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कैसी थी अमल खलील की War Reporting, जिससे इजरायल हुआ परेशान, हवाई हमले में मार डाला, महिला पत्रकार को जानें

दक्षिणी लेबनान में इजरायली ‘डबल-टैप’ एयरस्ट्राइक में पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई, जबकि उनकी सहयोगी घायल हैं. प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है.

इजरायली हवाई हमले में लेबनानी पत्रकार की मौत
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इजरायली हवाई हमले में लेबनानी पत्रकार की मौत
( Image Source:  X: @reach2msingh )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय6 Mins Read

Updated on: 24 April 2026 3:31 PM IST

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने साउथ लेबनान के अल-तैरी गांव में हुए इजरायली हवाई हमले की कड़ी निंदा की है. इस हमले में अनुभवी पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई और उनकी सहयोगी फोटोग्राफर ज़ैनब फराज गंभीर रूप से घायल हो गईं. प्रधानमंत्री ने इस घटना को मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराध बताया है. बुधवार को अमल खलील और ज़ैनब फराज दक्षिणी लेबनान के अल-तैरी गांव में रिपोर्टिंग कर रही थीं. वे एक वाहन में यात्रा कर रही थीं. अचानक उनके सामने वाली कार पर इजरायली हवाई हमला हुआ, जिसमें दो लोग मारे गए.

इस हमले के बाद दोनों पत्रकार डर गईं और भागकर पास की एक इमारत में शरण लेने की कोशिश की. लेकिन ठीक उसी समय उस इमारत पर भी दूसरा हमला कर दिया गया. इसे लेबनानी अधिकारियों ने 'दोहरी गोलीबारी' या 'डबल-टैप हमला' कहा है यानी पहले हमला, फिर बचाव की कोशिश होने पर दूसरा हमला. पैरामेडिक्स (बचावकर्मी) ने ज़ैनब फराज को किसी तरह बचाकर अस्पताल पहुंचाया. लेकिन अमल खलील मलबे के नीचे दब गईं. बचाव दल कई बार उन तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन इजरायली गोलीबारी की वजह से उन्हें पीछे हटना पड़ा. आखिरकार हमले के सात घंटे से ज्यादा समय बाद, आधी रात के करीब, मलबे से अमल खलील का शव बरामद किया गया.

आखिरी संपर्क कब हुआ?

सहकर्मियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमल खलील से आखिरी बार स्थानीय समयानुसार शाम करीब 4:10 बजे (13:10 GMT) संपर्क हुआ था. उस समय उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों और लेबनानी सेना को फोन किया था. उसके बाद उनका संपर्क टूट गया. लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बचावकर्मी पहले हमले में मारे गए दो लोगों के शव निकालने में सफल रहे, लेकिन जब वे अमल खलील तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, तो इजरायली सेना की गोलीबारी शुरू हो गई इससे काफी देरी हुई.

अमल खलील कौन थीं?

अमल खलील 1984 में साउथ लेबनान के बायसरियेह गांव में पैदा हुई थीं. वे अल-अखबार अखबार की अनुभवी पत्रकार थीं. 2006 के इजरायल-लेबनान युद्ध के बाद से वे लगातार इस क्षेत्र की रिपोर्टिंग कर रही थीं. उनकी हाल की रिपोर्टिंग मुख्य रूप से उन लेबनानी गांवों पर केंद्रित थी जहां इजरायली सैनिक तैनात हैं और घरों को तोड़ रहे हैं. इस साल की शुरुआत में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मेरा काम लेबनान के सीमावर्ती गांवों के लोगों की हिम्मत और लचीलेपन को दुनिया के सामने लाना है. मैं इस झूठ को तोड़ना चाहती हूं कि इजरायल केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता है. मैं घरों, खेतों पर बमबारी और बच्चों की मौत के सबूत दिखाती हूं. अपने रिपोर्टिंग के जरिए मैं इन लोगों के साथ एकजुटता दिखाने की कोशिश करती हूं.' दुर्भाग्यवश, अमल खलील इस साल लेबनान में मारी गईं नौवीं पत्रकार हैं.

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रियाएं

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि पत्रकारों को जानबूझकर निशाना बनाना, बचाव दल को रोकना और फिर उनके ठिकानों पर दोबारा हमला करना साफ-साफ युद्ध अपराध है. उन्होंने इजरायल पर लेबनान के खिलाफ अपने आक्रामक कृत्यों की सच्चाई छिपाने का आरोप लगाया. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमल खलील की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और ज़ैनब फराज के जल्दी ठीक होने की कामना की. उन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा कि इजरायल पत्रकारों को लगातार निशाना बना रहा है ताकि अपनी करतूतों को छिपा सके. कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने इस हत्या की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए चेतावनी है. CPJ की क्षेत्रीय निदेशक सारा कुदाह ने कहा, 'घायल लोगों को बचाने वाले चिकित्सा दल को रोकना एक क्रूर अपराध है. हमने इसे गाजा में देखा और अब लेबनान में फिर हो रहा है. निहत्थी पत्रकार अमल सात घंटे से ज्यादा मलबे के नीचे फंसी रहीं, जबकि रेड क्रॉस को उन्हें बचाने नहीं दिया गया.' अल जजीरा की रिपोर्टर हेइडी पेट ने बताया कि अमल खलील लेबनान में बहुत सम्मानित पत्रकार थीं. पिछले युद्ध के दौरान उन्हें व्हाट्सएप पर इजरायली नंबर से सीधी धमकियां मिली थीं, जिसमें कहा गया था कि अगर जान बचानी है तो रिपोर्टिंग बंद कर दो या लेबनान छोड़ दो.

इजरायल की प्रतिक्रिया

इजरायली सेना ने इन आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि वे जानबूझकर पत्रकारों को निशाना नहीं बनाते और बचाव दल को घटनास्थल पर जाने से नहीं रोका. उन्होंने पूरे मामले की समीक्षा करने की बात कही है. गौरतलब है कि एक महीने से भी कम समय पहले दक्षिणी लेबनान में इसी तरह के एक और 'दोहरी गोलीबारी' हमले में तीन पत्रकारों की मौत हो चुकी है.

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