'बाबूजी भंडारा करा दो' ट्रेंड के पीछे रमाशंकर गुप्ता कौन? अरे मालिक 200 में 11 बाबा खाएंगे- VIDEO
हरिद्वार की हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं से 'बाबूजी भंडारा करा दो' कहने वाले रमाशंकर गुप्ता सोशल मीडिया पर छा गए हैं. जानिए कैसे एक साधारण भंडारा आयोजक इंटरनेट का वायरल चेहरा बन गया.
हरिद्वार की हर की पौड़ी पर अगर आप कभी गए हों, तो संभव है कि आपको एक शख्स बेहद मासूम अंदाज में कहते हुए मिल जाए, 'बाबूजी, भंडारा करा दो... बाबा लोग भूखे बैठे हैं.' यही लाइन आज सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की जुबान पर है और इसी ने एक साधारण व्यक्ति को इंटरनेट का चर्चित चेहरा बना दिया है.
यह शख्स हैं रमाशंकर गुप्ता, जिन्हें इंटरनेट की दुनिया में लोग 'भंडारा किंग' और 'भंडारा ब्रांड एंबेसडर' के नाम से जानते हैं. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई के रहने वाले रमाशंकर गुप्ता इन दिनों हरिद्वार में रहते हैं और वहीं भंडारे का प्रबंध करते हैं.
200 में कितने बाबा खाएंगे....
रमाशंकर की लोकप्रियता का कारण सिर्फ उनका काम नहीं, बल्कि उसे प्रस्तुत करने का अनोखा अंदाज है. वह हर की पौड़ी और आसपास आने वाले श्रद्धालुओं से बेहद विनम्रता के साथ भंडारा कराने की अपील करते हैं. उनका मशहूर संवाद है, '100 में पांच बाबा खाएंगे मालिक, 200 में 11 बाबा खाएंगे.' यही लाइन सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और देखते ही देखते हजारों लोगों ने इसे अपने वीडियो में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.
दिलचस्प बात यह है कि रमाशंकर सिर्फ लोगों से दान नहीं लेते, बल्कि पूरे भंडारे की जिम्मेदारी भी खुद संभालते हैं. खाना बनवाने से लेकर उसे परोसने और भोजन करने वालों को एकत्र करने तक, पूरा प्रबंधन वह स्वयं करते हैं. इसी वजह से सोशल मीडिया यूजर्स मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि यह 'फूड बाय हिमसेल्फ, क्राउड बाय हिमसेल्फ' वाला मॉडल है.
बाबू जी भंडारा के नाम से सोशल में छाया अलग-अलग वीडियो
हाल के दिनों में उनके वीडियो इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तेजी से वायरल हुए हैं. कई कंटेंट क्रिएटर्स उनकी शैली की नकल करते हुए वीडियो बना रहे हैं, जबकि कुछ लोग उनके संवादों को मीम और रील्स में इस्तेमाल कर रहे हैं. इंटरनेट पर अब "भंडारा करा दो बाबूजी" सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि एक ट्रेंड बन चुका है.
हालांकि वायरल होने के पीछे सिर्फ मनोरंजन नहीं है. कई लोग रमाशंकर गुप्ता की सादगी, सेवा भावना और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने की पहल की भी सराहना कर रहे हैं. यही कारण है कि एक साधारण भंडारा आयोजक आज सोशल मीडिया की दुनिया में पहचान बना चुका है.
हरिद्वार की गलियों से निकली यह कहानी दिखाती है कि इंटरनेट पर लोकप्रिय होने के लिए बड़े मंच या बड़ी पहचान की जरूरत नहीं होती. कभी-कभी एक सच्चा भाव, एक अलग अंदाज और लोगों से जुड़ने की कला ही किसी को लाखों लोगों के बीच चर्चित बना देती है.




