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राघव चड्ढा से लेकर हरभजन सिंह-स्वाति मालीवाल तक, BJP में शामिल होंगे AAP के इतने सांसद, AAP में सबसे बड़ी फूट

राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. लंबे समय से पार्टी के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है. चड्ढा के इस फैसले ने न सिर्फ आम आदमी पार्टी बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है.

राघव चड्ढा से लेकर हरभजन सिंह-स्वाति मालीवाल तक, BJP में शामिल होंगे AAP के इतने सांसद, AAP में सबसे बड़ी फूट
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( Image Source:  @Gagan4344-X )
सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी5 Mins Read

Updated on: 24 April 2026 4:04 PM IST

दिल्ली की सियासत में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल तब आया, जब राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. लंबे समय से पार्टी के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है. चड्ढा के इस फैसले ने न सिर्फ आम आदमी पार्टी बल्कि पूरे राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है.

बताया जा रहा है कि राघव चड्ढा के साथ-साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी पार्टी से अलग होने का फैसला किया है. तीनों नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे भारतीय जनता पार्टी में आप को विलय करेंगे.

क्या राघव चड्ढा ने AAP से इस्तीफा देकर BJP जॉइन करने का फैसला कर लिया?

राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ तौर पर कहा कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से दूरी बनाने का फैसला कर लिया है. उन्होंने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 'आम आदमी पार्टी, जिसे मैंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपने जीवन के 15 साल दिए, अब पूरी तरह से अपने सिद्धांतों, मूल्यों और आदर्शों से भटक चुकी है. यह पार्टी अब देश या राष्ट्रीय हित में काम नहीं कर रही, बल्कि निजी स्वार्थ के लिए काम कर रही है.' इस बयान ने यह साफ कर दिया कि पार्टी के अंदर मतभेद अब चरम पर पहुंच चुके हैं और चड्ढा ने अलग रास्ता चुन लिया है.

AAP छोड़ ये जायेंगे BJP के साथ

  1. राघव चड्ढा
  2. संदीप पाठक
  3. अशोक मित्तल
  4. हरभजन सिंह
  5. राजेंद्र गुप्ता
  6. स्वाति मालीवाल
  7. विक्रमजीत साहनी

क्या AAP के तीनों राज्यसभा सांसद भी साथ छोड़ रहे हैं?

सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी पार्टी से अलग होने का ऐलान किया है. तीनों नेताओं का यह कदम आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि ये सभी पार्टी के प्रमुख चेहरे रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ये तीनों नेता बीजेपी में शामिल होते हैं, तो इससे संसद में शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ सकता है.

Raghav Chadha ने क्यों बनाई AAP से दूरी?

आम आदमी पार्टी (AAP) में बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है. पार्टी के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने ऐलान किया है कि AAP के 2/3 सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय का फैसला ले चुके हैं. राघव चड्ढा ने कहा कि 'मैं आपको असली वजह बताना चाहता हूं कि मैंने पार्टी गतिविधियों से दूरी क्यों बनाई. मैं उनके अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहता था. मैं उनकी दोस्ती के लायक नहीं था क्योंकि मैं उनके गलत कामों में शामिल नहीं था. हमारे पास सिर्फ दो विकल्प थे. या तो राजनीति छोड़ दें और पिछले 15-16 सालों का जनसेवा का काम खत्म कर दें, या फिर अपनी ऊर्जा और अनुभव के साथ सकारात्मक राजनीति करें. इसलिए हमने तय किया है कि हम, AAP के 2/3 राज्यसभा सदस्य, संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए BJP में विलय करेंगे.”

टमैं सही पार्टी में नहीं था…' आखिर क्यों बोले राघव चड्ढा ऐसा?

अपने बयान में राघव चड्ढा ने पार्टी के अंदर की स्थिति को लेकर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से आप में से कई लोग मुझे यह बात कह रहे थे, और मैंने भी व्यक्तिगत रूप से महसूस किया है कि मैं गलत पार्टी में सही इंसान हूं. मैं दोहराता हूं.‘मैं गलत पार्टी में सही इंसान हूं.’ इसलिए आज मैं यह घोषणा करता हूं कि मैं आम आदमी पार्टी से खुद को अलग कर रहा हूं और जनता के बीच जा रहा हूं.” इस बयान से साफ है कि चड्ढा लंबे समय से पार्टी के भीतर असहज महसूस कर रहे थे और अब उन्होंने इसे सार्वजनिक कर दिया है.

क्या पीएम मोदी की तारीफ भी बनी बड़ा संकेत?

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा तेज है कि राघव चड्ढा ने हाल ही में नरेंद्र मोदी की नीतियों और कार्यशैली की तारीफ की थी. इसे उनके संभावित राजनीतिक रुख बदलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, अभी तक बीजेपी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं.

क्या AAP में यह सबसे बड़ी संसदीय टूट है?

अगर तीनों राज्यसभा सांसदों का पार्टी छोड़ना औपचारिक रूप से पूरा होता है, तो यह आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ी संसदीय चुनौती मानी जाएगी. इससे पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में पकड़ कमजोर हो सकती है और विपक्षी दलों को बड़ा मौका मिल सकता है.

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