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क्या Iran में 8 महिलाओं को दी जा रही थी फांसी, ट्रंप के दावे के बीच क्या है सच?

ईरान ने आठ महिलाओं को फांसी दिए जाने की खबरों को खारिज किया, जबकि ट्रंप ने उनकी रिहाई की अपील की थी. आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला

क्या Iran में 8 महिलाओं को दी जा रही थी फांसी, ट्रंप के दावे के बीच क्या है सच?
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( Image Source:  X-@ANI and @WhiteHouse )

Iran News: ईरान की न्यायपालिका ने मंगलवार को इन खबरों को खारिज कर दिया कि इस साल हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार की गई आठ महिलाओं को फांसी दी जा सकती है. यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन महिलाओं की रिहाई की अपील करते हुए कहा था कि इससे बातचीत में ईरान को फायदा हो सकता है.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जनवरी में हुए प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार कम से कम एक महिला को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि एक अन्य महिला पर ऐसे आरोप लगे हैं जिनमें फांसी की सजा हो सकती है.

ईरान की न्यायपालिका ने क्या कहा?

ईरान की न्यायपालिका की आधिकारिक वेबसाइट मिज़ान ऑनलाइन ने कहा, “ट्रंप एक बार फिर फर्जी खबरों से गुमराह हुए हैं. जिन महिलाओं को फांसी के करीब बताया जा रहा था, उनमें से कुछ को रिहा कर दिया गया है, जबकि बाकी पर ऐसे आरोप हैं जिनमें दोषी पाए जाने पर अधिकतम सजा जेल हो सकती है.”

ट्रंप ने पोस्ट शेयर क्या कहा था?

इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि इन महिलाओं की रिहाई से ईरान को बातचीत में मदद मिल सकती है. उन्होंने एक एक्टिविस्ट के दावे को शेयर किया था, जिसमें कहा गया था कि आठ महिलाओं को फांसी दी जा सकती है, हालांकि उस दावे में नाम नहीं थे, सिर्फ तस्वीरें साझा की गई थीं. ट्रंप ने लिखा, “मैं इन महिलाओं की रिहाई की सराहना करूंगा.”

एक्टिविस्ट ने क्या पोस्ट किया था?

अमेरिका में रह रहीं ईरानी एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद ने अपने एक्स (X) अकाउंट पर इन आठों महिलाओं के नाम साझा किए. ये सभी जनवरी में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में गिरफ्तार की गई थीं. एक्टिविस्ट्स का कहना है कि इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया गया, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई. अलीनेजाद ने “उनके नाम लो” कहते हुए दावा किया कि इनमें से एक लड़की की उम्र सिर्फ 16 साल है.

इन महिलाओं में से एक बीता हेम्मती है, जिसे उसके पति समेत तीन अन्य पुरुषों के साथ मौत की सजा सुनाई गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन पर तेहरान में एक रिहायशी इमारत से सुरक्षा बलों पर कंक्रीट ब्लॉक फेंकने का आरोप है.

तस्वीरों में शामिल महिला कौन हैं?

अमेरिका स्थित अब्दोर्रहमान बोरूमंद सेंटर का कहना है कि बीता हेम्मती वही महिला हो सकती है, जिसे जनवरी में सरकारी टीवी पर प्रसारित एक वीडियो में न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी एजई द्वारा पूछताछ करते दिखाया गया था.

तस्वीरों में शामिल एक अन्य महिला महबूबेह शबानी (32) है. नॉर्वे स्थित हेंगाव मानवाधिकार समूह के अनुसार, उस पर “खुदा के खिलाफ जंग छेड़ने” का आरोप लगाया गया है. आरोप है कि उसने मशहद शहर में घायल प्रदर्शनकारियों को अपनी मोटरसाइकिल से पहुंचाने में मदद की. फिलहाल वह मशहद की वकीलाबाद जेल के महिला वार्ड में बंद है. हेंगाव ने इस मामले में उसे मौत की सजा दिए जाने के खतरे पर गहरी चिंता जताई है.

नॉर्वे स्थित ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ और पेरिस स्थित ‘टुगेदर अगेंस्ट द डेथ पेनल्टी’ की संयुक्त वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ईरान में कम से कम 1,639 लोगों को फांसी दी गई, जिनमें 48 महिलाएं शामिल हैं.

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ईरान सरकार समाज में डर पैदा करने के लिए मौत की सजा का इस्तेमाल कर रही है और अमेरिका व इजरायल के साथ तनाव के बीच राजनीतिक कैदियों की फांसी के मामलों में तेजी आई है.

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