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Missile From Space: इसी हथियार ने ली खामेनेई की जान, क्या है Blue Sparrow जो जमीन के नीचे घुसकर करता है वार?

Iran-Israel War: तेहरान हमले के बाद Blue Sparrow मिसाइल को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है. यह अत्याधुनिक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल बेहद ऊंचाई से लक्ष्य पर गिरकर सटीक हमला करने की क्षमता रखती है.

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( Image Source:  X/@IR_Uncensored - फाइल फोटो )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह7 Mins Read

Updated on: 6 March 2026 3:01 PM IST

Iran-Israel War: मिडिल ईस्‍ट यानी मध्य पूर्व 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की हत्‍या के बाद से जंग की आग में झुलस रहा है. इजराइल और अमेरिका के ज्‍वाइंट ऑपरेशन में दोनों देशों की वायुसेना ने अचानक ईरान पर बमबारी शुरू कर दी, जिसमें खामेनेई की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि इस हमले में इज़राइल ने एक अत्याधुनिक Blue Sparrow मिसाइल का इस्तेमाल कर ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाया. इस मिसाइल को “मिसाइल फ्रॉम स्पेस” कहा जाता है, क्योंकि यह पृथ्वी के वायुमंडल की ऊपरी सीमा तक जाकर फिर बेहद तेज़ रफ्तार से लक्ष्य पर गिरती है.

बताया जा रहा है कि इज़राइली फाइटर जेट्स से दागी गई इस मिसाइल ने तेहरान के उस कंपाउंड को निशाना बनाया, जहां ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेता मौजूद थे. इस ऑपरेशन में खुफिया एजेंसियों की महीनों की निगरानी, सैटेलाइट ट्रैकिंग और बेहद सटीक सैन्य तकनीक का इस्तेमाल किया गया.

क्या है Blue Sparrow मिसाइल?

Blue Sparrow एक अत्याधुनिक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है जिसे इज़राइल ने विकसित किया है. इसे फाइटर जेट से दागा जाता है और यह सामान्य मिसाइलों से बिल्कुल अलग तरीके से उड़ान भरती है. तकनीकी रिपोर्ट्स के अनुसार इस मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • लंबाई लगभग 6.5 मीटर
  • वजन करीब 1.9 टन
  • मारक क्षमता लगभग 2000 किलोमीटर
  • लॉन्च प्लेटफॉर्म: फाइटर जेट
  • उड़ान शैली: बैलिस्टिक ट्राजेक्टरी

जब यह मिसाइल छोड़ी जाती है तो पहले यह तेजी से ऊपर उठती है और पृथ्वी के वायुमंडल की ऊपरी सीमा तक पहुंच जाती है. इसके बाद यह एक री-एंट्री व्हीकल के जरिए बेहद तेज़ गति से वापस नीचे गिरती है और लक्ष्य को भेद देती है. इसी वजह से इसे “मिसाइल फ्रॉम स्पेस” कहा जाता है.

क्यों खतरनाक मानी जाती है यह मिसाइल?

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार Blue Sparrow की सबसे बड़ी ताकत इसकी गति और ऊंचाई है. क्योंकि यह मिसाइल पहले बहुत ऊंचाई तक जाती है और फिर अचानक लक्ष्य की ओर गिरती है, इसलिए दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम मिलता है.

इसके कुछ बड़े फायदे माने जाते हैं:

1. लंबी दूरी से हमला : फाइटर जेट दुश्मन की सीमा में घुसे बिना भी इस मिसाइल को लॉन्च कर सकते हैं.

2. इंटरसेप्ट करना मुश्किल : ऊंचाई और स्पीड के कारण इसे रोकना बेहद कठिन होता है.

3. हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक : यह बेहद सटीक तरीके से लक्ष्य को निशाना बनाती है.

4. हाई-वैल्यू टारगेट के लिए उपयोगी : जैसे सैन्य कमांड सेंटर, बंकर या शीर्ष नेतृत्व.

Sparrow मिसाइल सिस्टम की शुरुआत कैसे हुई?

Blue Sparrow वास्तव में एक बड़ी मिसाइल फैमिली का हिस्सा है. इस परिवार में शामिल हैं:

  • Black Sparrow
  • Silver Sparrow
  • Blue Sparrow

इन मिसाइलों को मूल रूप से इज़राइल ने अपने Arrow मिसाइल डिफेंस सिस्टम की टेस्टिंग के लिए बनाया था. दरअसल इनका काम सोवियत दौर की Scud बैलिस्टिक मिसाइलों की नकल करना था ताकि इज़राइल अपने एंटी-मिसाइल सिस्टम की क्षमता जांच सके. लेकिन समय के साथ इन मिसाइलों को तकनीकी रूप से इतना उन्नत कर दिया गया कि इन्हें वास्तविक युद्ध में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

तेहरान हमले में कैसे हुआ इस्तेमाल?

रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले की योजना महीनों पहले तैयार की गई थी. अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA लंबे समय से ईरान के शीर्ष नेतृत्व की गतिविधियों पर नजर रख रही थी. इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि तेहरान में एक सरकारी परिसर में ईरान के कई बड़े नेता बैठक करने वाले हैं और उसमें खामेनेई भी मौजूद होंगे. यह जानकारी इज़राइल के साथ साझा की गई. इसके बाद इज़राइल ने हमला करने का फैसला किया.

कैसे हुआ पूरा ऑपरेशन?

रिपोर्ट्स के अनुसार ऑपरेशन की टाइमलाइन कुछ इस प्रकार थी:

सुबह करीब 6 बजे (इज़राइल समय) इज़राइली फाइटर जेट अपने एयरबेस से उड़ान भरते हैं. करीब दो घंटे बाद जेट सुरक्षित दूरी से लगभग 30 मिसाइलें लॉन्च करते हैं. इनमें कई Blue Sparrow मिसाइलें भी शामिल थीं. तेहरान - समय सुबह लगभग 9:40 बजे, मिसाइलें उस कंपाउंड पर गिरती हैं जहां ईरान के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे. बताया जाता है कि इस हमले में दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी मारे गए.

खुफिया एजेंसियों की क्या भूमिका थी?

इस ऑपरेशन के पीछे एक बेहद जटिल इंटेलिजेंस नेटवर्क काम कर रहा था. बताया जाता है कि इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद लंबे समय से तेहरान के उस इलाके की निगरानी कर रही थी जहां खामेनेई का कंपाउंड स्थित था. उन्होंने कई तरीकों से जानकारी जुटाई:

  • बॉडीगार्ड्स की गतिविधियों की निगरानी
  • सुरक्षा शेड्यूल का विश्लेषण
  • इलाके के CCTV कैमरों का उपयोग
  • सैटेलाइट निगरानी

जब यह पक्का हो गया कि सभी बड़े अधिकारी एक ही जगह मौजूद हैं, तब हमला किया गया.

धोखे की रणनीति

इस ऑपरेशन में भ्रम की रणनीति भी अपनाई गई. रिपोर्ट्स के अनुसार इज़राइली सेना ने जानबूझकर ऐसी जानकारी जारी की कि वरिष्ठ सैन्य अधिकारी सप्ताहांत के लिए घर जा रहे हैं और सेना फिलहाल किसी बड़े अभियान की तैयारी नहीं कर रही. लेकिन वास्तविकता में अधिकारी गुप्त रूप से मुख्यालय लौट आए और हमले की तैयारी करने लगे.

मोबाइल नेटवर्क भी किया गया बाधित

हमले के समय एक और बड़ा कदम उठाया गया. बताया जाता है कि उस इलाके के आसपास के कई मोबाइल टावर अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए ताकि सुरक्षा बलों को समय रहते चेतावनी न मिल सके. इससे हमले के दौरान प्रतिक्रिया और भी धीमी हो गई.

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के हाई-प्रिसिजन हथियारों का इस्तेमाल भविष्य के युद्धों की दिशा बदल सकता है. Blue Sparrow जैसी मिसाइलें दिखाती हैं कि आधुनिक युद्ध अब केवल टैंकों और सैनिकों का नहीं बल्कि तकनीक, खुफिया जानकारी और सटीक हथियारों का युद्ध बन चुका है.

ईरान इजरायल युद्ध
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