राम मंदिर ट्रस्ट में कौन-कौन? 7 करोड़ चढ़ावा विवाद के बीच जानिए 15 सदस्यों वाली संस्था का पूरा स्ट्रक्चर: Explainer
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट चर्चा में है. जानिए ट्रस्ट के 15 सदस्यों के बारे में और मंदिर के प्रबंधन में उनकी क्या भूमिका है.
Ram Mandir Trust: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे से जुड़े कथित 7 करोड़ रुपये की चोरी के आरोपों को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है. इस बीच खुद को राम मंदिर का पूर्व अकाउंट्स इंचार्ज बताने वाले महिपाल सिंह ने दावा किया है कि मंदिर परिसर में चोरी की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं और उन्होंने खुद ऐसे कई मामलों को पकड़ा था.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिपाल सिंह ने कहा कि उन्होंने मंदिर में कथित गड़बड़ियों की जानकारी राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य गोपाल जी को दी थी. उनका आरोप है कि शिकायत करने के अगले ही दिन उन्हें उनके पद से हटा दिया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर परिसर के पिछले आठ महीने के सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए थे.
महिपाल सिंह ने क्या लगाए आरोप?
महिपाल सिंह के अनुसार, मंदिर परिसर के प्रबंधन में चंपत राय का प्रभाव काफी अधिक है और जो भी उनके फैसलों का विरोध करता है, उसे पद से हटा दिया जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाले सोने-चांदी के आभूषणों और बर्तनों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था.
उन्होंने कहा, "जब मैं मंदिर में तैनात था, तब चढ़ावे में मिलने वाले सोने-चांदी के आभूषणों और बर्तनों का कोई रिकॉर्ड नहीं था. केवल चंपत राय और टिल्लू को ही पता होता था कि इन्हें कहां जमा किया जाता है."
किस पॉजीशन पर काम कर चुके हैं इजराइल?
महिपाल सिंह ने बताया कि वह राम मंदिर निधि समर्पण अभियान के दौरान डिपॉजिटर के रूप में काम कर चुके हैं और उनके अधीन करीब 50 डिपॉजिटर कार्य करते थे. इसके बावजूद मंदिर के लेन-देन और चढ़ावे से जुड़ी रकम बैंक में जमा कराने वाले वाउचरों पर उनके हस्ताक्षर तक नहीं लिए जाते थे. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इस बारे में चंपत राय से सवाल किया तो उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.
क्या है श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (SRJBTK) का गठन भारत सरकार ने फरवरी 2020 में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए किया था. यह ट्रस्ट 15 सदस्यों वाला निकाय है, जिसमें 9 स्थायी सदस्य और 6 नामित सदस्य शामिल हैं. ट्रस्ट का प्रत्येक सदस्य हिंदू होना अनिवार्य है.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कौन-कौन?
ट्रस्ट की वेबसाइट के अनुसार, प्रमुख सदस्यों में पद्मश्री के. परासरण, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ, युगपुरुष परमानंद गिरी, स्वामी गोविंद देव गिरी (कोषाध्यक्ष), डॉ. अनिल मिश्रा, कृष्ण मोहन, महंत नृत्यगोपाल दास, चंपत राय, महंत दिनेंद्र दास, ज्ञानेश कुमार (आईएएस), अवनीश अवस्थी (आईएएस), अयोध्या के जिलाधिकारी और नृपेंद्र मिश्र शामिल हैं.
ट्रस्ट में के. परासरण को श्रीरामलला विराजमान की ओर से प्रतिनिधित्व दिया गया है. इसके अलावा देश के विभिन्न मंदिरों से जुड़े धार्मिक नेताओं, निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि, अयोध्या जिले के प्रमुख नागरिकों और एक दलित प्रतिनिधि को भी ट्रस्ट में शामिल किया गया है.
राम मंदिर मैनेजमेंट के किन मुद्दों का किया जिक्र?
उन्होंने मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ अन्य मुद्दों का भी उल्लेख किया. महिपाल सिंह के अनुसार, जब रामलला टेंट में विराजमान थे, तब प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे, लेकिन दर्शन मार्ग पर महिलाओं के लिए एक भी शौचालय नहीं था. उन्होंने कई बार शौचालय बनवाने की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसी तरह बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रखी गई चारों व्हीलचेयर खराब थीं, जिन्हें बदलने का अनुरोध भी अनसुना कर दिया गया.
इस विवाद के बीच गुरुवार को एटा में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि मंदिर में कथित चोरी की घटनाएं भूमि पूजन के समय से ही हो रही हैं.
वहीं, बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए महंत कमल नयन दास ने कहा कि यदि कहीं कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए. हालांकि उन्होंने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "जांच कौन करेगा? जांच करने वाले खुद ईमानदार नहीं हैं. जो लोग आज हंगामा कर रहे हैं, वे भी पूरी तरह निर्दोष नहीं हैं. जो लोग कभी साइकिल पर चलते थे, आज बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूम रहे हैं और आलीशान इमारतों में रह रहे हैं."
बीजेपी ने की जांच की मांग?
इस पूरे विवाद के बीच अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने भी मामले की जांच की मांग उठाई है. उन्होंने एक पत्र लिखकर कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और ऐसे में चढ़ावे, दान और मंदिर प्रशासन से जुड़े किसी भी विवाद या आरोप पर पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए.
डॉ. रजनीश सिंह ने कहा कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के जरिए सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए. उन्होंने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी एजेंसियों से कराने की मांग भी की.




