कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और बंद फ्यूल स्विच, जानें अहमदाबाद AI171 विमान हादसे से जुड़े 10 अहम सवालों के जवाब
एयर इंडिया फ्लाइट AI171 हादसे को एक साल बीत चुका है, लेकिन दुर्घटना की असली वजह अब भी रहस्य बनी हुई है. फ्यूल स्विच, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, पायलट एंगल और तकनीकी खराबी समेत जानिए इस मामले से जुड़े 10 बड़े सवाल और उनके जवाब.
Ahmedabad Plane Crash: एयर इंडिया फ्लाइट AI171 हादसे को एक साल बीत चुका है, लेकिन दुर्घटना की असली वजह अब भी रहस्य बनी हुई है. 12 जून 2025 को ही यह हादसा हुआ था. जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद दोनों इंजनों की ईंधन आपूर्ति आखिर क्यों बंद हो गई.
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कॉकपिट में मौजूद फ्यूल कंट्रोल स्विच "कटऑफ" स्थिति में पहुंच गए थे, जिसके बाद विमान के दोनों इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया. इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी.
अहमदाबाद AI171 प्लेन क्रैश से जु़ड़े 10 अहम सवालों के जवाह
सबसे बड़ा सवाल यह है कि टेकऑफ के तुरंत बाद फ्यूल कंट्रोल स्विच "कटऑफ" स्थिति में कैसे पहुंच गए, जिससे दोनों इंजनों की ईंधन आपूर्ति बंद हो गई.
हादसे का स्पष्ट कारण सामने आज तक नहीं आया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक उड़ाने के दौरान फ्यूल के दोनों स्विच ही बंद किए गए थे.
रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता है, "तुमने फ्यूल क्यों बंद किया?" जबकि दूसरा जवाब देता है, "मैंने ऐसा नहीं किया." इसी बातचीत ने कई नई अटकलों को जन्म दिया.
विमान की कमान कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर के हाथ में थी. दोनों अनुभवी और पूरी तरह से प्रशिक्षित पायलट थे तथा बोइंग 787 उड़ाने के लिए अधिकृत थे.
यह संभावना जांच के दायरे में है. हालांकि पायलट संगठनों का कहना है कि सभी तकनीकी पहलुओं की जांच किए बिना पायलटों को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा.
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) का दावा है कि विमान में पहले से कई तकनीकी समस्याएं थीं, जिनमें स्टेबलाइजर और इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी दिक्कतें शामिल थीं.
कुछ विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि सॉफ्टवेयर फॉल्ट, इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी या किसी छिपी तकनीकी खराबी की संभावना को अभी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता.
अब तक जांच एजेंसियों को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे साबित हो कि हादसा बोइंग 787 की डिजाइन खामी या GE इंजन की खराबी के कारण हुआ.
इस मामले में भारत के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन के विशेषज्ञ भी जांच में शामिल हैं. इंजन परीक्षण, तकनीकी विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परामर्श की प्रक्रिया अभी भी जारी है.
इस हादसे में इकलौते जीवित बचे यात्री विश्वाशकुमार रमेश थे. जो लगातार पारदर्शिता और स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि अंतिम रिपोर्ट आने तक अटकलें केवल भ्रम और दर्द को बढ़ाती हैं.




