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वैशाख शुक्ल सप्तमी पर गंगा पूजन का महत्व, जानिए स्नान, और दान के लाभ

वैशाख शुक्ल सप्तमी का दिन गंगा पूजन के रूप में बेहद पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन गंगा पूजन और स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

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गंगा पूजन का महत्व

( Image Source:  AI SORA )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro2 Mins Read

Updated on: 21 April 2026 7:30 AM IST

हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी का पवित्र पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से अवतरित होकर भगवान शिव की जटाओं में विराजमान हुई थीं. यही कारण है कि इस तिथि को गंगा जयंती भी कहा जाता है.

इस वर्ष सप्तमी तिथि का आरंभ 22 अप्रैल को रात 10:50 बजे होगा और समापन 23 अप्रैल को रात 8:50 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार यह पर्व 23 अप्रैल को मनाया जाएगा.

गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व

गंगा सप्तमी का दिन मां गंगा के पुनः प्रकट होने का प्रतीक माना जाता है. इस दिन गंगा पूजन, स्नान और दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही यह भी मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्य कई जन्मों तक शुभ फल प्रदान करते हैं. मां गंगा को पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी आराधना विशेष फलदायी होती है.

पुण्य और प्रभाव

धार्मिक शास्त्रों में वर्णित है कि गंगा में स्नान करने से सभी पापों का क्षय होता है और आत्मा शुद्ध होती है. यह स्नान मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है. यदि किसी कारणवश गंगा नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी समान पुण्यदायी माना गया है. गंगा जल के स्पर्श मात्र से तन और मन की पवित्रता बढ़ती है.

गंगा जी की पौराणिक उत्पत्ति

पौराणिक कथा के अनुसार, मां गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ था. वामन अवतार के समय जब ब्रह्माजी ने भगवान विष्णु के चरणों का अभिषेक किया, तब उस जल से गंगा का प्राकट्य हुआ. इसके बाद यह दिव्य धारा भगवान शिव की जटाओं में समाहित हो गई और वहीं से पृथ्वी पर प्रवाहित होकर जन-कल्याण का कारण बनी.

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