Begin typing your search...

क्या है ईरान की ‘Mosaic Doctrine’? क्यों इससे चिंतित रहते हैं इजरायल और अमेरिका

ईरान की “Mosaic Doctrine” एक ऐसी सैन्य रणनीति है जिसमें हथियार, कमांड सिस्टम और सैन्य इकाइयों को छोटे-छोटे नेटवर्क में फैलाकर रखा जाता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी रणनीति के कारण इजरायल और अमेरिका के लिए ईरान को जल्दी हराना मुश्किल हो सकता है.

Irans Mosaic Doctrine military strategy
X
( Image Source:  Sora AI )

ईरान की सैन्य रणनीति में “Mosaic Doctrine” यानी “मोज़ेक सिद्धांत” एक बेहद अहम अवधारणा मानी जाती है. यह ऐसी रक्षा रणनीति है, जिसका मकसद दुश्मन की ताकतवर सेना के सामने भी देश की सैन्य क्षमता को बचाए रखना और लंबे समय तक युद्ध लड़ने की क्षमता बनाए रखना है. इस रणनीति के तहत ईरान अपनी सैन्य ताकत को एक जगह केंद्रित करने के बजाय छोटे-छोटे हिस्सों में बिखेर कर रखता है. ताकि किसी बड़े हमले के बाद भी उसकी युद्ध क्षमता पूरी तरह खत्म न हो सके.

क्या है Mosaic Doctrine का मतलब?

“Mosaic” शब्द का अर्थ होता है छोटे-छोटे टुकड़ों से मिलकर बना एक बड़ा चित्र. इसी विचार पर आधारित है ईरान की यह सैन्य रणनीति. इसके तहत सेना, हथियार, मिसाइल सिस्टम, कमांड सेंटर और सैन्य इकाइयों को अलग-अलग स्थानों पर फैलाकर रखा जाता है. यह गोरिल्ला या छापामार युद्ध जैसा है. यह कम्प्लीट युद्ध नहीं बल्कि छद्म युद्ध हैं. इसका फायदा यह होता है कि यदि दुश्मन किसी एक बड़े सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर हमला करता है, तो भी बाकी इकाइयाँ सक्रिय रहकर जवाबी कार्रवाई कर सकती हैं.

ईरान ने यह रणनीति क्यों अपनाई?

ईरान ने यह रणनीति मुख्य रूप से अमेरिका और इजरायल जैसे तकनीकी रूप से मजबूत देशों के संभावित हमलों को ध्यान में रखकर विकसित की. इन देशों के पास अत्याधुनिक एयर स्ट्राइक और प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल सिस्टम हैं, जो बड़े सैन्य ठिकानों को कुछ ही समय में नष्ट कर सकते हैं. इसी खतरे को देखते हुए ईरान ने अपनी सैन्य संरचना को इस तरह बनाया कि कोई भी एक हमला उसकी पूरी रक्षा व्यवस्था को खत्म न कर सके.

मोजेक रणनीति में क्या-क्या शामिल?

इस रणनीति के तहत युद्ध की कई स्तरों पर तैयारी की जाती है. इसमें दुश्मन देश को सेना के बड़े और छुपकर युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाली छोटी—छोटी टुकड़ियों पर एक साथ हमला बोलना होता है. चूंकि, ऐसी इकाइयां गोरिल्ला पैटर्न पर काम करती हैं, इसलिए ताकतवर देश को भी इससे पार पाना संभव नहीं होता. वियतनाम और अफगानिस्तान से, युद्ध की इसी शैली की वजह से अमेरिका को मैदान छोड़कर भागना पड़ा था. इस रणनीति के अलग-अलग घटकों के बारे में डिटेल में जानें सबकुछ.

अंडरग्राउंड मिसाइल बेस क्या है?

ईरान ने पहाड़ों और जमीन के नीचे कई गहरे मिसाइल बेस बनाए हैं, जिन्हें अक्सर “मिसाइल सिटी” कहा जाता है. इन सुरंगों में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का भंडार रखा जाता है. मोटी कंक्रीट दीवारों और चट्टानों के कारण इन्हें हवाई हमलों से नष्ट करना बेहद मुश्किल माना जाता है.

डिसेंट्रलाइज्ड कमांड सिस्टम कैसे काम करता है?

इस प्रणाली में सैन्य कमांड केवल एक केंद्रीय मुख्यालय पर निर्भर नहीं रहता. अलग-अलग क्षेत्रों में स्वतंत्र कमांड सेंटर बनाए जाते हैं. युद्ध की स्थिति में स्थानीय कमांडर तुरंत फैसले ले सकते हैं. इससे अगर केंद्रीय कमांड पर हमला भी हो जाए, तो सैन्य कार्रवाई रुकती नहीं है.

स्थानीय मिलिशिया नेटवर्क क्या भूमिका निभाता है?

ईरान ने अपने रक्षा ढांचे में स्थानीय मिलिशिया और पैरामिलिट्री नेटवर्क को भी शामिल किया है. इन समूहों को आपात स्थिति में सक्रिय किया जा सकता है. ये स्थानीय स्तर पर सुरक्षा, खुफिया जानकारी और लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करते हैं, जिससे नियमित सेना पर दबाव कम होता है.

मोबाइल मिसाइल लॉन्चर क्यों महत्वपूर्ण?

ईरान के पास ऐसे मिसाइल लॉन्चर हैं जिन्हें ट्रक या मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है. इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें लगातार स्थान बदलकर इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे दुश्मन के लिए इनका सटीक पता लगाना और उन्हें निशाना बनाना बेहद कठिन हो जाता है.

इजरायल और अमेरिका की क्यों बढ़ी चिंता?

इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों के लिए यह रणनीति चुनौतीपूर्ण मानी जाती है. कारण यह है कि अगर युद्ध की स्थिति बनती है, तो उन्हें ईरान की हजारों छोटी-छोटी सैन्य इकाइयों और छिपे हुए ठिकानों को एक साथ निशाना बनाना होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, यही वजह है कि ईरान ने जमीन के नीचे मिसाइल शहर, मोबाइल लॉन्चर और ड्रोन नेटवर्क विकसित किए हैं. इससे वह “पहले हमले में खत्म होने” के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है.

क्या भविष्य की लड़ाइयों में अहम होगी यह रणनीति?

सैन्य और युद्ध मामलों के जानकारों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में “Mosaic Doctrine” जैसी रणनीतियां और भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं. क्योंकि आज के समय में सैटेलाइट निगरानी और सटीक हमले (precision strikes) के दौर में बड़े सैन्य अड्डे आसानी से निशाना बन जाते हैं. ऐसे में छोटे-छोटे और छिपे हुए सैन्य नेटवर्क बनाकर युद्ध लड़ने की क्षमता बनाए रखना कई देशों के लिए आकर्षक मॉडल बन सकता है. इसी कारण ईरान की “Mosaic Doctrine” को आधुनिक असममित युद्ध (asymmetric warfare) की एक महत्वपूर्ण रणनीति माना जाता है.

वर्ल्‍ड न्‍यूजईरान इजरायल युद्ध
अगला लेख