पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती! युवाओं के लिए कैसे प्रेरणा बनें 70 साल के राजाराम मौर्य, 10वीं में लाए 86% नंबर
रायबरेली के 70 वर्षीय राजाराम मौर्य ने हाईस्कूल परीक्षा में 86% अंक हासिल कर समाज को चौंका दिया. उन्होंने साबित किया कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र सीमा नहीं होती.
राजाराम मौर्य ने साबित कर दिया कि उम्र सच में सिर्फ एक संख्या भर है. उत्तर प्रदेश के रायबरेली शहर के रहने वाले 70 साल के इस बुजुर्ग ने हाईस्कूल की परीक्षा पास करके सबको चौंका दिया है. उन्होंने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि पूरे 86 प्रतिशत अंक हासिल करके युवा पीढ़ी के लिए एक शानदार मिसाल पेश की है. बैंक से रिटायर हुए, लेकिन सीखने का जुनून अभी भी जिंदा रहा.
रायबरेली के मधुबन मोहल्ले में रहने वाले राजाराम मौर्य का पूरा करियर बहुत सम्मानजनक रहा है. वे पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में सीनियर मैनेजर के उच्च पद पर काम कर चुके हैं. साल 2016 में बैंक से रिटायरमेंट हो जाने के बाद भी उनके अंदर विद्यार्थी वाला जोश और लगन बिल्कुल कम नहीं हुई. उनकी जन्म तिथि 11 दिसंबर 1956 है, जिसके हिसाब से आज उनकी उम्र 70 साल हो चुकी है.
'पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती'
भारत समाचार के रिपोर्टर से खास बातचीत करते हुए राजाराम मौर्य ने बताया कि पढ़ने-सीखने की उनकी चाहत कभी कम नहीं हुई. रिटायरमेंट के बाद जब उन्हें खाली समय मिला, तो उन्होंने सोचा कि इस समय को बेकार न जाने दें. उन्होंने फैसला किया कि अब हाईस्कूल की परीक्षा देकर अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे और उन्होंने न सिर्फ फैसला किया, बल्कि उसे पूरा भी कर दिखाया. 70 साल की उम्र में उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा दी और शानदार 86 प्रतिशत अंक हासिल किए. उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर मन में मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी उम्र शिक्षा हासिल करने में बाधा नहीं बन सकती.
हताशा में डूबे छात्रों के लिए बड़ी प्रेरणा
आजकल बहुत से छात्र-छात्राएं परीक्षा में थोड़े कम अंक आने या एक-दो बार असफल हो जाने पर हताश हो जाते हैं, मनोबल टूट जाता है. ऐसे युवाओं के लिए राजाराम मौर्य जी का यह उदाहरण बहुत बड़ी प्रेरणा है. उन्होंने दिखा दिया कि असफलता या उम्र कोई मायने नहीं रखती. अगर आपमें सीखने की लगन हो, मेहनत करने का जज्बा हो, तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है. राजाराम की इस अनोखी उपलब्धि की पूरे समाज में खूब सराहना हो रही है. लोग कह रहे हैं कि उनकी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति सच में काबिले तारीफ है। उन्होंने न सिर्फ खुद को साबित किया, बल्कि पूरे समाज को यह मैसेज दिया कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र सीमा नहीं होती. राजाराम मौर्य जी का यह सफर सिखाता है कि सच्ची लगन और सही मकसद के साथ कभी भी कुछ भी हासिल किया जा सकता है. उनकी कहानी युवाओं और बुजुर्गों, दोनों के लिए प्रेरणादायक है.




