Trump की चेतावनी से भड़का Iran, बोला- दबाव में नहीं होगी बात; ‘नए पत्ते’ खोलने को तैयार, क्या इस्लामाबाद वार्ता पर मंडराया संकट?
ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत से पहले बड़ा बयान दिया है. संसद स्पीकर गालिबाफ का कहना है कि तेहरान प्रेशर में बातचीत नहीं करेगा. जानें पूरा मामला
Iran America Tension: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया है. ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर ग़ालिबाफ ने डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे धमकियों और सीजफायर उल्लंघन के जरिए कूटनीति को कमजोर कर रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि तेहरान दबाव में किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगा.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ग़ालिबाफ ने कहा कि अमेरिका बातचीत को “सरेंडर की टेबल” में बदलने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तनाव और बढ़ता है तो ईरान “जंग के मैदान में नए पत्ते खोलने” के लिए तैयार है.
ट्रंप ने क्या दी थी धमकी?
यह बयान उस समय आया जब ट्रंप ने 22 अप्रैल की समय सीमा से पहले कड़ा रुख अपनाया. PBS News से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर कोई समाधान नहीं निकलता है, तो “कई जगह बम धमाके शुरू हो जाएंगे.” इससे इस्लामाबाद में होने वाली अगली वार्ता के महत्व और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं है कि ईरान बातचीत में शामिल होगा या नहीं. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने शामिल होने पर सहमति जताई थी, लेकिन तेहरान की भागीदारी तय नहीं है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल हर हाल में जाएगा, जिससे यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन या तो बातचीत जारी रखेगा या फिर रास्ता बदल सकता है.
यह टकराव ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज में जारी मुश्किलों के बीच हो रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है. हालांकि अस्थायी युद्धविराम से सीधी लड़ाई रुकी हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी बना हुआ है.
क्या पाकिस्तान जाएगा ईरान?
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, तेहरान इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में शामिल न होने का फैसला कर सकता है. इसका कारण अमेरिका की ज्यादा मांगें और बदलते रुख को बताया गया है.
ईरान के विदेश मंत्री ने ट्रंप पर क्या कहा?
ईरान ने मौजूदा कूटनीतिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के साथ बातचीत में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका की “उकसाने वाली कार्रवाइयां और बार-बार सीजफायर उल्लंघन” बड़ी बाधा बने हुए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है और अमेरिकी रुख लगातार विरोधाभासी बना हुआ है. अराघची ने कहा कि तेहरान आगे की रणनीति तय करने से पहले सभी पहलुओं की समीक्षा करेगा, लेकिन इस्लामाबाद वार्ता में शामिल होने की पुष्टि नहीं की.
ईरान के राष्ट्रपति ने क्या कहा?
इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी अमेरिका के दबाव के खिलाफ सख्त रुख दोहराया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास सार्थक बातचीत में बड़ी बाधा है.
X पर किए गए अपने पोस्ट में पेजेशकियन ने कहा कि किसी भी बातचीत के लिए वादों का पालन जरूरी है, लेकिन अमेरिका हाल के दिनों में विरोधाभासी और गैर-रचनात्मक संकेत दे रहा है. उन्होंने इसे ईरान को झुकाने की कोशिश बताया, जिसे उन्होंने पूरी तरह खारिज किया.
उन्होंने कहा कि किसी भी सार्थक बातचीत की नींव वादों को निभाने पर टिकी होती है और अमेरिका के प्रति अविश्वास ईरान की राजनीति में गहराई से मौजूद है. पेजेशकियन ने यह भी कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के हालिया बयान और कदम यह संकेत देते हैं कि वे ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा संभव नहीं है.
क्या दोबारा शुरू हो जाएगी जंग?
उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरानी जनता किसी भी दबाव के आगे झुकेगी नहीं. सीजफायर की समय सीमा करीब आने के साथ दोनों देश एक तनावपूर्ण स्थिति में फंसे हुए हैं, जिससे आशंका बढ़ गई है कि अगर कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो फिर से संघर्ष शुरू हो सकता है.




