पाकिस्तान में क्यों है इतना पिछड़ापन, क्या अंग्रेजों से जुड़ा ये कनेक्शन है वजह?
पाकिस्तान में विकास की रफ्तार धीमी नहीं बल्कि है ही नहीं. इस मुल्क के पिछड़ेपन का कारण पढ़ाई से दूरी बनाना था. दरअसल मुस्लिम लोगों ने बंटवारे के समय अंग्रेजी शिक्षा से इनकार कर दिया था.
पाकिस्तान के पिछड़ेपन का कारण
पाकिस्तान की हालत दुनिया से छिपी नहीं है. पाई-पाई को मोहताज यह देश डेवलपमेंट के मामले में पिछड़ा हुआ है. अक्सर लोगों के जहन में यह सवाल आता है कि आखिर इस मुल्क की यह स्थिती कैसे हुई? इसके पीछे कई ऐतिहासिक, राजनीतिक कारण जुड़े हैं.
इस मुद्दे पर आचार्य प्रशांत ने ब्रिटिश काल और शिक्षा व्यवस्था को एक अहम कारण बताया है. उन्होंने एक वीडियो में बताया कि कैसे मुसलमानों ने अंग्रेजी शिक्षा से इनकार कर दिया था, जिसका खामियाजा आज यह देश झेल रहा है.
पाकिस्तान के पिछड़पन की क्या है वजह?
आचार्य प्रशांत ने बताया कि अंग्रेजों ने जब भारत में यूनिवर्सिटीज की शुरुआत की, तो सबसे पहले कलकत्ता, मद्रास और लाहौर में संस्थान स्थापित किए गए. उस समय मुस्लिम समाज के एक बड़े हिस्से ने अंग्रेजी शिक्षा को अपनाने से इनकार कर दिया, क्योंकि उन्हें लगता था कि मुसलमानों को ही तो हराकर अंग्रेजों ने हिंदुस्तान लूटा है.
जब बड़े पदों पर बैठे कम पढ़े-लिखे लोग
जब 1947 में बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना, तब वहां की यूनिवर्सिटीज में उच्च पदों पर अधिकतर हिंदू थे. बंटवारे के बाद जब ये लोग भारत आ गए, तो वहां नेतृत्व का अभाव पैदा हो गया. इस वजह से कम अनुभवी लोग ऊंचे पदों पर पहुंचे और शिक्षा व्यवस्था कमजोर होती चली गई.
पाकिस्तान में शिक्षा के क्या हैं हालात?
- UNICEF की रिपोर्ट के मुताबिक,आज के समय में पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है. देश में लगभग 25 मिलियन (करीब 2.5 करोड़) बच्चे स्कूल से बाहर हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा आंकड़ों में से एक है.
- 5वीं कक्षा के आधे से ज्यादा बच्चे 2वीं कक्षा का पाठ ठीक से नहीं पढ़ पाते.
- लगभग 64% बच्चे बेसिक गणित भी सही से नहीं कर पाते.
- कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है. करीब 41% स्कूलों में शौचालय नहीं हैं और 46% में साफ पानी की सुविधा नहीं है.
- लगभग 40% प्राइमरी टीचर्स के पास औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है.
- ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की शिक्षा की स्थिति और भी खराब है, जहां सेकेंडरी स्तर पर उनका एडमिशन बहुत कम है. इन आंकड़ों से साफ है कि पाकिस्तान में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों ही बड़े मुद्दे हैं.
कौन हैं आचार्य प्रशांत?
आचार्य प्रशांत त्रिपाठी एक फेमस भारतीय आध्यात्मिक गुरु, लेखक और फिलॉसफर हैं. उन्होंने IIT Delhi से बीटेक और IIM Ahmedabad से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है. उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा भी पास की थी, लेकिन नौकरी करने की बजाय आध्यात्मिक रास्ता चुना. आज वह गीता और उपनिषदों पर आधारित सेशन लेते हैं और समाज, शिक्षा और जीवन से जुड़े विषयों पर अपने विचार शेयर करते हैं.




