Kuwait को प्यासा मारने का प्लान! Iran ने desalination प्लांट पर बरसाए बम, क्या है इसके पीछे मंशा?
ईरान ने कुवैत के desalination प्लांट पर हमला किया है. ये प्लांट खारे पानी को मीठा बनाने का काम करता है. इस अटैक में एक भारतीय शख्स की भी मौत हुई है.
Iran Attack on Desalination Plant: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कुवैत से एक बड़ी खबर सामने आई है. कुवैती अधिकारियों के मुताबिक, ईरान की ओर से किए गए हमले में एक बिजली और पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट को निशाना बनाया गया, जिसमें एक भारतीय कर्मचारी की मौत हो गई और इमारत को भारी नुकसान पहुंचा.
कुवैत के बिजली मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि यह हमला “ईरान की आक्रामक कार्रवाई” का हिस्सा था. बयान के अनुसार, प्लांट की एक सर्विस बिल्डिंग पर हमला हुआ, जिससे एक भारतीय कामगार की जान चली गई और भवन को गंभीर क्षति पहुंची.
क्या चलता रहेगा प्लांट?
घटना के तुरंत बाद तकनीकी और इमरजेंसी टीमों को मौके पर भेजा गया, ताकि हालात को संभाला जा सके और प्लांट का काम सामान्य रूप से जारी रखा जा सके. इस हमले को लेकर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने कुवैत के मंत्रालय के हवाले से प्लांट को हुए बड़े नुकसान का जिक्र किया है.
कितने जरूरी हैं पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट?
कुवैत में मीठे पानी का कोई बड़ा स्रोत नहीं है जो देश के लोगों को पानी मुहैया करा सके. ऐसे में समुंद्र के पानी को मीठा बनाकर देश भर को दिया जाता है. ऐसे में इन प्लांट्स पर हमला कुवैत को एक बड़ा नुकसान देगा.
क्या है ईरान की मंशा?
पानी की किल्लत जनका में आक्रोश पैदा कर सकती है. इसके साथ ही सरकार पर भी प्रेशर बना सकती है कि वह अपने देश में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री ठिकानों को उखाड़ फेंके और उन्हें वापस अपने देश जाने के लिए कहे.
कुवैत सिटी से रिपोर्टिंग करते हुए बताया गया कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के शुरू होने के बाद से कुवैत पर बार-बार हमले हो रहे हैं. हाल ही में कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि उसके हवाई क्षेत्र में 14 मिसाइल और 12 ड्रोन देखे गए, जिनमें से कुछ एक सैन्य कैंप को निशाना बना रहे थे. इस हमले में 10 सैनिक घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया गया.
ईरान में कितने लोगों की मौत हुई है?
दरअसल, ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, कई वरिष्ठ अधिकारी और कम से कम 216 बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा कई अहम ढांचों को भी नुकसान पहुंचा है.
इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और उन क्षेत्रीय देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. इन हमलों में भी जान-माल का नुकसान हुआ है और बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर क्या है अपडेट?
इसी बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है. यह दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और एलएनजी की सप्लाई गुजरती है. इसके चलते ऊर्जा कीमतों में उछाल आया है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है.
पिछले हफ्ते अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों को 10 दिनों के लिए, यानी 6 अप्रैल तक टाल रहे हैं. वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया तो वह खाड़ी क्षेत्र के अन्य ऊर्जा ठिकानों पर जवाबी हमले करेगा.
इस पूरे संघर्ष ने एक और गंभीर चिंता को उजागर किया है—पानी से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की सुरक्षा. मध्य पूर्व पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहा है, ऐसे में इस तरह के हमले हालात को और गंभीर बना सकते हैं.




