क्या है Ku Klux Klan, अमेरिका में क्या रहा है इसका इतिहास, RSS ने क्यों कहा- 'हम नहीं हैं ऐसे'
अमेरिकी प्रो व्हाइट संगठन Ku Klux Klan क्या है? इसका इतिहास कैसा रहा है और Rashtriya Swayamsevak Sangh (आरएसएस) ने इससे दूरी क्यों बनाई? जानिए इस बहस के पीछे की पूरी कहानी
अमेरिका के इतिहास में Ku Klux Klan का नाम नस्लवाद, हिंसा और डर की राजनीति के रूप में लिया जाता है. 19वीं सदी में शुरू हुआ यह संगठन अश्वेतों, यहूदियों और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने और हिंसक गतिविधियों के लिए कुख्यात रहा है. समय-समय पर इसके तरीके और रूप बदले, लेकिन इसकी विचारधारा को लेकर विवाद कभी खत्म नहीं हुआ. हाल के दिनों में भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का नाम इस संदर्भ में चर्चा में आ रहा है. इस बीच संघ ने ऐसे बयानों को लेकर साफ किया है कि उसका Ku Klux Klan जैसी किसी भी विचारधारा से कोई संबंध नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर KKK का इतिहास क्या रहा है, और RSS को यह सफाई देने की जरूरत क्यों पड़ी?
RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसाबले ने कु क्लक्स क्लान को लेकर बयान वॉशिंगटन में हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस में एक संवादात्मक सत्र में दिया था. उन्होंने कहा कि आरएसएस के बारे में वैसी ही गलत धारणाएं हैं जैसी अमेरिका में भारत के बारे में हैं.
RSS ने क्यों कहा - 'हम वैसे नहीं'
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने RSS और कू क्लक्स क्लैन के बीच की तुलना को सिरे से खारिज कर दिया. जो भी ऐसा कहते हैं या ऐसी धारणा को स्थापित करना चाहते हैं, वो "गलतफहमी" में हैं. उनकी जानकारी गलत सूचनाओं पर आधारित है. इसके पीछे उन्होंने कई वजह गिनाए हैं.
सर्वोच्चता का खंडन: होसाबले ने तर्क दिया कि RSS "एकता और भाईचारे के दर्शन" को बढ़ावा देता है, जो उनके अनुसार किसी भी सर्वोच्चतावादी विचारधारा के विपरीत है.
सांस्कृति संरक्षण पर जोर: उन्होंने RSS को एक स्वयंसेवकों द्वारा संचालित सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में परिभाषित किया, जिसकी जड़ें भारतीय परंपराओं में गहरी जमी हैं, न कि एक नस्लीय घृणा फैलाने वाले समूह के रूप में.
अल्पसंख्यक-विरोध का खंडन: आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले होसाबले ने कहा कि RSS के सकारात्मक कार्यों जैसे समाज सेवा को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसके विरोधी नैरेटिव (कहानियों) का ही प्रचार किया जाता है.
यह तुलना अक्सर उन आलोचकों द्वारा की जाती है, जो आरोप लगाते हैं कि यह हिंदू राष्ट्रवादी संगठन एक ऐसे 'विजिलेंटे' (कानून अपने हाथ में लेने वाले) समूह की तरह काम करता है, जो भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाता है. ठीक वैसे ही, जैसे अमेरिका में KKK काम करता था. RSS नेता ने इस तुलना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि "इसमें सर्वोच्चतावादी होने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता."
Ku Klux Klan क्या?
कू क्लक्स क्लैन (KKK) व्हाइट अमेरिकी डोमिनेशन से संबंधित नफरत फैलाने वाला समूह है. इसकी स्थापना 19वीं सदी के आखिर में हुई थी. यह समूह हिंसक और अक्सर गुप्त तरीकों से व्हाइट अमेरिकियों के दबदबे, मूल-निवासीवाद और नस्लीय अलगाव की वकालत करने के लिए जाना जाता है. इसने ऐतिहासिक रूप से उस दौर में ब्लैक (अश्वेत) अमेरिकियों के साथ-साथ प्रवासियों, कैथोलिकों और यहूदियों को भी निशाना बनाया. अक्सर इसके लिए आतंकवाद, लिंचिंग और डराने-धमकाने के तरीकों का इस्तेमाल किया था.
कू क्लक्स क्लैन का इतिहास कैसा?
Ku Klux Klan (KKK) तीन अलग-अलग दौरों से गुजरा है और अक्सर यह ऐसे समय में उभरा है जब समाज में बहुत ज्यादा बेचैनी और तनाव का माहौल था.
पहला क्लैन (1865–1870): अमेरिकी गृहयुद्ध के तुरंत बाद टेनेसी में कॉन्फेडरेट सैनिकों द्वारा स्थापित, पहला क्लैन एक गुप्त विद्रोही समूह के तौर पर काम करता था. इसका मकसद पुनर्निर्माण काल के दौरान नए आजाद हुए अश्वेत लोगों और उनके श्वेत साथियों को डरा-धमकाकर श्वेत वर्चस्व को फिर से स्थापित करना था. उन्होंने हजारों लोगों की हत्या की और "सशस्त्र गुरिल्ला युद्ध" में शामिल रहे. 1871 के कू क्लक्स क्लैन अधिनियम और संघीय हस्तक्षेप के कारण, यह संगठन काफी हद तक अमेरिका में कमजोर पड़ गया.
दूसरा क्लैन (1915–1944): KKK को 1915 में अटलांटा के पास फिर से शुरू किया गया. इसके पीछे फिल्म 'द बर्थ ऑफ ए नेशन' से मिली प्रेरणा थी, जिसमें पहले क्लैन को नायकों के तौर पर दिखाया गया था. यह रूप एक राष्ट्रव्यापी, मुख्यधारा का संगठन बन गया, जिसके लाखों सदस्य थे. इसने अपनी नफरत का दायरा बढ़ाते हुए अश्वेत लोगों के अलावा कैथोलिकों, यहूदियों और प्रवासियों को भी इसमें शामिल कर लिया. 1930 के दशक के दौरान आंतरिक घोटालों और नेतृत्व में भ्रष्टाचार के कारण इसका तेजी से पतन हो गया.
तीसरा क्लैन (1946-1950 से अब तक): नागरिक अधिकार आंदोलन की प्रतिक्रिया के तौर पर उभरकर सामने आया यह क्लैन छोटे-छोटे, स्थानीय गुटों में बंटा हुआ था. ये गुट नस्लीय समानता का विरोध करने के लिए बम धमाकों, हत्याओं और मारपीट जैसे हिंसक तरीकों का इस्तेमाल करते थे.
आधुनिक समय में क्लैन की गतिविधियां काफी कम हो गई हैं. 21वीं सदी तक आते-आते इसके सक्रिय सदस्यों की अनुमानित संख्या घटकर कुछ हजार रह गई हैं, जो छोटे-छोटे, अलग-थलग पड़े गुटों में बंटे हुए हैं.




