मिडिल ईस्ट ही नहीं अमेरिका में भी बुरी तरह फंसे ट्रंप, '60 दिन की डेडलाइन' से कैसे बाहर निकालेंगे अपनी गर्दन, 3 Options
मिडिल ईस्ट और अमेरिका में दबाव में Donald Trump, 60 दिन की डेडलाइन पर क्या हैं 3 विकल्प? War Powers Resolution के तहत पूरी कहानी
ईरान के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच Donald Trump अब सिर्फ युद्ध के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि कानून और राजनीति के दबाव में भी घिरते दिख रहे हैं. 60 दिनों की वह संवैधानिक समय-सीमा, जो War Powers Resolution के तहत लागू होती है, तेजी से खत्म होने की ओर है. 1 मई नजदीक आते ही सवाल और भी तेज हो गया है. ट्रंप के अपने और पराए पूछने लगे हैं. क्या ट्रंप इस डेडलाइन से पहले कोई रास्ता निकालेंगे या फिर अमेरिका एक ऐसे सैन्य अभियान में उलझ जाएगा, जिसे खुद उसका कानून ही इजाजत नहीं देता. यानी ट्रंप अपने ही देश का कानून तोडेंगे. जानें पूरा मामला.
1. क्या है 60 दिन का नियम और क्यों है 1 मई अहम?
अमेरिका में War Powers Resolution के तहत कोई भी राष्ट्रपति अगर बिना कांग्रेस की मंजूरी के सेना तैनात करता है, तो उसे 60 दिनों के भीतर या तो मंजूरी लेनी होती है या सेना वापस बुलानी होती है. Donald Trump ने 2 मार्च 2026 को कांग्रेस को औपचारिक सूचना दी थी, जिससे यह समय सीमा शुरू हुई और 1 मई इसकी अंतिम तारीख बन गई.
हालांकि, ट्रंप को 30 दिन का अतिरिक्त समय मिल सकता है, लेकिन वह केवल सैनिकों की सुरक्षित वापसी के लिए होता है, युद्ध जारी रखने के लिए नहीं. इसलिए 1 मई को अमेरिकी राजनीति में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, जहां से यह तय होगा कि यह सैन्य अभियान जारी रहेगा या डोनाल्ड ट्रंप कानूनी संकट में फंस जाएंगे.
2. अमेरिका-ईरान टकराव कितना बड़ा और खतरनाक?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका द्वारा Iran पर किए गए मिसाइल हमलों के बाद यह संघर्ष तेजी से बढ़ा. इसका मकसद ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना बताया गया, लेकिन जवाबी हमलों के बाद हालात युद्ध जैसे बन गए. अब तक लगभग 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें आम नागरिक और बच्चे भी शामिल हैं. ऊर्जा ढांचे को 50 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है और कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिका, यूरोप और एशिया तक ईंधन संकट और आर्थिक दबाव बढ़ गया है.
3. ट्रंप “युद्ध” शब्द से क्यों बच रहे हैं, मतलब क्या?
डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे टकराव को “युद्ध” कहने से परहेज किया है और इसे “सैन्य अभियान” बताया है. इसका सीधा कारण कानूनी है. अगर इसे औपचारिक युद्ध माना जाता है, तो कांग्रेस की मंजूरी जरूरी हो जाती है. ट्रंप का यह रुख दिखाता है कि वह कानूनी बाध्यता से बचने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन डेमोक्रेट्स इस दलील को नहीं मानते और उनका कहना है कि वास्तविकता में यह युद्ध ही है, इसलिए राष्ट्रपति को कानून के तहत जवाबदेह होना पड़ेगा. यही वजह है कि शब्दों की यह लड़ाई अब राजनीतिक और संवैधानिक संकट का रूप ले चुकी है.
4. अमेरिकी राजनीति में क्या चल रहा है - कौन किसके साथ?
इस मुद्दे पर अमेरिका के भीतर गहरी राजनीतिक खींचतान देखने को मिल रही है. Gregory Meeks जैसे डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि अगर यह युद्ध जरूरी है तो राष्ट्रपति को कांग्रेस से मंजूरी लेनी चाहिए. दूसरी तरफ, Mike Johnson जैसे रिपब्लिकन नेता ट्रंप के समर्थन में हैं और मानते हैं कि युद्ध के समय राष्ट्रपति के अधिकार सीमित नहीं किए जाने चाहिए.
जॉनसन के तर्क से सभी रिपब्लिकन एकमत नहीं हैं. Rand Paul जैसे नेता खुलकर विरोध कर चुके हैं और संकेत दे चुके हैं कि 60 दिन के बाद पार्टी के भीतर भी विरोध बढ़ सकता है. यानी 1 मई के बाद यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है.
5. ट्रंप के पास क्या विकल्प हैं, आगे क्या?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के पास 1 मई से पहले तीन मुख्य विकल्प हैं. इनमें :
- कांग्रेस से मंजूरी लेकर सैन्य अभियान जारी रखना.
- अमेरिकी सेना को वापस बुलाकर संघर्ष खत्म करना, जिससे Iran को रणनीतिक और नैतिक बढ़त मिल सकती है.
- सबसे संभावित रास्ता है Authorization for Use of Military Force (AUMF) की मांग करना, जो 2001 के बाद से कई सैन्य अभियानों में इस्तेमाल हो चुका है और इसके तहत बिना समय सीमा के कार्रवाई जारी रखी जा सकती है.
अगर इनमें से कोई भी रास्ता नहीं अपनाया जाता और युद्ध जारी रहता है, तो यह खुला कानून उल्लंघन माना जाएगा, जिससे ट्रंप पर इस्तीफे तक का दबाव बन सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अमेरिका की स्थिति कमजोर हो सकती है.
दरअसल, ट्रंप के सामने वॉर एक्ट के तहत 60 दिन की समयसीमा सिर्फ कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि वह डेडलाइन है जो तय करेगी कि अमेरिका कानून के भीतर रहकर आगे बढ़ता है या एक ऐसे संघर्ष में फंसता है, जिसे खुद उसका संविधान ही चुनौती देता है.
वॉर जारी रखने के लिए किससे लेनी होगी इजाजत?
अमेरिकी वॉर एक्ट के तहत ट्रंप को युद्ध या सैन्य कार्रवाई जारी रखने की औपचारिक मंजूरी दोनों सदनों United States House of Representatives और United States Senate से पास होनी होती है. इसके बाद ही इसे वैध रूप मिलता है. कांग्रेस के दोनों सदन इसे पास करेंगे. उसके बाद राष्ट्रपति उस पर साइन करेंगे. तभी वॉर जारी रखने की कानूनी मंजूरी मानी जाएगी. यानी Donald Trump युद्ध जारी रखना चाहते हैं, तो उन्हें पूरे United States Congress की मंजूरी लेनी होगी.




