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कौन हैं Harsh Dubey, जिन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ पहले वनडे मुकाबले में किया डेब्यू? एक 'गलत मोड़' ने बदल दी जिंदगी

हर्ष दुबे ने आज अफगानिस्तान के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू किया. टीम इंडिया तक पहुंचने का उनका यह सफर संघर्ष, मेहनत और किस्मत के अनोखे मेल की कहानी है.

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हर्ष दुबे टीम इंडिया सेलेक्शन इमोशनल स्टोरी

नागपुर की एक सड़क पर हुआ एक छोटा सा संयोग... और उसी ने बदल दी एक बच्चे की पूरी जिंदगी... 13 साल के हर्ष दुबे जब अपने परिवार के साथ एक अनजान रास्ते पर पहुंचे, तो उन्हें नहीं पता था कि वही रास्ता उन्हें क्रिकेट की दुनिया के सबसे बड़े मंच तक ले जाएगा. आज वही हर्ष अफगानिस्तान के खिलाफ पहले वनडे में भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पहने हुए नजर आते हैं.

यह कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर के सेलेक्शन की नहीं, बल्कि संघर्ष, पिता के त्याग, खुद पर विश्वास और सालों की मेहनत की कहानी है. यह एक ऐसा सफर है, जिसमें कभी टीम से बाहर होने का दर्द था तो कभी आर्थिक संघर्ष था, लेकिन हर मुश्किल के बाद हर्ष ने खुद को और मजबूत बनाया.

एक गलत रास्ता... जिसने जिंदगी का रास्ता बदल दिया

मुंबई से नागपुर शिफ्ट होने के बाद हर्ष दुबे की जिंदगी में क्रिकेट अचानक आया. दरअसल, एक दिन स्कूल की किताबें लेने जाते समय उनका परिवार रास्ता भटक गया. रास्ता पूछते हुए उनकी नजर एक मैदान पर पड़ी, जहां बच्चे क्रिकेट की ट्रेनिंग कर रहे थे. जब हर्ष ने अपने पिता सुरेंद्र दुबे से पूछा कि वहां क्या हो रहा है, तो जवाब मिला, "क्रिकेट प्रैक्टिस." बस यही एक पल था, जिसने हर्ष के दिल में क्रिकेटर बनने का सपना पैदा कर दिया. उस दिन शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि एक छोटे बच्चे का यह सपना एक दिन भारतीय टीम तक पहुंच जाएगा.

पिता का त्याग, बेटे का सपना

हर्ष दुबे का सफर आसान नहीं था. परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन पिता सुरेंद्र दुबे ने बेटे के सपने के लिए हर संभव कोशिश की. क्रिकेट किट से लेकर ट्रेनिंग तक, हर छोटी-बड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए उन्होंने कई त्याग किए. हर्ष के लिए क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं था, बल्कि परिवार के भरोसे को पूरा करने की जिम्मेदारी भी थी. जब पहली बार उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही बच्चा आगे चलकर भारत के लिए खेलने का सपना देखेगा.

पहला मैच, पहली निराशा... लेकिन नहीं मानी हार

क्रिकेट करियर की शुरुआत में हर्ष को कई उतार-चढ़ाव देखने पड़े. 13 साल की उम्र में पहला मैच खेलने उतरे हर्ष बिना एक गेंद खेले रन आउट हो गए थे. यह पल किसी भी बच्चे के लिए निराशाजनक हो सकता था, लेकिन हर्ष ने इसे हार नहीं माना. उन्होंने मेहनत जारी रखी और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी.

रणजी टीम से बाहर हुए, फिर बने विदर्भ के मैच विनर

हर्ष का सफर हमेशा सीधा नहीं रहा. एक समय ऐसा भी आया, जब उन्हें रणजी टीम से बाहर कर दिया गया... लेकिन उन्होंने हार मानने की जगह अंडर-23 क्रिकेट में वापसी की और शानदार प्रदर्शन किया. इसी दौरान उन पर दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन की नजर पड़ी. अश्विन ने उनके वीडियो देखे और उन्हें अपनी गेंदबाजी सुधारने का मौका दिया. अश्विन की सलाह और हर्ष की मेहनत ने उनके खेल को नई दिशा दी.

69 विकेट लेकर घरेलू क्रिकेट में किया धमाका

2024-25 का सीजन हर्ष दुबे के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. विदर्भ की रणजी ट्रॉफी जीत में उन्होंने सबसे बड़ी भूमिका निभाई. पूरे सीजन में उन्होंने रिकॉर्ड 69 विकेट लिए और बल्ले से भी 469 रन बनाकर अपनी ऑलराउंड क्षमता दिखाई. इसके बाद विजय हजारे ट्रॉफी में भी उनकी कप्तानी में विदर्भ ने खिताब जीता. घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय टीम के चयनकर्ताओं की नजर में ला दिया.

वो एक घंटे की देरी, जिसने बदल दी जिंदगी

19 मई की शाम हर्ष चेन्नई एयरपोर्ट पर SRH के साथियों के साथ हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे. फ्लाइट एक घंटे लेट थी. आमतौर पर ऐसी देरी किसी के लिए परेशानी होती है, लेकिन हर्ष के लिए यही देरी जिंदगी की सबसे बड़ी खबर लेकर आई. उन्हें एक अनजान नंबर से फोन आया. सवाल था- "भारतीय टीम में चयन होने पर कैसा लग रहा है?" हर्ष को लगा कि शायद इंडिया-ए टीम में चयन हुआ है, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें पता चला कि यह बुलावा सीधे टीम इंडिया से आया है. अगर फ्लाइट समय पर चली जाती, तो शायद उन्हें यह खबर बाद में मिलती.

जब पापा रो पड़े

हर्ष के चयन की खबर सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए भावुक पल था. जब उनके पिता को पहली बार कॉल आया, तो उन्हें भी लगा कि शायद इंडिया-ए का मौका मिला है... लेकिन जब असली खबर सामने आई, तो खुशी आंसुओं में बदल गई. हर्ष बताते हैं कि वीडियो कॉल पर उनके पिता कुछ बोल नहीं पा रहे थे, सिर्फ रो रहे थे. मां बार-बार पूछ रही थीं, "पक्का टीम इंडिया में नाम आया है ना?" यह उस संघर्ष की जीत थी, जो सालों पहले एक छोटे से मैदान से शुरू हुआ था.

जडेजा की तरह बनने का सपना

हर्ष दुबे को उनकी बाएं हाथ की स्पिन और ऑलराउंड क्षमता के कारण रविंद्र जडेजा से जोड़ा जा रहा है. हर्ष खुद भी मानते हैं कि बचपन से उन्होंने जडेजा को देखकर क्रिकेट सीखा. उन्होंने कहा कि जडेजा जैसे महान खिलाड़ी को रिप्लेस करना संभव नहीं है, लेकिन वह जहां भी मौका मिलेगा, टीम के लिए योगदान देना चाहते हैं. उनका ध्यान तुलना पर नहीं, बल्कि प्रदर्शन पर है.

विराट-रोहित के साथ ड्रेसिंग रूम का सपना

अब हर्ष को भारतीय टीम में विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों के साथ खेलने का मौका मिलेगा. IPL में विराट कोहली उनका दूसरा विकेट रहे थे, लेकिन अब वही खिलाड़ी उनके साथ टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में होंगे. हर्ष के लिए यह किसी सपने से कम नहीं है. जिस खिलाड़ी को उन्होंने बचपन में टीवी पर देखा, अब उसी के साथ मैदान साझा करेंगे.

हर्ष दुबे की कहानी बताती है कि बड़े सपने हमेशा बड़े शहरों या बड़े संसाधनों से नहीं आते. कभी-कभी एक छोटा सा मौका, एक परिवार का भरोसा और सालों की मेहनत किसी खिलाड़ी को इतिहास के मंच तक पहुंचा देती है. एक गलत मोड़ से शुरू हुआ सफर... अब टीम इंडिया की नीली जर्सी तक पहुंच चुका है.

क्रिकेट न्‍यूजस्टेट मिरर स्पेशल
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