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UP का 90% मुस्लिम वोटर BJP को हराने के लिए करना चाहता है साइकिल की सवारी लेकिन ओवैसी बिगाड़ेंगे सपा का खेल! एक्सपर्ट

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी समीकरण बदल रहे हैं. जानिए बीजेपी, सपा, ओवैसी और चंद्रशेखर की रणनीति और चुनौतियां.

UP का 90% मुस्लिम वोटर BJP को हराने के लिए करना चाहता है साइकिल की सवारी लेकिन ओवैसी बिगाड़ेंगे सपा का खेल! एक्सपर्ट
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उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है. चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है. सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी अपने वोट बैंक को मजबूत करने और नए सामाजिक समीकरण गढ़ने में जुट गए हैं. राजनीतिक गलियारों में समय से पहले चुनाव की अटकलों के बीच प्रदेश का सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है. इसी के साथ स्टेट मिरर के संवाददाता ने वरिष्ठ पत्रकार हेमंत तिवारी और निर्मल यादव से बातचीत की है जिसमें उन्होंने बताया है कि यूपी विधानसभा के 2027 के रण में ओवैसी और चंद्रशेखर का क्या असर होने वाला है?

पिछले एक दशक में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है. संगठन, बूथ प्रबंधन और सामाजिक इंजीनियरिंग के दम पर पार्टी लगातार चुनावी सफलता हासिल करती रही है. हालांकि इस बार हालात पहले जैसे आसान नहीं दिख रहे हैं.

राज्य के कुछ हिस्सों में ब्राह्मण, क्षत्रिय और दलित समुदायों के बीच असंतोष की चर्चा राजनीतिक गलियारों में सुनाई दे रही है. अयोध्या समेत कई क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों और विकास कार्यों को लेकर उठ रहे सवालों ने भी पार्टी की चिंताएं बढ़ाई हैं. इसके अलावा संगठन के भीतर मौजूद अंतर्विरोधों को दूर करना भी बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है.

सामाजिक इंजीनियरिंग बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत

हालांकि बीजेपी के पास संकट से उबरने का अपना मजबूत राजनीतिक मॉडल है. पार्टी जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने में माहिर मानी जाती है. चुनावी रणनीति, माइक्रो मैनेजमेंट और बूथ स्तर तक सक्रिय संगठन बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत माने जाते हैं. यही वजह है कि पार्टी किसी भी चुनौती का मुकाबला करने के लिए अभी से तैयारी में जुट गई है.

विपक्ष की सबसे बड़ी कमजोरी बनी आपसी दूरी

बीजेपी को चुनौती देने की बात तो विपक्ष लगातार करता है, लेकिन विपक्षी दलों के बीच एकजुटता का अभाव अभी भी साफ दिखाई देता है. कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष की सबसे बड़ी समस्या उसकी आपसी खींचतान और समन्वय की कमी है. अगर विपक्ष को बीजेपी के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़नी है तो उसे साझा रणनीति और साझा नेतृत्व की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे. फिलहाल ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है.

अखिलेश यादव के सामने संगठन को मजबूत रखने की चुनौती

समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी भूमिका निभा रही है. हालांकि राजनीतिक चर्चाओं में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या पार्टी जमीनी स्तर पर उतनी सक्रिय है जितनी सोशल मीडिया पर दिखाई देती है. कई विश्लेषकों का मानना है कि 2022 विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर और अधिक मजबूत होने की जरूरत थी. कार्यकर्ताओं के बीच संवाद और बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाना सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

ओवैसी की एंट्री से बदल सकता है कई सीटों का गणित

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक और दिलचस्प पहलू असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता है. उनकी पार्टी कुछ क्षेत्रों में लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है. विशेषकर पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुछ सीटों पर ओवैसी का प्रभाव चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है. हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुस्लिम वोट बैंक का बड़ा हिस्सा अभी भी बीजेपी को हराने की रणनीति के तहत प्रमुख विपक्षी दल के साथ जाने का रुझान रखता है.

चंद्रशेखर आजाद क्या बन पाएंगे तीसरा बड़ा विकल्प?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में चंद्रशेखर आजाद और उनकी पार्टी आजाद समाज पार्टी भी तेजी से चर्चा में है. खासकर दलित और युवा वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है. उनकी रैलियों में उमड़ रही भीड़ और सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता यह संकेत देती है कि वे प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह समर्थन मतदान के दिन वोटों में भी तब्दील हो पाएगा.

2027 का चुनाव क्यों माना जा रहा है बेहद अहम?

उत्तर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है. एक तरफ बीजेपी के सामने सत्ता बरकरार रखने की चुनौती होगी, तो दूसरी तरफ विपक्ष के लिए अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करने की परीक्षा होगी. जातीय समीकरण, सामाजिक गठजोड़, युवा वोटर, दलित राजनीति और मुस्लिम वोट बैंक जैसे कई कारक इस चुनाव की दिशा तय करेंगे. यही वजह है कि 2027 का चुनाव प्रदेश की राजनीति का सबसे दिलचस्प और बहुचर्चित मुकाबला बनता दिखाई दे रहा है.

अखिलेश यादवयोगी आदित्‍यनाथ
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