक रही है. उन्होंने लिखा, “मुझे काफी समय से यह साफ दिख रहा है कि पाकिस्तान का मध्यस्थ बनना बेहद मुश्किल स्थिति पैदा करता है. इजरायल के प्रति उसकी दुश्मनी पुरानी है.”

ग्राहम ने यह भी दावा किया कि ईरानी सैन्य विमानों को पाकिस्तान के एयरबेस पर जगह दी जा रही है. साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं की ओर से इजरायल के खिलाफ दिए गए बयानों को “चिंताजनक” बताया. उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Muhammad Asif ने दोबारा साफ किया है कि पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल नहीं होगा.

क्या है पूरा मामला?

अब्राहम अकॉर्ड्स अमेरिका की मध्यस्थता में शुरू किया गया वह समझौता है, जिसके तहत इजरायल और कई अरब देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक संबंध सामान्य किए गए थे. इसकी शुरुआत 2020 में हुई थी और इसे तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की बड़ी कूटनीतिक पहल माना गया था.

ख्वाजा के किस पुराने बयान का किया जिक्र?

लिंडसे ग्राहम ने ख्वाजा आसिफ के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही वह वीडियो पुराना हो, लेकिन उसमें दिखाई गई सोच आज भी मौजूद लगती है. ग्राहम ने कहा, “उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान कभी अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल नहीं होगा क्योंकि उन्हें इजरायल पर भरोसा नहीं है. मुझे लगता है कि वह भावना आज भी वैसी ही है.”

उन्होंने यह भी कहा कि अब पाकिस्तान को राष्ट्रपति Donald Trump की उस अपील पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए, जिसमें कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने को कहा गया था.

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम और शांति समझौते को लेकर चल रही चर्चाओं में पाकिस्तान की कथित मध्यस्थता की खबरों के बीच ग्राहम का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है.

वीडियो में आसिफ ने क्या कहा था?

विवाद तब और बढ़ गया जब ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तानी चैनल Samaa TV को दिए इंटरव्यू में इजरायल को लेकर पाकिस्तान की पुरानी नीति दोहराई. उन्होंने कहा, “मेरी व्यक्तिगत राय है कि हमें किसी ऐसे समझौते में शामिल नहीं होना चाहिए, जो हमारी मूल विचारधारा के खिलाफ जाता हो.”

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ ने इजरायल की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “आप उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता?” पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख पूरी तरह साफ है और यह उनके लिए स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने पाकिस्तान के पासपोर्ट नियमों का भी जिक्र किया और कहा कि पाकिस्तानी दस्तावेजों में इजरायल को मान्यता प्राप्त देश के रूप में नहीं माना जाता.

आसिफ ने किस पुरानी नीति का किया जिक्र?

आसिफ ने एक बार फिर पाकिस्तान की पुरानी नीति दोहराई कि जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं होती, तब तक पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा.

ट्रंप किन देशों को जोड़ना चाहते हैं?

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप अब्राहम अकॉर्ड्स को और विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने Truth Social पर किए गए एक लंबे पोस्ट में सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन जैसे मुस्लिम बहुल देशों से भविष्य में इस समझौते में शामिल होने की अपील की थी. अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और कई अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित किए गए थे.

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