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सूअर के सीमेन से बनी आई ड्रॉप! आंखों के कैंसर पर बड़ी खोज; जानिए कैसा करेगा काम?

आंखों के कैंसर के इलाज में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है, जहां सूअर के वीर्य से बनी आई ड्रॉप ने चूहों में ट्यूमर की बढ़ोतरी रोक दी. यह तकनीक भविष्य में बच्चों और बड़ों दोनों के लिए सुरक्षित इलाज का विकल्प बन सकती है.

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Pig semen eye drops
( Image Source:  AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Published on: 30 March 2026 10:33 AM

कैंसर आज भी दुनिया की सबसे खतरनाक और जटिल बीमारियों में से एक है. इसके इलाज की पूरी गारंटी अभी भी नहीं दी जा सकती. खासकर आंखों का कैंसर और भी ज्यादा मुश्किल माना जाता है. यह कैंसर आंखों के आसपास की कोशिकाओं में शुरू होता है और धीरे-धीरे बढ़ता जाता है. लेकिन अब इस दिशा में वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है, जिससे मरीजों को नई उम्मीद जगी है.

एक नई रिसर्च के अनुसार, वैज्ञानिकों ने सूअर के वीर्य (semen) से एक खास तरह की आई ड्रॉप तैयार की है. यह आई ड्रॉप आंखों के ट्यूमर को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकती है. इससे आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है. यह दवा अभी तक चूहों पर आजमाई गई है और इसमें अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं.

बच्चों के आंखों के कैंसर में भी हो सकता है फायदा

यह नई दवा बच्चों में होने वाले एक खास तरह के आंखों के कैंसर यानी रेटिनोब्लास्टोमा के इलाज में भी इस्तेमाल की जा सकती है. आमतौर पर आंखों के कैंसर का इलाज इंजेक्शन, कीमोथेरपी, लेजर थेरेपी या सर्जरी से किया जाता है. लेकिन इन इलाजों के कई नुकसान भी हैं. नई रिसर्च में बताया गया है कि सूअर के वीर्य से बनी यह आई ड्रॉप आंख के रेटिना (जो आंख का सबसे पिछला और महत्वपूर्ण हिस्सा है) तक आसानी से पहुंच जाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखा है.

पुराने इलाजों के साइड इफेक्ट्स

आंखों के कैंसर का इलाज करते समय लेजर थेरेपी या कीमोथेरपी का इस्तेमाल किया जाए तो अक्सर आंख के स्वस्थ हिस्सों को भी नुकसान पहुंचता है. इससे आंखों की रोशनी कम हो सकती है या पूरी तरह चली भी जा सकती है. यही वजह है कि वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसी दवा ढूंढ रहे थे जो आंख के अंदरूनी हिस्से तक पहुंचे, लेकिन बाकी स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान न पहुंचाए. चीन की एक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने इस दिशा में काम किया है. उन्होंने दावा किया है कि सूअर के वीर्य से बनी यह आई ड्रॉप ठीक वैसा ही काम करती है जिसकी जरूरत थी.

यह आई ड्रॉप कैसे काम करती है?

इस आई ड्रॉप में एक्जोसोम नामक छोटे-छोटे कण होते हैं. ये एक्जोसोम कैंसर को मारने वाले दवाओं के अणुओं को अपने साथ लेकर आंख के अंदर गहराई तक ले जाते हैं. चूहों पर किए गए प्रयोगों में यह देखा गया कि इस ड्रॉप से ट्यूमर की बढ़ोतरी रुक गई. इससे ट्यूमर का आकार बढ़ने से रोका जा सका. यह तरीका सिर्फ आंखों के कैंसर तक ही सीमित नहीं है. रिसर्चर्स का मानना है कि इसी तकनीक का इस्तेमाल अल्जाइमर जैसी दिमाग की बीमारी के इलाज में भी किया जा सकता है. अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है और सोचने-समझने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म होने लगती है.

अभी कहां तक पहुंची है यह रिसर्च?

अभी यह दवा सिर्फ चूहों पर सफल रही है। इसे इंसानों पर आजमाने के लिए अभी और ज्यादा रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल्स की जरूरत है. अगर यह दवा इंसानों पर भी सुरक्षित और असरदार साबित हुई, तो आंखों के कैंसर के इलाज में एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है. मरीजों को बिना साइड इफेक्ट के बेहतर इलाज मिल सकेगा और उनकी आंखों की रोशनी भी बचाई जा सकेगी. यह खोज मेडिकल साइंस के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि प्रकृति में उपलब्ध चीजों (जैसे पशुओं के वीर्य) से भी हम नई दवाएं बना सकते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे और शोध से यह दवा बच्चों और बड़ों दोनों के लिए आंखों के कैंसर का सुरक्षित और आसान इलाज बन सकती है.

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