महंगा होगा पेट्रोल-डीजल! होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए क्या है ईरान के सख्त नियम? जिनसे हिल गई दुनिया
ईरान ने अब होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल लेना का फैसला किया है. रिपोर्ट के मुताबिक Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम प्रस्तावित किए गए हैं
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एआई फोटो
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है. इस जंग के चलते ईरान द्वारा बंद किए गए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के कारण दुनियाभर में गैस और तेल को लेकर संकट पैदा हो गया है. अमेरिका बार-बार इसको लेकर ईरान को चेतावनी दे रहा है लेकिन ईरान होर्मुज खोलने के लिए तैयार नहीं है. बल्कि ईरान ने अब होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल लेना का फैसला किया है. इसको लेकर अब बड़ी जानकारी सामने आ रही है. Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम प्रस्तावित किए गए हैं, जिनके तहत उन्हें सुरक्षित मार्ग के बदले भारी भुगतान करना पड़ सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, यह राशि 2 मिलियन डॉलर तक हो सकती है और इसे चीनी युआन या क्रिप्टोकरेंसी में चुकाना होगा. हाल ही में ईरानी संसद द्वारा पारित एक विधेयक के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण और कड़ा होता दिखाई दे रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर गहरा असर पड़ सकता है.
होर्मुज से गुजरने के क्या हैं नए नियम?
Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नई प्रक्रिया के तहत जहाजों को गुप्त पहचान कोड का उपयोग करना होगा. साथ ही, उन्हें ईरान द्वारा निशाना बनाए जाने से बचने के लिए एक विशेष भुगतान व्यवस्था का पालन करना पड़ेगा. बताया जा रहा है कि टैंकर और कार्गो ऑपरेटरों को Islamic Revolutionary Guard Corps से जुड़ी एक कंपनी के माध्यम से भुगतान करना होगा, जिससे उन्हें सुरक्षित मार्ग मिल सके.
क्या होगा सीक्रेट सिगनल का काम?
नई व्यवस्था के अनुसार, जहाजों को किसी गैर-शत्रु देश के ध्वज के तहत संचालन करना होगा और एक सीक्रेट सिगनल संकेत प्रसारित करना होगा. इससे ईरानी नौसेना को संकेत मिल जाएगा कि संबंधित पोत को सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी गई है. इसके अलावा, जहाजों को अपने स्वामित्व, कार्गो, गंतव्य, चालक दल और स्वचालित पहचान प्रणाली (AIS) से जुड़ी पूरी जानकारी पहले ही साझा करनी होगी.
कितना शुल्क लेगा ईरान?
Islamic Revolutionary Guard Corps नौसेना इन सभी जानकारियों की जांच करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि संबंधित जहाजों का अमेरिका या इजरायल से कोई सीधा संबंध न हो. मंजूरी मिलने के बाद ही जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी, जिसके लिए ट्रांजिट शुल्क भी तय किया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, तेल टैंकरों के लिए यह शुल्क प्रति बैरल लगभग 1 डॉलर से शुरू हो सकता है.
क्या वैश्विक तेल आपूर्ति पर होगा असर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है. ऐसे में इन नए नियमों से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है. जिसके चलते पेट्रोल और डीजल के दामों पर भी असर पड़ सकता है.
ईरान ने International Maritime Organization को लिखे पत्र में इन नियमों का बचाव किया है. पत्र में कहा गया है "जलडमरूमध्य से सटे तटीय राज्य के रूप में, ईरान के इस्लामी गणराज्य ने अंतरराष्ट्रीय कानून के स्थापित सिद्धांतों और नियमों का पूरी तरह से पालन करते हुए, हमलावरों से संबंधित या उनसे जुड़े जहाजों के आवागमन को प्रतिबंधित कर दिया है."




