पहले यार फिर यलगार! कैसे बन गए Imran Khan और Qamar Javed Bajwa जानी दुश्मन? तीन साल में इंसान से जानवर बनने वाली कहानी
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और कमर बाजवा के बीच सरकारी की शुरुआत में अच्छी दोस्ती थी, लेकिन धीरे-धीरे ये दुश्मनी में बदल गई. इमरान खान ने बाजवा पर कई गंभीर इल्जाम लगाए.
Imran Khan and Bajwa Controversy: पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा की 65 साल की उम्र में मौत हो गई है. वह बाथरूम में चोट लगने की वजह से अस्पताल में भर्ती हुए थे, और कई हफ्तों से उनका इलाज चल रहा था. बाजवा 2016 से 2022 तक पाकिस्तान के सेना प्रमुख रहे और रिटायरमेंट के बाद भी देश की राजनीति और सुरक्षा मामलों में प्रभावशाली माने जाते थे.
अपने कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान ने इमरान खान और उनकी बेहतरीन दोस्ती को दुश्मनी में बदलते हुए देखा. पाकिस्तान की राजनीति में Imran Khan और Qamar Javed Bajwa के रिश्ते का सफर एक ऐसी कहानी है, जिसमें दोस्ती, भरोसा, टकराव और आखिरकार कड़वी दुश्मनी के सभी रंग देखने को मिलते हैं. कभी एक-दूसरे के सबसे बड़े समर्थक रहे ये दोनों नेता वक्त के साथ एक दूसरे के कड़े विरोधी बन गए थे.
कैसे थे जनरल बाजवा और इमरान खान के रिश्ते?
शुरुआती दौर में इमरान खान और जनरल बाजवा के रिश्ते बेहद मजबूत माने जाते थे. 2018 में जब इमरान खान सत्ता में आए, तो आम धारणा यही थी कि सेना और सरकार एक ही दिशा में काम कर रहे हैं और इस राजनीतिक उभार में बाजवा की अहम भूमिका रही. खुद इमरान खान ने भी कई मौकों पर यह कहा कि उनका और बाजवा का विजन एक जैसा है और दोनों मिलकर 'नया पाकिस्तान' बनाना चाहते हैं. यही वजह थी कि अगस्त 2019 में इमरान खान ने क्षेत्रीय सुरक्षा हालात का हवाला देते हुए बाजवा को तीन साल का कार्यकाल विस्तार भी दिया था.
इससे पहले, 2010 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने जनरल अशफाक परवेज कयानी को एक्सटेंशन दिया था, तब इमरान खान ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि संस्थाओं को मजबूत करने के लिए व्यक्तियों को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए. लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने खुद वही कदम उठाया, जो बाद में उनके आलोचकों के निशाने पर भी रहा.
कैसे दोनों के रिश्तों में तीन ही सालों में आने लगी दरार?
वक्त के साथ दोनों के रिश्ते में दरार आने लगी. खासकर सेना में नियुक्तियों और नीतिगत मुद्दों को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़ते गए. अप्रैल 2022 में जब इमरान खान की सरकार अविश्वास प्रस्ताव के जरिए गिर गई, तो इस रिश्ते का पूरी तरह से अंत हो गया. इसके बाद इमरान खान ने खुलकर बाजवा पर गंभीर आरोप लगाए. दोनों के रिश्तों के बीच खटास पहले ही आने शुरू हो गई थी.
क्या था इमरान का जानवर न्यूट्रल वाला बयान?
मार्च 2022 में Imran Khan ने लोअर दिर जिले के बलामबत इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि जानवर अच्छे और बुरे में फर्क नहीं कर सकते. उन्होंने कहा था कि इंसान अपने ज़मीर के हिसाब से काम करता है और केवल जानवर ही न्यूट्रल रहते हैं. उनका ये बयान ऐसे वक्त पर आया था जब Pakistan Army ने जनरल Qamar Javed Bajwa के नेतृत्व में यह ऐलान किया था वह “न्यूट्रल” रहेगी और राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करेगी. यह फैसला इमरान खान की सरकार को पहले मिलने वाले समर्थन से एकदम अलग माना गया.
आईएसआई हेड को लेकर क्या हुआ था बवाल?
पाकिस्तान की सत्ता के दो सबसे ताकतवर चेहरे Imran Khan और Qamar Javed Bajwa के बीच टकराव उस समय खुलकर सामने आया था, जब खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (आईएसआई) के नए प्रमुख की नियुक्ति का मुद्दा गरमा गया. सरकार ने शुरुआत में बाजवा के करीबी माने जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अहमद अंजुम को आईएसआई चीफ बनाने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद विवाद थमा नहीं. कई दिनों तक असहमति और खींचतान चलती रही, जिससे देश में राजनीतिक अनिश्चितता और गहराती गई. आखिरकार, इमरान खान को अंजुम की नियुक्ति पर सहमत होना पड़ा.
दरअसल, इमरान खान की पहली पसंद पूर्व आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल Faiz Hameed थे. वे चाहते थे कि फैज हमीद को ही सेवा विस्तार दिया जाए. माना जाता है कि 2018 के चुनाव में इमरान खान की जीत के पीछे फैज हमीद की अहम भूमिका थी. इसके अलावा, अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा.
इमरान ने क्या लगाए इल्जाम?
नवंबर 2022 में बाजवा रिटायरमेंट के बाद दिए गए एक इंटरव्यू में इमरान खान ने कहा कि उन्हें बाजवा पर भरोसा करने का अफसोस है और यह उनकी बड़ी गलती थी. उन्होंने आरोप लगाया कि बाजवा ने उनकी सरकार के खिलाफ 'डबल गेम' खेला. इसके बाद लाहौर से राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने कहा कि बाजवा ने जो पाकिस्तान के साथ किया, वैसा दुश्मन भी नहीं करता.
इमरान खान ने यह भी आरोप लगाया कि बाजवा ने उनकी सरकार गिराने में भूमिका निभाई और Shehbaz Sharif के नेतृत्व वाली सरकार, खासकर शरीफ परिवार का समर्थन किया. जनवरी 2023 में उन्होंने यह तक कहा कि प्रधानमंत्री रहते हुए उनकी हत्या की साजिश रची गई थी, ताकि देश में इमरजेंसी लगाई जा सके.
विदेश नीति पर बाजवा के रुख से क्यों थे नाराज इमरान खान?
विदेश नीति को लेकर भी दोनों के बीच गंभीर मतभेद सामने आए. इमरान खान का दावा था कि बाजवा अमेरिका के प्रति झुकाव रखने वाली नीति को आगे बढ़ा रहे थे और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पाकिस्तान को पश्चिमी देशों के करीब लाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाजवा ने अमेरिका को यह संदेश दिया कि इमरान खान एंटी-अमेरिका हैं, जिससे उनकी सरकार गिराने का माहौल बना.
इमरान खान ने खुद को एक 'पपेट' यानी कठपुतली तक बताया और कहा कि असली ताकत सेना प्रमुख के पास थी, जो अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और राजनीति तक में दखल रखते थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन पर भारत के साथ संबंध सुधारने और अन्य नीतिगत बदलावों के लिए दबाव डाला गया.
क्या बाजवा के खिलाफ इमरान ने करवाई थी जांच?
दिलचस्प बात यह है कि जिस बाजवा को उन्होंने सत्ता में रहते हुए एक्सटेंशन दिया था, उसी के खिलाफ बाद में उन्होंने जांच की मांग भी की. कई पत्रकारों और विश्लेषकों ने इस रिश्ते को बेहद नाटकीय बताया है.
डॉन के यूट्यूब शो ‘जरा हट के’ में पत्रकारों ने इसे “इंसानी तारीख का सबसे खराब ब्रेकअप” तक कहा. उनका मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम से एक बड़ा सबक मिलता है कि जब राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच टकराव होता है, तो अंत में नुकसान देश को ही उठाना पड़ता है.




