कभी करता था टॉयलेट साफ़, आज करा रहा US-Iran में मांडवाली, कैसे बढ़ाई America में Pak की हैसियत? समझिए Crypto Bro की Bitcoin Diplomacy
Bilal Bin Saqib जिन्हें क्रिप्टो ब्रो के नाम से जाना जाता है कॉलेज टाइम में टॉइलेट साफ करने का काम करते थे. आज वही सक़िब अमेरिका में पाकिस्तान की हैसियत बढ़ा रहे हैं.
Crypto Bro: पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ अपने संबंध मजबूत करने के लिए अब क्रिप्टोकरेंसी को एक नए कूटनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीति में 35 वर्षीय सलाहकार Bilal Bin Saqib की अहम भूमिका रही है. उनके जरिए पाकिस्तान ने न सिर्फ अमेरिकी नेताओं से जुड़े लोगों तक पहुंच बनाई, बल्कि व्यापार, खनिज और क्षेत्रीय कूटनीति जैसे मुद्दों पर बातचीत के नए रास्ते भी खोले.
35 साल के Bilal Bin Saqib खुद को “क्रिप्टो ब्रो” बताते हैं. उनका कहना है कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्होंने एक साथ तीन नौकरियां कीं, जिनमें टॉयलेट साफ करने का काम भी शामिल था. आज वह इस मुकाम पर पहुंच गए हैं कि ईरान अमेरिका और ईरान में भी मांडवाली करा रहे हैं.
बिलाल बिन साकिब कौन हैं?
Bilal Bin Saqib पिछले साल ही अचानक पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हुए हैं. उन्होंने क्रिप्टो दुनिया के बड़े नामों से करीबी रिश्ते बनाए, जिनमें Changpeng Zhao (सीजेड) भी शामिल हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज Binance Holdings Ltd. के अरबपति संस्थापक हैं.
इसके अलावा, साकिब ने Cathie Wood, Michael Saylor और Nayib Bukele जैसे वैश्विक हस्तियों से भी संपर्क स्थापित किया. साकिब का सबसे अहम कदम तब सामने आया, जब उन्हें World Liberty Financial में सलाहकार नियुक्त किया गया. हालांकि, बाद में सरकारी सेवा में शामिल होने के बाद उन्होंने यह पद छोड़ दिया. हाल ही में, उन्होंने Mar-a-Lago में Zachary Witkoff और कंपनी के अन्य अधिकारियों के साथ ली गई एक सेल्फी भी सोशल मीडिया पर साझा की, जिसने काफी ध्यान खींचा.
पाकिस्तान ने कैसे बनाई मजबूत पकड़?
ब्लूमबर्ग का कहना है कि इस पहल के जरिए पाकिस्तान ने Donald Trump से जुड़े क्रिप्टो नेटवर्क में अपनी पकड़ मजबूत की और वॉशिंगटन में अपनी मौजूदगी भी बढ़ाई. बिलाल बिन साकिब ने इस दौरे को पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाला कदम बताया. उनका कहना है कि क्रिप्टो ने नई बातचीत के रास्ते खोले और अमेरिकी पक्ष के साथ भरोसा बनाने में मदद की.
साकिब ने कैसे बढ़ाई अमेरिका में पाक की हैसियत?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मार्च 2025 में सरकारी सिस्टम में शामिल होने के बाद साकिब का प्रभाव तेजी से बढ़ा. उन्होंने Changpeng Zhao को पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल में रणनीतिक सलाहकार के रूप में जोड़ने में भूमिका निभाई. इसके अलावा उन्होंने इस्लामाबाद में World Liberty Financial के अधिकारियों की मेजबानी की, जहां स्टेबलकॉइन अपनाने को लेकर एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए.
साकिब बाद में Mar-a-Lago में ज़ैकरी विटकॉफ के साथ नजर आए और लास वेगास में बिटकॉइन सम्मेलन में भी ट्रंप से जुड़े लोगों के साथ शामिल हुए. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने व्हाइट हाउस के डिजिटल एसेट अधिकारियों से मुलाकात की और वॉशिंगटन में पाकिस्तान के व्यापार प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा रहे. इस दौरान उन्होंने व्यापार ढांचे के कुछ हिस्सों में योगदान भी दिया.
अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए क्या कदम उठाए?
ब्लूमबर्ग के अनुसार, पाकिस्तान की यह क्रिप्टो रणनीति केवल तकनीकी नहीं, बल्कि आर्थिक और कूटनीतिक बातचीत से भी जुड़ी हुई है. अमेरिका ने बाद में पाकिस्तानी उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 19% कर दिया, वहीं बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया.
पाकिस्तान में क्रिप्टो ट्रेडिंग का क्या है आंकड़ा?
क्षेत्रीय तनाव के बीच पाकिस्तान को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित मध्यस्थ के रूप में भी देखा जा रहा है. दूसरी ओर, देश में क्रिप्टो का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. पाकिस्तान में करीब 4 करोड़ यूजर्स और 300 अरब डॉलर से अधिक के अनुमानित ट्रेडिंग होती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Donald Trump से जुड़े कारोबारी समूह पाकिस्तान के डिजिटल फाइनेंस सेक्टर में रुचि दिखा रहे हैं.




