1100 से ज्यादा फर्जी बम धमकियां देने वाला बेरोजगार श्रीनिवास लुईस कौन? दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है जिसने भारत में 1100 से ज्यादा फर्जी बम धमकियां भेजकर दहशत फैलाई है.
फर्जी बम धमकियां देने वाला श्रीनिवास लुईस
भारत में लगातार स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकियां बढ़ती जा रही है. जिसको लेकर भारतीय एजेंसिया और पुलिस प्रशासन लगातार अलर्ट पर भी है. ईमेल के जरिए ये सब धमकियां मिलती रही है. वहीं अब इसको लेकर दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है जिसने भारत में 1100 से ज्यादा फर्जी बम धमकियां भेजकर दहशत फैलाई है.
दिल्ली पुलिस ने आरोपी श्रीनिवास लुईस को उसके किराए के मकान से गिरफ्तार किया है. अब हर कोई श्रीनिवास लुईस के बारे में जानना चाहता है कि आखिर ये है कौन और उसने ये सब क्यों किया है?
कौन है श्रीनिवास लुईस?
जानकारी के मुताबिक आरोपी श्रीनिवास लुईस बेंगलुरु के मूल निवासी हैं. वह मास्टर डिग्री करने के बाद से बेरोजगार भी है. श्रीनिवास अपनी मां के साथ किराए के मकान में रहता था. उसकी मां रिटायर सरकारी कर्मचारी हैं. जांच में ये संकेत मिला है कि श्रीनिवास लुईस मानसिक परेशानी से पीड़ित हो सकता है. एक अधिकारी ने कहा “उसने जानबूझकर अदालतों और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाया ताकि दहशत को अधिकतम किया जा सके.”
कहां से किया गया गिरफ्तार?
श्रीनिवास को मैसूरु से गिरफ्तार कर दिल्ली लाया गया. पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर देशभर में 1,100 से अधिक धमकी भरे संदेश भेजने की बात कबूल की. उसके पास से लैपटॉप और कई सिम कार्ड बरामद किए गए हैं. पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि धमकियों का पूरा नेटवर्क समझा जा सके. एक अधिकारी ने कहा “दिल्ली पहुंचने और विस्तृत पूछताछ के बाद ही असली मकसद का पता चलेगा. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या उसने अकेले ही यह कृत्य किया या उसके साथ कोई और भी शामिल था.”
अब तक कितनी धमकियां?
जांच में पता चला कि मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच देशभर में स्कूलों को लगभग 600-700 फर्जी बम धमकियां मिलीं. अकेले दिल्ली-एनसीआर में 500 से अधिक धमकियां दर्ज हुईं.
सितंबर 2025 में दिल्ली के 300 से अधिक स्कूलों को एक ही दिन में धमकियां मिलीं. दिसंबर 2025 में भी ऐसी घटनाओं तेजी देखी गई. दिल्ली हाई कोर्ट, विधानसभा और अन्य शैक्षणिक और सरकारी संस्थानों को ईमेल और अन्य माध्यमों से धमकियां भेजी गईं, जिसके कारण कई जगह एफआईआर दर्ज की गईं.




