बांग्लादेश चुनाव में हिंसा: BNP नेता मोहिबुज्जमान कोची की मौत, बम धमाके में 3 घायल
बांग्लादेश में हो रहे अहम संसदीय चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाओं ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है. खुलना जिले के एक मतदान केंद्र पर हुई झड़प में BNP के स्थानीय नेता मोहिबुज्जमान कोची की मौत हो गई, जबकि गोपालगंज में एक मतदान केंद्र के पास कच्चे बम के विस्फोट में तीन लोग घायल हो गए.
Bangladesh Elections 2026 Violence: बांग्लादेश में जारी अहम संसदीय चुनाव हिंसा और तनाव की घटनाओं के बीच आगे बढ़ रहा है. गुरुवार को अलग-अलग मतदान केंद्रों पर हुई झड़पों और विस्फोट की घटनाओं ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया. इस दौरान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के एक स्थानीय नेता की मौत हो गई, जबकि एक अन्य जगह हुए कच्चे बम विस्फोट में तीन लोग घायल हो गए.
खुलना जिले के आलिया मदरसा मतदान केंद्र पर 55 वर्षीय BNP नेता मोहिबुज्जमान कोची की मौत हो गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह से ही मतदान केंद्र पर तनाव का माहौल बना हुआ था.
हाथा पाई में गई मोहिबुज्जमान कोची की जान
खुलना सदर थाना के पूर्व BNP संगठन सचिव यूसुफ हारुन मजनू ने आरोप लगाया कि आलिया मदरसा के प्रिंसिपल चुनाव के दौरान जमात-ए-इस्लामी के पक्ष में प्रचार कर रहे थे. जब मोहिबुज्जमान कोची ने इसका विरोध किया तो दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई. मजनू के अनुसार, विवाद के दौरान प्रिंसिपल ने कोची को धक्का दे दिया, जिससे वह पास के एक पेड़ से टकरा गए. सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और समर्थकों में भारी आक्रोश फैल गया.
घटना की पुष्टि करते हुए खुलना सदर थाना के सब-इंस्पेक्टर खान फैसल रफी ने बताया कि जैसे ही दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ा, पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और दोनों पक्षों को अलग किया. उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के सही कारणों की पुष्टि होगी.
गोपालगंज में क्रूड बम का धमाका, तीन घायल
इसी दिन दूसरी गंभीर घटना गोपालगंज जिले में सामने आई, जहां एक मतदान केंद्र के पास कच्चे बम का विस्फोट हुआ. यह धमाका सुबह करीब 9 बजे निचुपारा इलाके के रेशमा इंटरनेशनल स्कूल मतदान केंद्र पर हुआ. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोहम्मद सरवर हुसैन के मुताबिक, विस्फोट में तीन लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो अंसार (सुरक्षा बल) के जवान और एक 13 वर्षीय बच्ची शामिल है. सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. विस्फोट के बाद इलाके में दहशत फैल गई और कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया बाधित रही.
राजनीतिक उथल-पुथल के बाद पहला चुनाव
यह चुनाव इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि यह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 2024 में हुए सत्ता से हटने के बाद पहला संसदीय चुनाव है. पिछले साल हुए व्यापक और हिंसक जनआंदोलन के बाद हसीना सरकार गिर गई थी, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई थी. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह चुनाव बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता बहाल करने और नई सरकार को वैध जनादेश दिलाने के लिहाज से निर्णायक माना जा रहा है.
संसद के साथ जनमत संग्रह भी
इस बार का चुनाव दोहरे स्वरूप में हो रहा है. एक ओर मतदाता संसद के सदस्यों का चुनाव कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी कराया जा रहा है. यदि यह चार्टर पारित होता है तो इसमें बड़े संवैधानिक बदलाव होंगे, जिनमें द्विसदनीय संसद की व्यवस्था, प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा और 2024 के जनआंदोलन को संविधान में मान्यता जैसे प्रावधान शामिल हैं.
प्रमुख राजनीतिक दल और गठबंधन
इस चुनाव में BNP को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. पार्टी के अध्यक्ष तारीक रहमान, जो वर्षों तक निर्वासन में रहे, अब सक्रिय राजनीति में लौट आए हैं. उन्होंने वादा किया है कि सत्ता में आने पर वे “स्वच्छ राजनीति” की शुरुआत करेंगे और भ्रष्टाचार तथा तानाशाही संस्कृति से देश को बाहर निकालेंगे. वहीं दूसरी ओर, हाल ही में वैधता पाने वाली जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व में 11 दलों का गठबंधन भी तेजी से उभरा है. जमात की वापसी से नागरिक समाज और अल्पसंख्यक समुदायों में धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं.
BNP जहां 10 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है, वहीं जमात अलग 11 दलों के मोर्चे की अगुवाई कर रही है. नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP), जिसने शेख हसीना विरोधी छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था, जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ जुड़ी हुई है. इसके अलावा इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश और जातीय पार्टी भी चुनावी मैदान में हैं.
अवामी लीग चुनाव से बाहर
इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक विशेषता यह है कि शेख हसीना की अवामी लीग को इस बार चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है. यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अवामी लीग दशकों तक सत्ता की मुख्य धुरी रही है.
प्रशासन अलर्ट पर
लगातार हो रही हिंसक घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है. पुलिस, सेना और अंसार बल को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है ताकि मतदान प्रक्रिया बाधित न हो. अधिकारियों का कहना है कि वे किसी भी तरह की हिंसा या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं करेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. जैसे-जैसे मतदान आगे बढ़ रहा है, पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह चुनाव बांग्लादेश को राजनीतिक स्थिरता और नई दिशा दे पाएगा, या हिंसा और टकराव इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करेंगे.





